erer | Source: erereनई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने जंतर-मंतर पर हुई कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी है। हालांकि अदालत ने राहत के साथ ऐसी सख्त शर्तें भी लगाई हैं, जिनका उल्लंघन होने पर उनकी अंतरिम जमानत पर दोबारा विचार किया जा सकता है और उन्हें फिर से हिरासत में भेजे जाने की स्थिति बन सकती है।

अदालत ने जमानत को बनाया आचरण से जुड़ा परीक्षण

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत की अवधि में स्वतंत्र भारद्वाज के व्यवहार पर नजर रखी जाएगी। नियमित जमानत की याचिका पर आगे फैसला लेते समय इस अवधि के दौरान उनके आचरण और जांच अधिकारी की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा जाएगा।

अदालत ने माना कि भारद्वाज दस दिन से अधिक समय हिरासत में रह चुके हैं और यह अवधि उन्हें अपने आचरण पर विचार करने के लिए पर्याप्त अवसर देती है। इसके बाद उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती के आधार पर तीन सप्ताह की अंतरिम राहत दी गई।

सोशल मीडिया पर केस को लेकर पोस्ट करने पर रोक

अंतरिम जमानत के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज को सोशल मीडिया पर इस मामले से संबंधित कोई पोस्ट करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने उनके लिए यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले से जुड़े पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार के किसी सदस्य से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे।

जांच अधिकारी को उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियां भी शामिल हैं। अगली सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी को इस अवधि में उनके व्यवहार से संबंधित रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

कोर्ट ने कहा—फैसला सोशल मीडिया से नहीं, सबूतों से होगा

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 23 जून 2026 को हुई घटना के संबंध में अंतिम निर्णय सार्वजनिक चर्चाओं या सोशल मीडिया पर सामने आने वाली सामग्री के आधार पर नहीं किया जाएगा। मामले का फैसला अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

अदालत के अनुसार अंतरिम जमानत की अवधि में भारद्वाज के आचरण को देखा जाएगा और उसके बाद नियमित जमानत के अनुरोध पर विचार किया जाएगा। इस तरह फिलहाल मिली राहत को अंतिम जमानत नहीं माना गया है।

शर्त टूटी तो अगली तारीख का इंतजार भी जरूरी नहीं

अदालत ने शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी को महत्वपूर्ण अधिकार भी दिया है। यदि अंतरिम जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन होता है तो इसकी सूचना तत्काल अदालत को दी जा सकती है। इसके लिए अगली सुनवाई की तारीख तक इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।

अदालत ऐसी सूचना मिलने पर अंतरिम जमानत की समीक्षा कर सकती है या उसे रद्द करने पर विचार कर सकती है। नियमित जमानत की याचिका फिलहाल लंबित रहेगी और अगली सुनवाई में भारद्वाज के आचरण तथा जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर उस पर विचार किया जाएगा।

इस मामले में अदालत की ओर से लगाई गई शर्तों के कारण तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत के बावजूद स्वतंत्र भारद्वाज के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।