erer | Source: ererपटना। बिहार पुलिस में महिला जवानों की बढ़ती संख्या और कानून-व्यवस्था संभालने में उनकी अहम भूमिका को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने उनके लिए सुरक्षा उपकरणों की नई खेप मंगाने का फैसला किया है। महिला पुलिसकर्मियों को अब ऐसे आधुनिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल वर्तमान में आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) और सीआरपीएफ (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) में तैनात महिला जवान भी कर रही हैं। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए करीब दस-दस हजार पॉलीकार्बोनेट लाठी, हेलमेट, फुल बॉडी प्रोटेक्टर और शील्ड खरीदने का ऑर्डर दिया है। इन उपकरणों के दिसंबर तक उपलब्ध होने की उम्मीद है।

36 हजार महिला पुलिसकर्मियों के लिए बदलेगा सुरक्षा इंतजाम

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, अब तक बिहार पुलिस में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी बड़े स्तर पर एक जैसे लाठी, बॉडी प्रोटेक्टर और बचाव शील्ड का इस्तेमाल करते रहे हैं। लेकिन बिहार पुलिस में करीब 36 हजार महिला बल के जुड़ने और कानून-व्यवस्था से जुड़ी ड्यूटी में उनकी लगातार बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए महिला पुलिसकर्मियों के लिए अधिक सुविधाजनक और उनकी शारीरिक संरचना के अनुकूल उपकरण उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस की गई।

इसी को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की खरीद का आदेश दिया गया है। इन उपकरणों को इस तरह तैयार किया गया है कि महिला जवानों को ड्यूटी के दौरान सुरक्षा के साथ-साथ शरीर की सहज गतिविधियों में भी कम परेशानी हो।

पारंपरिक लाठी से अलग होगी पॉलीकार्बोनेट लाठी

महिला पुलिसकर्मियों को विशेष पॉलीकार्बोनेट लाठी दी जाएगी। पुलिस मुख्यालय के मुताबिक यह लाठी पारंपरिक बांस या सामान्य लाठी की तुलना में हल्की और मजबूत होती है। भारी प्रहार पड़ने के बावजूद इसके टूटने या मुड़ने की संभावना काफी कम रहती है।

इस विशेष लाठी का वजन 500 ग्राम से अधिक नहीं होगा। हल्का वजन होने के कारण इसे लंबे समय तक ड्यूटी के दौरान संभालना अपेक्षाकृत आसान होगा। कानून-व्यवस्था की स्थिति में महिला पुलिसकर्मियों को इससे अपनी सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण दोनों में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

शरीर के हिसाब से तैयार होगा फुल बॉडी प्रोटेक्टर

नई व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मियों के लिए विशेष फुल बॉडी प्रोटेक्टर भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसे महिलाओं की शारीरिक संरचना को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सुरक्षा देने के साथ-साथ ड्यूटी के दौरान शरीर की सामान्य गतिविधियों को आसान बनाए रखना है।

प्रोटेक्टर पहनने के बाद दौड़ने, हाथ उठाने या वाहन चलाने जैसी गतिविधियों में अनावश्यक परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा गया है। सीने और पसलियों पर भी जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का वजन करीब दो से छह किलोग्राम तक होगा, जिससे पारंपरिक और भारी सुरक्षा गियर की तुलना में इसे लंबे समय तक पहनना अपेक्षाकृत आसान रहेगा।

पत्थरबाजी से लेकर एसिड अटैक तक में सुरक्षा का दावा

कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है। नई सुरक्षा व्यवस्था में शामिल फुल बॉडी प्रोटेक्टर को आग, पत्थरबाजी, चाकू के हमले और एसिड अटैक जैसी खतरनाक परिस्थितियों में सुरक्षा देने के लिए तैयार किया गया है।

इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि महिला जवान सुरक्षा उपकरण पहनकर भी अपनी ड्यूटी से जुड़ी गतिविधियां आसानी से कर सकेंगी। सुरक्षा और गतिशीलता के बीच संतुलन बनाने पर खास ध्यान दिया गया है।

गर्मी और उमस में भी कम होगी परेशानी

बिहार जैसे गर्म और उमस वाले मौसम में लंबे समय तक सुरक्षा उपकरण पहनकर ड्यूटी करना पुलिसकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से नए उपकरणों के अंदरूनी हिस्से में आरामदायक और पसीना सोखने वाले कुशन या 3डी मेश फैब्रिक का इस्तेमाल किया जाता है।

इससे शरीर में गर्मी और पसीने के कारण होने वाली बेचैनी को कम करने में मदद मिलेगी। यानी महिला जवानों के लिए सुरक्षा बढ़ाने के साथ लंबे समय तक उपकरण पहनकर ड्यूटी करने को भी अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई है।

