
परिसीमन के मुद्दे पर तमिलनाडु के CM जोसेफ विजय और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाSource : Chrome
तमिलनाडु में परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के हालिया बयान को लेकर राज्य की विपक्षी पार्टियां सवाल उठा रही हैं। उनका आरोप है कि विजय ने विधानसभा में पारित पुराने प्रस्ताव के मुकाबले अब अपना रुख बदल दिया है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी परिसीमन को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया है।
विजय के बयान पर क्यों उठे सवाल?
तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के कई राज्य परिसीमन को लेकर अपनी चिंताएं पहले ही जाहिर कर चुके हैं। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र से मांग की है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहिए।विजय का कहना है कि जनसंख्या को नियंत्रित करने वाले दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए। उनके इसी बयान को लेकर अब विपक्ष सवाल उठा रहा है।
DMK और AIADMK ने घेरा
मुख्यमंत्री के रुख पर सत्तारूढ़ DMK और मुख्य विपक्षी दल AIADMK की ओर से सवाल उठाए गए हैं। दोनों दलों का कहना है कि विधानसभा में पारित प्रस्ताव में लोकसभा की कुल सीटों और राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व को बनाए रखने की बात कही गई थी।विपक्ष का आरोप है कि विजय के ताजा बयान में पूरे देश के मौजूदा प्रतिनिधित्व को बनाए रखने की बात नहीं कही गई, बल्कि उनका जोर मुख्य रूप से तमिलनाडु की सीटों को सुरक्षित रखने पर दिखाई दे रहा है।
पी. चिदंबरम ने क्या कहा?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर परिसीमन को लेकर कांग्रेस का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा परिसीमन, तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव और कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव की दिशा एक जैसी है।चिदंबरम के मुताबिक लोकसभा की 543 सीटों और तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या में बदलाव नहीं होना चाहिए। कांग्रेस चाहती है कि मौजूदा सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखा जाए।उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु के इस रुख को AIADMK और DMK दोनों का समर्थन मिल रहा है।
आखिर क्या है विजय का पुराना और नया रुख?
विवाद की मुख्य वजह तमिलनाडु विधानसभा में पारित प्रस्ताव और विजय के मौजूदा बयान के बीच अंतर को बताया जा रहा है। विधानसभा के प्रस्ताव में लोकसभा की कुल 543 सीटें बरकरार रखने और राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की बात कही गई थी।वहीं, मुख्यमंत्री विजय ने अपने हालिया बयान में इस व्यापक प्रस्ताव का हवाला देने के बजाय केंद्र से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहने की वजह से तमिलनाडु की संसद में हिस्सेदारी कम न हो।इसी अंतर को आधार बनाकर विपक्ष विजय पर 'यू-टर्न' लेने का आरोप लगा रहा है।
तीसरे बच्चे की पॉलिसी से भी जोड़ा जा रहा है मुद्दा
तमिलनाडु सरकार के तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाने के फैसले को भी परिसीमन की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस फैसले और परिसीमन के बीच सीधे राजनीतिक संबंध को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं।फिलहाल परिसीमन को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में बहस तेज है और विजय के बयान ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है।
