erere | Source: erereनई दिल्ली। नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन और उसके दौरान दर्ज मामलों को लेकर अब एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को भी हैरानी में डाल दिया है। 5 सितंबर को दिल्ली में इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित मार्च से पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए नीट प्रोटेस्ट और 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की मांग की है। केंद्र के इस कदम को सीजेपी अपनी प्रमुख मांगों में से एक पर आगे बढ़ते कदम के तौर पर देख रही है।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की याचिका से बदला आंदोलन का माहौल

केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में संविधान के अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल के जरिए संबंधित मामलों को समाप्त करने की मांग की गई है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ने मामले की जल्द सुनवाई और त्वरित सूचीबद्धता की मांग की। इसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने मंगलवार को मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब सीजेपी ने 5 सितंबर को दिल्ली में बड़ा विरोध मार्च निकालने की घोषणा कर रखी है। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर पुलिस मुख्यालय तक जाने वाला है। सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आंदोलनकारी वहां धरना जारी रख सकते हैं।

सीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया ने खींचा ध्यान

केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने के बाद सीजेपी नेताओं ने जिस अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया दी, वह भी चर्चा का विषय बन गया है। सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने भीमराव आंबेडकर की तस्वीर वाली किताब को अपने चेहरे के सामने रखकर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। उनके इस अंदाज को बाबा साहब की तस्वीर के साथ प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया के रूप में देखा गया।

सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास ने भी सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह चश्मे के ऊपर से देखते हुए नजर आए। उनकी तस्वीर का अंदाज किसी अप्रत्याशित खबर पर हैरानी जताने जैसा दिखाई दिया। सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने इमोजी के जरिए प्रतिक्रिया दी, जबकि रत्ना सिंह ने मुस्कुराते हुए तस्वीर साझा की।

इन प्रतिक्रियाओं में किसी नेता ने लंबा बयान देने के बजाय तस्वीरों और इशारों का सहारा लिया। यही वजह है कि केंद्र के ताजा कदम के बाद सीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया भी लोगों का ध्यान खींच रही है।

5 सितंबर का मार्च क्यों है अहम?

सीजेपी ने 5 सितंबर को दिल्ली में इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने की घोषणा की है। यह मार्च नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों और पेपर लीक से प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे सहित अपनी मांगों को लेकर किया जाना है।

सीजेपी की ओर से कहा गया है कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को समाप्त किया जाना उसकी प्रमुख मांगों में शामिल है। ऐसे में केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में एफआईआर रद्द कराने की मांग करना आंदोलन की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

सीजेपी की ओर से इस घटनाक्रम को अपनी मांगों की दिशा में एक और उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, संगठन की अन्य मांगों को लेकर स्थिति अलग बनी हुई है।

सीजेपी की दो प्रमुख मांगें क्या हैं?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन समाप्त किया था। इसके बाद संगठन की ओर से सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी गई थीं। पहली मांग नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान दर्ज किए गए सभी मामलों को रद्द करने की थी।

सीजेपी का कहना था कि आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों को समाप्त किया जाना चाहिए। अब केंद्र सरकार ने इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मामलों को रद्द करने का अनुरोध किया है।

सीजेपी की दूसरी मांग उन सभी बच्चों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की है, जिन्होंने पेपर लीक की वजह से अपनी जान गंवाई। संगठन इस मांग को भी अपने आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल करता रहा है।

सरकार के कदम से क्या बदला?

केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट पहुंचना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एफआईआर रद्द करने का मुद्दा सीजेपी की घोषित मांगों में शामिल रहा है। अब इस विषय पर सरकार ने न्यायपालिका के सामने औपचारिक रूप से अपना पक्ष रखा है। मामले की सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित मामलों पर अंतिम फैसला क्या होता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 5 सितंबर के प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च से कुछ दिन पहले नीट प्रोटेस्ट से जुड़े मामलों को लेकर केंद्र सरकार की याचिका ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।

सीजेपी नेताओं के इशारों में दिखी खुशी और हैरानी

केंद्र के इस कदम के बाद सीजेपी नेताओं की तस्वीरों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अभिजीत दीपके ने आंबेडकर की तस्वीर वाली किताब के जरिए संकेत दिया, जबकि सौरभ दास ने हैरानी वाले अंदाज में तस्वीर साझा की। आशुतोष रांका और रत्ना सिंह की प्रतिक्रियाएं भी इसी घटनाक्रम से जुड़ी रहीं।

इन प्रतिक्रियाओं से यह संकेत जरूर मिलता है कि संगठन केंद्र सरकार के इस कदम को सकारात्मक घटनाक्रम के तौर पर देख रहा है। खास बात यह है कि नेताओं ने विस्तृत लिखित बयान देने के बजाय प्रतीकात्मक अंदाज में अपनी बात रखी।

अब आगे की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर

नीट प्रोटेस्ट और 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान दर्ज एफआईआर को लेकर केंद्र सरकार की याचिका अब सुप्रीम कोर्ट के सामने है। सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया की त्वरित सूचीबद्धता की मांग के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने मामले को मंगलवार को सूचीबद्ध करने को कहा है।

इस घटनाक्रम के बीच 5 सितंबर को होने वाला सीजेपी का इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित मार्च भी महत्वपूर्ण हो गया है। संगठन की मांगों में एफआईआर रद्द कराने के साथ-साथ पेपर लीक की वजह से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी शामिल है।