erer | Source: eerनई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने एशिया कप में शानदार जीत दर्ज की, लेकिन जीत के बाद ट्रॉफी को लेकर ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने क्रिकेट जगत में चर्चा तेज कर दी। पुरुष टीम के बाद अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी एशिया कप की ट्रॉफी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी के हाथों लेने से इनकार कर दिया। भारत ने वुमेंस एशिया कप 2026 के फाइनल में श्रीलंका को 72 रन से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार खिताब अपने नाम किया, लेकिन जीत के बावजूद ट्रॉफी भारतीय टीम के पास नहीं पहुंची।

आठवीं बार चैंपियन बना भारत, फिर भी ट्रॉफी नहीं ली

दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए वुमेंस एशिया कप 2026 के फाइनल में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 72 रन से शिकस्त दी। इस जीत के साथ भारत ने आठवीं बार एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। हालांकि, भारतीय टीम के ट्रॉफी कैबिनेट में इस टूर्नामेंट की आठवीं ट्रॉफी फिलहाल शामिल नहीं हो सकी है।

इसकी वजह एशियन क्रिकेट काउंसिल के चेयरमैन मोहसिन नकवी हैं। भारतीय महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार किया। इससे पहले सितंबर 2025 में एशिया कप जीतने वाली भारतीय पुरुष टीम ने भी मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की थी। उस समय सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने भी यही रुख अपनाया था।

BCCI ने क्यों लिया ऐसा फैसला?

इस पूरे मामले पर BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने स्पोर्ट्स तक से बातचीत में भारतीय बोर्ड के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले के पीछे अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुई घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बिगड़े संबंध प्रमुख कारण हैं।

देवजीत सैकिया ने कहा, "अब वजह इसके लिए कुछ दूसरी नहीं है। यहां मैं कोई बड़ी चीज नहीं बोलने जा रहा हूं। हमारा एक ही मकसद था कि जो पहलगाम में हुआ था अप्रैल 2025 में उसके बाद हमारी कुछ दिक्कतें उनसे थीं। उसके बाद हमारे पाकिस्तान के साथ रिश्ते खराब हो गदए। हम नहीं चाहते थे कि पाकिस्तान के साथ कोई गेम खेलें। बावजूद इसके BCCI ने सेंट्रल गवर्नमेंट की पॉलिसी को फॉलो किया और हम खेले।"

सैकिया के बयान से स्पष्ट है कि BCCI ने पाकिस्तान के साथ खेल संबंधी सरकार की नीति का पालन करते हुए टूर्नामेंट में हिस्सा लिया, लेकिन ट्रॉफी लेने के मामले में उसने अपना अलग रुख बरकरार रखा।

ACC की पुरानी परंपरा का भी दिया हवाला

BCCI सचिव ने ट्रॉफी वितरण की पुरानी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि एशियन क्रिकेट काउंसिल में पहले से एक अनलिखी परंपरा रही है। उनके अनुसार, जब जय शाह ACC के चेयरमैन थे, तब भी यह व्यवस्था थी कि एशिया कप की विजेता या उपविजेता टीम को ट्रॉफी संबंधित देश के अध्यक्ष या सचिव की ओर से दी जाती थी।

सैकिया ने कहा, "एसीसी की एक पुरानी पॉलिसी है, जब जय शाह एसीसी के चेयरमैन थे तो उस टाइम में भी यही नियम था कि जो टीम एशिया कप की चैंपियन होगी या रनर्स होगी वो देश का प्रेसिडेंट नहीं तो सेक्रेटरी ट्रॉफी देगा। यह एक अनरिटन नॉर्म्स था। जब जय शाह प्रेसिडेंट थे तो उन्होंने ट्रॉफी नहीं दी थी। बांग्लादेश या श्रीलंका जीता था। यह एक अनरिटन ट्रेडिशन है। अनरिटन नॉर्म्स है।"

उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल भारत के चैंपियन बनने के समय इस अनलिखी परंपरा का पालन नहीं किया गया और ACC के चेयरमैन ट्रॉफी देने के लिए पहुंचे थे। BCCI ने इसी वजह से उनसे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया।

‘जो हमारे खिलाफ युद्ध की बात करता है, उससे ट्रॉफी कैसे लें’

देवजीत सैकिया ने BCCI के फैसले को ‘नेशन इज फर्स्ट’ की नीति से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय खिलाड़ी और देशवासी देश को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने मोहसिन नकवी के भारत के खिलाफ युद्ध संबंधी बयान का भी उल्लेख किया।

सैकिया ने कहा, "हमारा भारत का हर खिलाड़ी और हर देशवासी नेशन इज फर्स्ट पॉलिसी अपनाता है। पूरा देश यह मानता है कि हम ऐसे शख्स से ट्रॉफी नहीं लेंगे जो हमारे देश के खिलाफ युद्ध की बात कहता है। उनसे हम लोग कैसे ट्रॉफी ले सकते है? इसीलिए मेंस के टाइम पर भी जब एशिया कप का चैंपियन भारत हुआ तो हमने ट्रॉफी नहीं ली और आज महिला दल भी चैंपियन हुआ है हम ट्रॉफी नहीं लिए।"

