कोलकाता। पश्चिम बंगाल में IPS अधिकारी डॉ. बुशरा बानो के तबादले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, खड़गपुर की एडिशनल एसपी के पद पर तैनात बुशरा बानो ने अपने यूट्यूब वीडियो में ‘अस्सलामु अलैकुम’, ‘इंशाल्लाह’ और ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसी वीडियो को लेकर एक संगठन ने राज्य सरकार के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के कुछ समय बाद पुलिस अधिकारियों के फेरबदल का आदेश जारी किया गया, जिसमें बुशरा बानो का भी तबादला शामिल था।
UPSC अभ्यर्थियों के साथ साझा किया था तैयारी का अनुभव
रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. बुशरा बानो ने यूट्यूब पर एक वीडियो के माध्यम से UPSC की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के साथ अपना अनुभव साझा किया था। वीडियो में उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान मिली मदद और अपने अनुभवों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब से लौटने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की ‘रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी’ और वहां स्थित लाइब्रेरी ने उनकी तैयारी में महत्वपूर्ण सहायता की।
वीडियो में वह अन्य अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित करती हुई भी दिखाई देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यही वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया और इसके बाद उनके खिलाफ शिकायत की गई।
किन शब्दों को लेकर उठी आपत्ति?
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘हिंदू लीगल फंड’ नामक संगठन ने इस वीडियो को लेकर पश्चिम बंगाल की गृह सचिव संघमित्रा घोष के समक्ष शिकायत भेजी। संगठन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इस संबंध में अपनी आपत्ति दर्ज की।
संगठन का आरोप था कि वीडियो की शुरुआत बुशरा बानो ने ‘अस्सलामु अलैकुम’ कहकर की थी और बातचीत के दौरान उन्होंने ‘इंशाल्लाह’ तथा ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। शिकायत में इस बात पर भी आपत्ति जताई गई कि वीडियो में अधिकारी ने ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम’ जैसे अभिवादन का इस्तेमाल नहीं किया।
शिकायतकर्ता संगठन ने यह तर्क दिया कि ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी को सार्वजनिक मंच पर शब्दों का इस्तेमाल करते समय निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। इसी शिकायत के बाद बुशरा बानो के तबादले का मामला सामने आया।
शिकायत के बाद पुलिस विभाग में फेरबदल
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से शिकायत किए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर पश्चिम बंगाल सरकार ने बुशरा बानो समेत तीन पुलिस अधिकारियों के तबादले और फेरबदल से संबंधित आदेश जारी किए।
डॉ. बुशरा बानो को पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर की एडिशनल एसपी की जिम्मेदारी से हटाकर स्टेट आर्म्ड पुलिस (SAP) की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट नियुक्त किया गया है। वहीं चंदननगर पुलिस कमिश्नरेट में एडिशनल डीसी के पद पर तैनात पार्थ घोष को खड़गपुर का नया एडिशनल एसपी बनाया गया है।
क्या सरकार ने वीडियो को लेकर कार्रवाई की?
रिपोर्टों में बुशरा बानो के तबादले को वीडियो को लेकर हुई शिकायत के बाद जारी फेरबदल से जोड़ा गया है। हालांकि, उपलब्ध खबर में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है कि सरकार के आधिकारिक आदेश में तबादले का कारण सीधे तौर पर यूट्यूब वीडियो या उसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों को बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की ओर से सार्वजनिक व्यवस्था यानी ‘पब्लिक ऑर्डर’ का हवाला देते हुए पुलिस अधिकारियों का फेरबदल किया गया। इसलिए वीडियो को लेकर शिकायत और उसके बाद हुए तबादले के बीच संबंध को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
महुआ मोइत्रा ने सरकार पर साधा निशाना
बुशरा बानो के तबादले की खबर सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस कार्रवाई पर सवाल उठाया।
महुआ मोइत्रा ने लिखा कि जिस देश के प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन का उद्घाटन सेंगोल और साधुओं के साथ किया था, उसी देश में एक मुस्लिम IPS अधिकारी का सिर्फ ‘अस्सलामु अलैकुम’ और ‘इंशाअल्लाह’ कहने पर तबादला करना हास्यास्पद है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे कहा, “हम एक ऐसे देश में बदलते जा रहे हैं, जो नफरत और कट्टरता से भरा हुआ है। भगवान ही भारत को बचाए।”
तबादले को लेकर क्यों बढ़ी राजनीतिक बहस?
डॉ. बुशरा बानो के मामले में विवाद का केंद्र एक ओर उनका UPSC तैयारी से जुड़ा वीडियो है और दूसरी ओर उसमें इस्तेमाल किए गए धार्मिक अभिवादन और शब्द हैं। शिकायतकर्ता संगठन ने सार्वजनिक पद पर मौजूद अधिकारी से निष्पक्षता बनाए रखने की बात कही है, जबकि TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने इसे धार्मिक अभिव्यक्ति से जोड़कर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाया है।
इस मामले में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक तरफ शिकायतकर्ता संगठन वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्दों और अधिकारी की सार्वजनिक भूमिका को लेकर आपत्ति जता रहा है, वहीं दूसरी तरफ महुआ मोइत्रा तबादले को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठा रही हैं। सरकार की ओर से उपलब्ध रिपोर्ट में इस मामले पर अलग से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तीन पुलिस अधिकारियों के फेरबदल ने बढ़ाई चर्चा
बुशरा बानो का तबादला अकेला आदेश नहीं था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत के बाद बुशरा बानो समेत तीन पुलिस अधिकारियों के फेरबदल के आदेश जारी किए गए। इसी वजह से मामला केवल एक यूट्यूब वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस प्रशासन, सार्वजनिक पद पर धार्मिक अभिव्यक्ति और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है।
बुशरा बानो को खड़गपुर एडिशनल एसपी पद से हटाकर SAP की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट बनाए जाने और उनकी जगह पार्थ घोष को नियुक्त किए जाने के बाद इस घटनाक्रम पर चर्चा और तेज हो गई है।
क्या है पूरा विवाद?
पूरे मामले की शुरुआत UPSC की तैयारी को लेकर बनाए गए एक वीडियो से हुई, जिसमें डॉ. बुशरा बानो ने अपने अनुभव साझा किए थे। वीडियो में उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘अस्सलामु अलैकुम’, ‘इंशाल्लाह’ और ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे शब्दों को लेकर संगठन ने शिकायत की। शिकायत के बाद पुलिस विभाग में फेरबदल हुआ और बुशरा बानो को उनके मौजूदा पद से हटाकर दूसरी जिम्मेदारी दी गई।
इसके बाद TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। इस तरह एक अधिकारी के यूट्यूब वीडियो से शुरू हुआ मामला अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी चर्चा का मुद्दा बन गया है।
