erer | Source: ererहाजीपुर। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में हुए नाव हादसे ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस दुर्घटना में 13 लोगों की जान चली गई, जिनमें 12 बच्चे शामिल बताए गए हैं। हादसे के बाद घटनास्थल पर मातम पसरा हुआ है। इसी बीच एक ऐसा भावुक दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया। अपने बच्चों को खो चुकी एक मां वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। महिला की चीख-पुकार और असहनीय पीड़ा देखकर आसपास खड़े लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

डीएम के सामने टूट गई मां, दर्द देखकर भावुक हुए लोग

हादसे के बाद मंगलवार देर रात जब जिलाधिकारी वर्षा सिंह घटनास्थल पर पहुंचीं, तो वहां मौजूद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी दिखाई दी। इसी दौरान अपने बच्चों को खो चुकी एक महिला खुद को संभाल नहीं सकीं। डीएम को सामने देखते ही वह उनसे लिपट गईं और रोते हुए अपने परिवार पर टूट पड़े दुख का दर्द बयां करने लगीं। जिलाधिकारी ने महिला को संभालने का प्रयास किया। घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी और पत्रकार भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ दर्द से भरा वीडियो

डीएम वर्षा सिंह से लिपटकर रोती महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है। वीडियो में महिला अपने प्रियजनों को खोने का गम बयां करती दिखाई दे रही हैं। यह दृश्य हादसे की भयावहता और पीड़ित परिवारों की पीड़ा को सामने लाता है। एक तरफ परिवार अपने बच्चों और अपनों को खोने के सदमे से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पूरे इलाके में शोक का माहौल बना हुआ है।

भोज में शामिल होने जा रहे थे लोग, गंगा में डूब गई नाव

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा राघोपुर थाना क्षेत्र की रामपुर श्यामचंद पंचायत के वार्ड संख्या 18 में मंगलवार रात करीब नौ बजे हुआ। ग्रामीणों के मुताबिक, लगभग 20 से 25 लोग नाव पर सवार होकर सिंघेश्वर राय नामक व्यक्ति के यहां भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव में पानी भरने लगा और वह गंगा नदी के दियारा क्षेत्र में डूब गई। इस दुर्घटना में कुल 13 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई, जिनमें 12 बच्चे शामिल थे। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जिन परिवारों के सदस्य नाव पर सवार थे, उनके घरों में चीख-पुकार शुरू हो गई। बच्चों और अन्य लोगों के नदी में डूबने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े। रिपोर्ट के अनुसार, दो बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि कुछ अन्य लोगों की तलाश किए जाने की बात भी सामने आई।

घटनास्थल पर ग्रामीणों का गुस्सा, मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग

दुर्घटना के बाद देर रात जिलाधिकारी वर्षा सिंह, पुलिस अधीक्षक और अन्य प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों के पहुंचने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। कुछ लोग शवों को उठाने देने के लिए तैयार नहीं थे और मुख्यमंत्री को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। इस दौरान प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बचाव कार्य शुरू करने में देरी हुई और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम देर से पहुंची। हालांकि, ये ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने लोगों को समझाने और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया।

नाव की हालत पर भी उठे सवाल

हादसे के बाद ग्रामीणों ने नाव की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि दुर्घटनाग्रस्त नाव सरकारी थी और उसकी हालत जर्जर थी। ग्रामीणों के मुताबिक, नाव पर लोग सवार हुए तो उसमें पानी भरने लगा और अंततः वह नदी में पलट गई। नाव की वास्तविक स्थिति और दुर्घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इस घटना ने नाव की सुरक्षा, यात्रियों की संख्या और नदी में आवागमन से जुड़े इंतजामों पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, हादसे के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित तथ्यों की जांच जरूरी है।

रात में नाव चलाने पर प्रतिबंध के बावजूद हुआ हादसा

रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने रात के समय गंगा नदी में नाव चलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद भोज में शामिल होने के लिए लोगों ने रात में नाव से नदी पार करने का रास्ता चुना। इसी दौरान यह दर्दनाक दुर्घटना हुई। घटना ने नदी में रात के समय आवागमन और सुरक्षा नियमों के पालन की गंभीरता को फिर सामने ला दिया है। वैशाली के राघोपुर में हुए इस हादसे ने कई परिवारों को ऐसा दुख दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। बच्चों समेत 13 लोगों की मौत से पूरे इलाके में शोक व्याप्त है। अब पीड़ित परिवारों को राहत देने के साथ-साथ हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा इंतजामों पर सवालों का जवाब मिलना भी महत्वपूर्ण होगा।