कावेरी जल विवाद पर बयान देते कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार। | Source: Chrome

कावेरी जल विवाद पर बयान देते कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार।Source : Chrome

कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से जारी विवाद एक बार फिर चर्चा में है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मेकेदातु बांध परियोजना को इस विवाद का स्थायी समाधान बताते हुए कहा कि अब इस योजना पर और देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दोनों राज्यों से बातचीत के जरिए आगे बढ़ने की अपील की।

मेकेदातु परियोजना को बताया स्थायी समाधान

रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि कावेरी जल विवाद का सबसे प्रभावी समाधान मेकेदातु बांध परियोजना है। उनके अनुसार, इस परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट अपना रुख स्पष्ट कर चुका है और केंद्र सरकार भी इस संबंध में अपनी स्थिति बता चुकी है। ऐसे में अब योजना को आगे बढ़ाने में समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मेकेदातु परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के खिलाफ तमिलनाडु की आपत्तियों को खारिज कर दिया था। इसके बाद मई 2026 में अदालत ने इस मामले में दायर समीक्षा याचिका भी स्वीकार नहीं की। शिवकुमार का कहना है कि इन फैसलों के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता और साफ हो गया है।

केंद्र सरकार की टिप्पणी का भी किया उल्लेख

डीके शिवकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में संसद में स्पष्ट किया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि कावेरी नदी पर किसी नए निर्माण के लिए कर्नाटक को तमिलनाडु की अनुमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए अब सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।

दोनों राज्यों से बातचीत की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विवाद किसी एक राज्य को ज्यादा या कम पानी मिलने का नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के हितों के बीच संतुलन बनाने का है। उन्होंने सुझाव दिया कि कर्नाटक और तमिलनाडु को बातचीत की मेज पर बैठकर आपसी सहमति से समाधान निकालना चाहिए।

कम बारिश के वर्षों में बढ़ता है विवाद

कावेरी नदी के जल बंटवारे का मुद्दा हर साल मानसून पर भी निर्भर करता है। जब वर्षा सामान्य से कम होती है, तब दोनों राज्यों के बीच पानी के वितरण को लेकर तनाव बढ़ जाता है। ऐसे में मेकेदातु परियोजना को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।