BCCI ने वैकल्पिक व्यवस्था का प्रस्ताव भी दिया था

BCCI सचिव के मुताबिक, भारतीय बोर्ड ने ट्रॉफी लेने से पूरी तरह इनकार नहीं किया था। उसकी कोशिश थी कि ACC के किसी अन्य पदाधिकारी के हाथों भारतीय टीम को ट्रॉफी दी जाए। सैकिया ने बताया कि BCCI ने ACC के डिप्टी चेयरमैन खालिद से ट्रॉफी प्रदान करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा, "उनके हाथ से हम ट्रॉफी नहीं लेने वाले थे, लेकिन कोशिश थी कि डिप्टी चेयरमैन हमें ट्रॉफी देगा। हम यह नहीं बोल रहे हैं कि BCCI चैंपियन है तो BCCI का कोई अधिकारी अपने हाथ से ट्रॉफी दे। हमारी कोशिश थी कि एसीसी का डिप्टी चेयरमैन खालिद भाई अपने हाथ से ट्रॉफी दे दें, लेकिन वो हमारा विनती कबूल नहीं किए। उन्होंने हमारी कोई बात नहीं मानी।"

सैकिया ने यह भी स्पष्ट किया कि BCCI का उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं था। बोर्ड चाहता था कि विजेता टीम को सम्मानजनक तरीके से ट्रॉफी मिल जाए और इसके लिए ACC के दूसरे पदाधिकारी को ट्रॉफी सौंपने का विकल्प दिया गया था।

ट्रॉफी नहीं मिली, लेकिन भारत की जीत पर कोई असर नहीं

BCCI सचिव ने कहा कि ट्रॉफी भले ही भारतीय टीम के पास नहीं आई हो, लेकिन इससे भारत की चैंपियन बनने की उपलब्धि पर कोई असर नहीं पड़ता। उनका कहना था कि मैच का परिणाम रिकॉर्ड में दर्ज है और पूरी दुनिया ने भारतीय टीम को श्रीलंका पर 72 रन से जीतते हुए देखा है।

उन्होंने कहा, "हम लोग ट्रॉफी जीते हैं। भारत चैंपियन है। टीवी पर सभी ने देखा है। मेंस में भी एशिया कप में इंडिया चैंपियन हुआ था। ट्रॉफी आए ना आए इससे कोई फर्क पड़ने वाला है। स्कोर बोर्ड में स्कोर साफतौर पर लिखा हुआ है। सबने टेलीविजन में देखा है कि इंडिया ने आज श्रीलंका को हराया है 72 रन से। इससे बड़ा खुशियों का मौका हमारा नहीं हो सकता।"

अब नजर एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक पर

देवजीत सैकिया ने कहा कि भारतीय महिला टीम का ध्यान अब ट्रॉफी विवाद पर नहीं, बल्कि आगे की चुनौती पर है। उन्होंने बताया कि टीम का अगला बड़ा लक्ष्य एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल करना है।

उन्होंने कहा, "अभी हमारा फोकस ट्रॉफी लेना नहीं, बल्कि एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल लेना है, जिस पर हम ध्यान केंद्रित करेंगे।"

इस बयान से BCCI ने यह संदेश देने की कोशिश की कि एशिया कप की ट्रॉफी को लेकर पैदा हुआ विवाद भारतीय टीम की उपलब्धि और उसके अगले लक्ष्य पर हावी नहीं होने दिया जाएगा।

‘आज नहीं तो कल ट्रॉफी BCCI के कबर्ड्स में आएगी’

ट्रॉफी को लेकर सैकिया ने यह भी कहा कि BCCI को उम्मीद है कि एशिया कप की ट्रॉफी अंततः भारतीय बोर्ड के पास पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने ACC से विवाद को बिना बढ़ाए समाधान निकालने का अनुरोध किया था, लेकिन उसकी बात स्वीकार नहीं की गई।

सैकिया ने कहा, "हम लोगों ने अनुरोध किया था कि ये सब कंट्रोवर्सी मत कीजिए, जो टीम जीती है, उनको ट्रॉफी मिलनी चाहिए। बिना किसी विवाद के इस मसले को हल किया जा सकता था, लेकिन नहीं किया गया तो ये उनका डोमेन की बात है तो हम लोग इस पर जोर जबरदस्ती नहीं कर सकते, लेकिन मैं आपको एक ही बात बोलता हूं और सारे भारतवर्ष को बोलता हूं कि ये ट्रॉफी आज नहीं तो कल हमारे यानी बीसीसीआई के कबर्ड्स में आएगी।"

पुरुष टीम के बाद महिला टीम का भी एक जैसा रुख

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात यह है कि भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमों ने लगातार दो एशिया कप जीत के बाद मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की। सितंबर 2025 में पुरुष टीम ने और सितंबर 2026 में महिला टीम ने एक जैसा रुख अपनाया। BCCI के अनुसार, यह फैसला पहलगाम की घटना के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में आई तल्खी और ‘नेशन इज फर्स्ट’ की नीति से जुड़ा है।

भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार एशिया कप जीत लिया है। ट्रॉफी समारोह को लेकर विवाद जरूर सामने आया, लेकिन BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने साफ किया कि बोर्ड की प्राथमिकता चैंपियन बनने की उपलब्धि से अधिक किसी औपचारिक ट्रॉफी को लेकर विवाद खड़ा करना नहीं है। BCCI का कहना है कि ट्रॉफी आज नहीं तो कल उसके कबर्ड्स में जरूर पहुंचेगी, जबकि भारतीय टीम अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल करने पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी।