नई दिल्ली। त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले देशभर में चीनी की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं के लिए राहत वाली खबर सामने आई है। प्रमुख शहरों में चीनी के खुदरा भाव 22 दिनों के भीतर 12 रुपये से लेकर 16 रुपये प्रति किलो तक नीचे आ गए हैं। 22 अगस्त की तुलना में 12 सितंबर को कानपुर में चीनी 69 रुपये से घटकर 53 रुपये प्रति किलो रह गई, जबकि रांची में इसका भाव 70 रुपये से गिरकर 55 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। रिटेल कीमतों का यह आंकड़ा ChiniMandi से लिया गया है।
नौ प्रमुख शहरों में चीनी के दाम में बड़ी गिरावट
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश के नौ प्रमुख शहरों में चीनी के भाव में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। सबसे अधिक 16 रुपये प्रति किलो की गिरावट कानपुर और हैदराबाद में दर्ज हुई। कानपुर में 22 अगस्त को चीनी 69 रुपये प्रति किलो थी, जो 12 सितंबर को घटकर 53 रुपये रह गई। इसी तरह हैदराबाद में कीमत 70 रुपये से घटकर 54 रुपये प्रति किलो हो गई।
रांची, कोलकाता और गुवाहाटी में भी चीनी की कीमत 15 रुपये प्रति किलो नीचे आई। दिल्ली और रायपुर में 13 रुपये, मुंबई में 14 रुपये और चेन्नई में 12 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई।
22 अगस्त से 12 सितंबर के बीच ऐसे बदले भाव
शहर22 अगस्त का भाव12 सितंबर का भावगिरावटदिल्ली68 रुपये55 रुपये13 रुपयेकानपुर69 रुपये53 रुपये16 रुपयेरायपुर68 रुपये55 रुपये13 रुपयेमुंबई68 रुपये54 रुपये14 रुपयेरांची70 रुपये55 रुपये15 रुपयेकोलकाता70 रुपये55 रुपये15 रुपयेगुवाहाटी71 रुपये56 रुपये15 रुपयेहैदराबाद70 रुपये54 रुपये16 रुपयेचेन्नई70 रुपये58 रुपये12 रुपये
त्योहारों से पहले सरकार ने चीनी मिलों को दिया सख्त निर्देश
चीनी के बाजार में नरमी के बीच केंद्र सरकार ने चीनी मिलों पर निगरानी और सख्त कर दी है। सरकार ने मिलों को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक पखवाड़े के लिए निर्धारित चीनी कोटे के अनुसार ही बिक्री और आपूर्ति करें। उद्योग सूत्रों के अनुसार, निर्धारित मात्रा से कम या अधिक चीनी की बिक्री अथवा उसे भेजने की स्थिति में संबंधित मिलों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सितंबर के दूसरे पखवाड़े के लिए निर्धारित चीनी कोटे में पहले पखवाड़े की बची हुई मात्रा को आगे ले जाने की अतिरिक्त गुंजाइश नहीं होगी। इसका मतलब है कि मिलों को जिस अवधि के लिए जितना कोटा आवंटित किया गया है, उसी सीमा के भीतर बिक्री और प्रेषण करना होगा।
587 चीनी मिलों और दो रिफाइनरियों को मिला 13 लाख टन का कोटा
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने 30 अगस्त को जारी अधिसूचना के माध्यम से सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए 587 चीनी मिलों और दो रिफाइनरियों को कुल 13 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी का कोटा आवंटित किया था। निर्धारित व्यवस्था के तहत मिलों को अपने आवंटित कोटे की कम से कम 40 प्रतिशत मात्रा पहले सप्ताह में बेचनी थी, जबकि शेष मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी थी।
सरकार की यह व्यवस्था चीनी की उपलब्धता और बाजार में आपूर्ति को निर्धारित सीमा के भीतर बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना के बीच मिलों की बिक्री और स्टॉक पर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।
उत्तर प्रदेश को मिला सबसे बड़ा 4.20 लाख टन का कोटा
