नई दिल्ली। आम लोगों की रसोई पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। दूध और चीनी की बढ़ी कीमतों के बीच अब प्याज के दाम में भी तेज उछाल ने घरेलू बजट को झटका दिया है। उपभोक्ता मामलों की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त को दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव 62 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। खास बात यह है कि पिछले साल इसी अवधि में प्याज करीब 33 रुपये किलो बिक रहा था। यानी एक साल के भीतर इसकी कीमत में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले महीने देश की मंडियों में प्याज का औसत भाव करीब 35 रुपये प्रति किलो बताया गया था।
प्याज की कीमत ने अचानक बढ़ाई रसोई की चिंता
प्याज भारतीय रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल है। ऐसे में इसके दाम में बड़ी वृद्धि का सीधा असर घरेलू खर्च पर पड़ता है। दिल्ली में 62 रुपये किलो तक पहुंचे भाव ने उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जो पहले से ही दूध, चीनी, खाना पकाने की गैस और ईंधन की बढ़ती कीमतों से दबाव महसूस कर रहे हैं।
प्याज की कीमत में आए इस उछाल का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहता। होटल, ढाबे और छोटे भोजनालयों में भी लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों के दाम पर दबाव पड़ सकता है।
दूध की कीमत में भी बड़ा झटका
महंगाई का असर दूध पर भी देखने को मिल रहा है। मुंबई में दूध के थोक भाव में एक सितंबर से नौ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। वर्तमान में वहां दूध करीब 93 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है, जो प्रस्तावित वृद्धि के बाद 102 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाएगा।
दूध की कीमत बढ़ाने के पीछे पशु आहार और चारे की लागत बढ़ने को प्रमुख कारण बताया गया है। हरे चारे और चूनी जैसी आवश्यक चीजों के महंगे होने से दुग्ध उत्पादकों की लागत बढ़ी है, जिसके बाद दूध के भाव में संशोधन का फैसला लिया गया।
चीनी ने भी पहले से बढ़ा रखा है घरेलू खर्च
चीनी की कीमतों ने भी लोगों की परेशानी कम नहीं होने दी है। दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव करीब 62 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है, जबकि एक साल पहले इसकी कीमत लगभग 45 रुपये किलो थी। इस तरह चीनी भी पिछले साल के मुकाबले काफी महंगी हो चुकी है।
त्योहारी मौसम नजदीक होने के कारण चीनी की बढ़ी कीमत का असर मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत पर भी पड़ सकता है। कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास के तहत सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए शुल्क-मुक्त चीनी आयात की अनुमति देने का फैसला किया है।
सरसों तेल भी 200 रुपये के पार
रसोई में इस्तेमाल होने वाले सरसों तेल की कीमत भी उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। खुदरा बाजार में सरसों तेल का भाव 200 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर चुका है। प्याज, चीनी और तेल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के महंगे होने से घर का मासिक बजट प्रभावित होना स्वाभाविक है।
एक तरफ खाद्य वस्तुओं के भाव बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईंधन और रसोई गैस की कीमतों ने भी घरेलू खर्च का दबाव बढ़ाया है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से बढ़ सकती है दूसरी चीजों की लागत
पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी का असर सीधे वाहन चालकों के खर्च पर पड़ता है, लेकिन इसका प्रभाव परिवहन के जरिए बाजार तक पहुंचने वाली वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मई में लगातार कई बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े थे और घरेलू स्तर पर इनकी कीमत में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई।
ईंधन महंगा होने पर माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। इसका असर सब्जियों से लेकर रोजमर्रा के दूसरे सामान तक की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
रसोई गैस का खर्च भी बढ़ा
घरेलू बजट पर रसोई गैस की कीमतों का भी असर पड़ा है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में इस साल 79 रुपये तक की बढ़ोतरी बताई गई है। पिछले साल आठ अप्रैल को दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 853 रुपये थी, जबकि अब यह 942 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है।
घरेलू गैस की कीमत बढ़ने से हर महीने रसोई पर होने वाला खर्च बढ़ जाता है। खासकर मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों के लिए लगातार बढ़ती आवश्यक वस्तुओं की कीमतें घरेलू बजट को संतुलित करना मुश्किल बना सकती हैं।
व्यावसायिक गैस सिलेंडर में भी भारी उछाल
व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी इस अवधि में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक दिसंबर 2025 को दिल्ली में व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 1,580.50 रुपये बताई गई थी। बाद में कीमत में बदलाव के बाद इसका भाव करीब 2,738 रुपये तक पहुंचने की जानकारी दी गई है।
व्यावसायिक गैस महंगी होने का असर होटल, रेस्तरां, ढाबे और अन्य खाद्य कारोबारों की लागत पर पड़ सकता है। कारोबारियों की लागत बढ़ने पर इसका कुछ असर ग्राहकों को मिलने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल, कब मिलेगी राहत?
दूध, चीनी, प्याज, तेल, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ता के सामने खर्च संभालने की चुनौती बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ता है जिनकी आय सीमित है और जिनके मासिक खर्च का बड़ा हिस्सा भोजन, परिवहन और रसोई से जुड़ी आवश्यकताओं पर जाता है।
फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में प्याज समेत जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में राहत मिलती है या महंगाई का यह दबाव आगे भी जारी रहता है।