पारदर्शी शील्ड से सुरक्षा के साथ सामने का नजारा भी साफ

बिहार पुलिस महिला जवानों के लिए पॉलीकार्बोनेट शील्ड भी खरीद रही है। इस शील्ड की खासियत इसका पारदर्शी होना है। इसे सामने रखने के बाद भी पुलिसकर्मी इसके पीछे से घटनास्थल और सामने मौजूद गतिविधियों को देख सकेंगी।

पॉलीकार्बोनेट सामग्री को बेहद मजबूत माना जाता है। दी गई जानकारी के मुताबिक यह कांच की तुलना में करीब 250 गुना अधिक मजबूत और लगभग अटूट होती है। ईंट, पत्थर, लाठी, रॉड या अन्य भारी वस्तुओं के प्रहार को झेलने की क्षमता के कारण दंगा नियंत्रण और कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों में यह सुरक्षा उपकरण महत्वपूर्ण हो सकता है।

चेहरे और आंखों की सुरक्षा के लिए 10 हजार हेलमेट

महिला पुलिसकर्मियों के लिए दंगा नियंत्रण हेलमेट भी खरीदे जा रहे हैं। पुलिस मुख्यालय ने ऐसे करीब 10 हजार हेलमेट की खरीद का आदेश दिया है। इनका उद्देश्य चेहरे, गर्दन और आंखों को चोट से बचाना है।

दंगा या भीड़ नियंत्रण के दौरान ऊपर से आने वाली वस्तुओं अथवा सामने से होने वाले प्रहार के जोखिम को देखते हुए हेलमेट पुलिसकर्मियों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण माना जाता है। नई व्यवस्था में महिला बल को भी इस तरह के आधुनिक सुरक्षा साधनों से लैस किया जाएगा।

आरएएफ और सीआरपीएफ की महिला जवानों की तर्ज पर सुविधा

बिहार पुलिस में उपलब्ध कराए जा रहे ये आधुनिक उपकरण पूरी तरह नए प्रकार के नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आरएएफ और सीआरपीएफ में तैनात महिला जवान पहले से ही इस तरह के सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल कर रही हैं। अब बिहार पुलिस की महिला जवानों को भी इसी तरह के आधुनिक सुरक्षा साधनों से लैस करने की दिशा में कदम उठाया गया है।

इस बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य महिला पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी के दौरान बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

अंधेरे में निगरानी के लिए 102 दूरबीनों की भी खरीद

महिला पुलिस सुरक्षा उपकरणों के साथ बिहार पुलिस ने अपनी अन्य तकनीकी और जांच संबंधी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाया है। पुलिस ने टोही अभियानों के लिए ऐसी 102 दूरबीनों की खरीद को मंजूरी दी है, जिनसे रात या अंधेरे में भी देखा जा सकेगा।

इन दूरबीनों का इस्तेमाल निगरानी और टोही अभियानों में किया जा सकेगा। अंधेरे में गतिविधियों पर नजर रखने के लिहाज से इन्हें उपयोगी उपकरण माना जा रहा है।

डीएनए जांच के लिए रियल टाइम पीसीआर मशीन

पुलिस की जांच व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए डीएनए जांच से संबंधित उपकरण की खरीद भी की जा रही है। इसके तहत एक रियल टाइम पीसीआर मशीन खरीदी जाएगी। इसके अलावा घटनास्थल से जुटाए गए नमूनों को सुरक्षित रखने और जमा करने के लिए एक रेफ्रीजरेटेड सेंट्रीफ्यूज की खरीद की जा रही है।

इन उपकरणों की खरीद से जांच प्रक्रिया में वैज्ञानिक तकनीक के इस्तेमाल को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

दिसंबर तक उपकरण उपलब्ध होने की उम्मीद

बिहार पुलिस मुख्यालय ने पॉलीकार्बोनेट लाठी, फुल बॉडी प्रोटेक्टर, शील्ड और दंगा नियंत्रण हेलमेट समेत अन्य उपकरणों की खरीद के लिए आदेश जारी कर दिया है। इन सुरक्षा उपकरणों के दिसंबर तक उपलब्ध होने की उम्मीद है।

करीब 36 हजार महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में उनकी बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आधुनिक उपकरणों से महिला पुलिस बल को सुरक्षा के साथ अधिक सहज तरीके से ड्यूटी करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, निगरानी और वैज्ञानिक जांच से जुड़े उपकरणों की खरीद बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली को तकनीकी रूप से मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।