राज्यों में उत्तर प्रदेश को सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए सबसे बड़ा चीनी कोटा मिला है। उत्तर प्रदेश को करीब 4.20 लाख टन चीनी का आवंटन किया गया है। इसके बाद महाराष्ट्र को करीब 4.10 लाख टन और कर्नाटक को 1.77 लाख टन का कोटा दिया गया है।
तमिलनाडु, गुजरात, बिहार और पंजाब को करीब 24 हजार टन से 44 हजार टन के बीच चीनी का कोटा आवंटित किया गया है। इस कोटा व्यवस्था के तहत मिलों को निर्धारित मात्रा के अनुसार ही बाजार में चीनी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
स्टॉक छिपाने या गलत जानकारी देने पर होगी कार्रवाई
सरकार ने चीनी मिलों के स्टॉक पर भी निगरानी बढ़ा दी है। सभी मिलों को सितंबर के संबंधित पखवाड़े के लिए ओपनिंग स्टॉक, उत्पादन, बिक्री, डिस्पैच, रिलीज और क्लोजिंग स्टॉक की जानकारी ऑनलाइन जमा करनी होगी। यह विवरण 18 सितंबर तक उपलब्ध कराना होगा।
सरकार बिक्री के बाद चीनी के डिस्पैच की समयसीमा पर भी नजर रख रही है। मिलों को बिक्री के सात दिनों के भीतर चीनी का डिस्पैच सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही डिस्पैच से जुड़े वस्तु एवं सेवा कर (GST) बिलों का केंद्रीय और राज्य अधिकारियों की संयुक्त विशेष जांच में मिलान किया जाएगा।
क्लोजिंग स्टॉक का होगा भौतिक सत्यापन
सरकार ने 31 अगस्त को घोषित किए गए क्लोजिंग स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने की भी व्यवस्था की है। यदि मिल के घोषित स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया जाता है तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इस तरह सरकार सिर्फ चीनी की बिक्री पर ही नहीं, बल्कि मिलों के पास मौजूद वास्तविक स्टॉक की भी जांच कर रही है।
यह निगरानी ऐसे समय में बढ़ाई गई है जब त्योहारों का दौर शुरू हो चुका है और बाजार में चीनी की मांग महत्वपूर्ण रहती है। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि निर्धारित कोटे के अनुसार बाजार में चीनी की आपूर्ति होती रहे और स्टॉक से संबंधित जानकारी में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
जुलाई के रिटर्न में गड़बड़ी पर पहले ही नोटिस
सरकार ने जुलाई 2026 के P-II रिटर्न में गलत या फर्जी जानकारी देने वाली कुछ चीनी मिलों को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही नियमों का पालन नहीं करने वाली मिलों को अगले पखवाड़े का चीनी रिलीज कोटा नहीं देने की चेतावनी भी दी गई है।
इससे साफ है कि सरकार चीनी की बिक्री, स्टॉक और रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर मिलों पर सख्ती बरत रही है। निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाली मिलों को आगे कोटा आवंटन में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जूट की पैकेजिंग का नियम भी लागू
चीनी मिलों को पैकेजिंग से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करने का भी निर्देश दिया गया है। इसके तहत चीनी की 20 प्रतिशत मात्रा की पैकिंग जूट बैग में करना अनिवार्य है। सरकार की ओर से चीनी मिलों को इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
कुल मिलाकर त्योहारों से पहले एक ओर जहां देश के कई बड़े शहरों में चीनी के खुदरा भाव में 12 से 16 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट देखने को मिली है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने चीनी मिलों की बिक्री, स्टॉक, डिस्पैच और रिपोर्टिंग पर निगरानी कड़ी कर दी है। कानपुर और हैदराबाद में 16 रुपये प्रति किलो की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई, जबकि रांची, कोलकाता और गुवाहाटी में कीमतें 15 रुपये तक नीचे आईं। सरकार की सख्त कोटा और स्टॉक व्यवस्था के बीच अब चीनी बाजार की आपूर्ति और कीमतों पर आगे भी नजर बनी रहेगी।
