erer | Source: ererनई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत ढहने से हुई सात लोगों की मौत के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। हादसे की जांच के बीच पुलिस ने अब पीजी संचालक सुधांशु को भी गिरफ्तार कर लिया है। सुधांशु ने संबंधित इमारत को लीज पर लेकर उसमें छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट आवास संचालित किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जर्जर स्थिति वाली इमारत में पीजी का संचालन किन परिस्थितियों में किया जा रहा था।

मलबे में दबे 12 लोगों में सात की मौत

सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक भरभराकर ढह गई थी। हादसे के समय भवन में छात्रों के लिए पीजी संचालित किया जा रहा था। बचाव अभियान के दौरान मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन इनमें से सात लोगों की जान नहीं बच सकी। पांच अन्य लोग घायल हुए। इस घटना के बाद भवन की सुरक्षा, निर्माण और मरम्मत कार्य के साथ-साथ पीजी संचालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सुधांशु से पूछताछ में सामने आ सकती है अहम जानकारी

पुलिस के अनुसार सुधांशु ने इमारत को मालिक से लीज पर लेकर पीजी के रूप में संचालित किया था। अब जांच अधिकारी उससे लीज समझौते, भवन की स्थिति और वहां चल रहे मरम्मत कार्य से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इमारत को पीजी के रूप में इस्तेमाल करने से पहले उसकी सुरक्षा और रहने योग्य स्थिति की जांच की गई थी या नहीं।

पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां

सुधांशु से पहले पुलिस इस मामले में भवन से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस ने 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, उनके 81 वर्षीय पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा भवन के तलघर में मरम्मत का काम करा रहे ठेकेदार सोनाज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा गया था। अब पीजी संचालक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच में भवन के संचालन से जुड़े पहलू भी प्रमुखता से शामिल हो गए हैं।

जर्जर इमारत में छात्रों के रहने पर उठे सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस इमारत की हालत खराब बताई जा रही थी, उसमें छात्रों के रहने के लिए पीजी कैसे चल रहा था। यदि भवन में मरम्मत या निर्माण का काम चल रहा था तो क्या वहां रहने वाले छात्रों को इसकी जानकारी दी गई थी? भवन की सुरक्षा को लेकर किसी अधिकारी या संबंधित विभाग ने निरीक्षण किया था या नहीं? पुलिस इन सभी बिंदुओं को जांच के दायरे में लेकर आगे बढ़ रही है।

हादसे के बाद सरकार ने बढ़ाई कार्रवाई

सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में पीजी और असुरक्षित भवनों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। हादसे वाली इमारत के पास स्थित एक अन्य भवन को भी हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है। इसके साथ ही दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में संचालित पीजी का सर्वेक्षण कराया जा रहा है। प्रशासनिक टीमें भवनों की स्थिति और वहां उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं।

नगर निगम के पांच अधिकारी निलंबित

हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली नगर निगम के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है। साथ ही अवैध और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन अब ऐसे भवनों की पहचान कर रहा है, जहां नियमों की अनदेखी कर लोगों के रहने या अन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

पांचवीं गिरफ्तारी के बाद कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस

सुधांशु की गिरफ्तारी के बाद सत्य निकेतन हादसे की जांच एक नए चरण में पहुंच गई है। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इमारत को पीजी के लिए किस आधार पर लीज पर लिया गया था, उसकी वास्तविक स्थिति क्या थी और वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से इंतजाम किए गए थे। सात लोगों की मौत के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती हादसे की पूरी कड़ी को जोड़ना और प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका निर्धारित करना है।