erere | Source: ererनई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका के नेतृत्व में शुक्रवार को बड़ी संख्या में समर्थकों ने नई दिल्ली स्थित संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्वयंभू हिंदुत्व प्रभावक स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यह प्रदर्शन सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो को लेकर किया गया, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज ने एक प्रदर्शनकारी छात्रा निशू आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट का दावा किया है। प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की।

संसद मार्ग थाने के बाहर फिर प्रदर्शन, चंद्रशेखर आजाद भी पहुंचे

प्रदर्शन में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद भी सीजेपी समर्थकों के साथ मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पर्याप्त कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। इसी मुद्दे को लेकर सीजेपी की ओर से दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई।

मामले ने उस समय और राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब सीजेपी संयोजक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा को निशाने पर लेते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर कई पोस्ट किए और पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

अभिजीत दीपके ने डीसीपी सचिन शर्मा पर लगाए गंभीर आरोप

अभिजीत दीपके ने अपने पोस्ट में दिल्ली पुलिस और डीसीपी सचिन शर्मा पर दो युवा लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने और वर्दी का अपमान करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि स्वतंत्र भारद्वाज अब तक जेल में क्यों नहीं हैं। दीपके ने एक पोस्ट में यह दावा भी किया कि उन्हें विभाग के कुछ लोगों से सचिन शर्मा के कथित रूप से कट्टर संघी होने की जानकारी मिली है।

हालांकि, ये सभी आरोप अभिजीत दीपके की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें आरोप और दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।

दो महीने बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावा

अभिजीत दीपके ने पीड़ित छात्रा निशू आजाद का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जब उनके पिता पर कथित तौर पर हमला हुआ, तब निशू ने पुलिस से दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। दीपके के अनुसार, छात्रा ने अपने पिता के लिए न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या की बात तक कही थी। उन्होंने दावा किया कि घटना के करीब दो महीने बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।

दीपके ने इस कथित मामले में डीसीपी सचिन शर्मा की भूमिका की जांच और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। उनका आरोप है कि पुलिस की ओर से कार्रवाई में कथित देरी के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

विवाद की जड़ में क्या है वायरल वीडियो?

पूरे विवाद की शुरुआत स्वतंत्र भारद्वाज के एक साक्षात्कार की कथित वायरल वीडियो क्लिप से हुई। इंटरनेट पर प्रसारित इस क्लिप में भारद्वाज स्वयं को कट्टर हिंदू बताते हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशू आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट का जिक्र करते दिखाई देते हैं।

वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते सुनाई देते हैं कि उन्होंने निशू आजाद के पिता की खोपड़ी फोड़ दी थी। बातचीत में उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था में गंभीर हमले से संबंधित धारा 307 का भी उल्लेख किया और दावा किया कि घायल व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया गया था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि घायल व्यक्ति को 60 टांके लगे थे और उनकी बेटी थाने के बाहर खड़ी होकर न्याय की मांग कर रही थी। भारद्वाज के कथित बयान के मुताबिक, उन्होंने पूरी रात बाहर घूमते हुए बिताई और इसके बावजूद उन्हें जेल नहीं भेजा गया।

स्वतंत्र भारद्वाज ने राजनीतिक पहुंच को लेकर भी किए दावे

यूट्यूब पर उपलब्ध करीब एक घंटे के साक्षात्कार में स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि उन्हें हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त है। इसके साथ ही उन्होंने कपिल मिश्रा को अपना बड़ा भाई बताया।

साक्षात्कार में भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया कि कपिल मिश्रा ने फोन किया था और इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। उन्होंने चिराग पासवान को भी अपना बड़ा भाई बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी समर्थन होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कई नेताओं का समर्थन प्राप्त है।

इन बयानों ने विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों की ओर से इन्हीं दावों को आधार बनाकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा किए गए राजनीतिक संपर्क और प्रभाव से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

दिल्ली पुलिस ने चोट को लेकर क्या कहा?

विवाद के बीच दिल्ली पुलिस की ओर से एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस ने इस दावे का खंडन किया है कि संजय कुमार के सिर की हड्डी टूट गई थी। पुलिस के अनुसार, हाथापाई के दौरान उन्हें मामूली चोट लगी थी। पुलिस ने यह भी बताया कि संजय कुमार की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।

यही बिंदु इस पूरे विवाद को और जटिल बनाता है। एक तरफ वायरल वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से गंभीर चोट और धारा 307 से जुड़े दावे सामने आए हैं, जबकि दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने सिर की हड्डी टूटने की बात से इनकार करते हुए चोट को मामूली बताया है। ऐसे में घटना की वास्तविक परिस्थितियों और आरोपों की पुष्टि जांच तथा उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगी।

सचिन शर्मा को लेकर क्यों बढ़ी राजनीतिक गर्मी?

नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और राजनीतिक झड़पों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े इस विवाद में अभिजीत दीपके द्वारा सीधे उन्हें निशाना बनाए जाने के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

दीपके लगातार सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दिल्ली पुलिस से सवाल कर रहे हैं। उनका मुख्य आरोप है कि कथित हमले के मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से दर्ज मामले और चोट को लेकर सामने आए बयान इस विवाद का दूसरा पक्ष प्रस्तुत करते हैं।

मामला अब आरोपों से आगे जांच पर टिका

स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो, निशू आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट, पुलिस की कार्रवाई और डीसीपी सचिन शर्मा पर लगाए गए आरोपों ने पूरे मामले को राजनीतिक और कानूनी विवाद में बदल दिया है। सीजेपी समर्थक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि अभिजीत दीपके ने पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि वायरल वीडियो में किए गए दावों और पुलिस के आधिकारिक पक्ष के बीच वास्तविक स्थिति क्या है। आरोपों की पुष्टि, घटना की परिस्थितियों और संबंधित लोगों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच तथा आधिकारिक कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकेगा।