कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट के उपचुनाव से पहले कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच कथित चुनावी समझौते को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस की ओर से कांग्रेस नेतृत्व के सामने नंदीग्राम सीट छोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, टीएमसी नेता कुणाल घोष ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
कांग्रेस का दावा, नंदीग्राम के बदले रेजीनगर का प्रस्ताव
प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार, करीब 15 दिन पहले तृणमूल कांग्रेस की ओर से दिल्ली में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से संपर्क किया गया था। कथित प्रस्ताव में नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने और रेजीनगर सीट से टीएमसी के उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कही गई थी।
भट्टाचार्य ने बताया कि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने इस प्रस्ताव पर विचार के लिए समय लिया और बाद में प्रदेश नेताओं से चर्चा की। उनके अनुसार प्रदेश नेतृत्व ने फिलहाल ऐसे किसी गठबंधन को आगे बढ़ाने के पक्ष में सहमति नहीं जताई। यह दावा कांग्रेस की ओर से किया गया है, जबकि टीएमसी ने प्रस्ताव दिए जाने से ही इनकार किया है।
टीएमसी ने कहा—ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कांग्रेस के इस दावे को खारिज कर दिया। ऐसे में फिलहाल नंदीग्राम सीट को लेकर दोनों दलों के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। कांग्रेस ने पहले ही दोनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।
कांग्रेस ने पूछा—जब सत्ता में थीं तब क्यों नहीं?
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने कथित प्रस्ताव को लेकर टीएमसी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में थी, तब भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के साथ इस तरह की चुनावी व्यवस्था की पहल नहीं की गई। अब कथित तौर पर कांग्रेस से सहयोग मांगने के दावे को लेकर उन्होंने टीएमसी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस के नेताओं ने नंदीग्राम को कठिन चुनावी मुकाबले वाली सीट बताते हुए भी टीएमसी के कथित प्रस्ताव पर टिप्पणी की है। हालांकि, ये कांग्रेस नेताओं के राजनीतिक दावे हैं और टीएमसी इन्हें स्वीकार नहीं करती।
नंदीग्राम में इस बार मुकाबला कई तरफा
नंदीग्राम उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने मिलन प्रधान को मैदान में उतारा है। भाजपा ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है, जबकि वाम दलों की ओर से शांतिगोपल गिरी चुनाव लड़ रहे हैं।
नंदीग्राम सीट उस समय खाली हुई जब शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल करने के बाद भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसी वजह से यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
ममता गुट और टीएमसी के दूसरे धड़े के बीच भी विवाद
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले टीएमसी के भीतर भी राजनीतिक विवाद चल रहा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला विरोधी गुट भी पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहा है। चुनाव आयोग के समक्ष दोनों पक्षों के बीच इस मामले को लेकर प्रक्रिया चल रही है।
ऐसे में नंदीग्राम का उपचुनाव केवल उम्मीदवारों के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और टीएमसी के बीच कथित संपर्क, टीएमसी के अंदर चल रहा विवाद और भाजपा की ओर से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इस सीट की राजनीतिक तस्वीर और ज्यादा बहुस्तरीय हो गई है।
