erer | Source: ererनई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के एक सदस्य द्वारा लिए जाने के बाद गिरोह की गतिविधियों और उसमें नए शूटरों की भर्ती को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, क्राइम ब्रांच से मिली जानकारी के आधार पर दावा किया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह ने युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस तरीके से गिरोह में करीब 90 युवाओं को शामिल किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, गोल्डी बराड़, काला जठेड़ी और रोहित गोदारा के गिरोह से अलग होने के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग में शूटरों की कमी होने की बात सामने आई थी। इसके बाद गिरोह ने नए लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल करना शुरू किया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस प्रक्रिया के तहत 16 से 30 वर्ष तक के युवाओं को गिरोह से जोड़ा गया। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि सोशल मीडिया पर गैंगस्टरों की लोकप्रियता और युवाओं पर उनके प्रभाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बनी हुई है।

इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए युवाओं तक पहुंचने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोग इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया मंचों पर गैंगस्टरों के नाम से पेज, समूह और प्रोफाइल का इस्तेमाल करते हैं। इन मंचों पर गैंगस्टरों से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो और रील साझा किए जाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस तरह की सामग्री के जरिए युवाओं का ध्यान आकर्षित किया जाता है। बताया गया है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ युवाओं की गतिविधियों और टिप्पणियों पर नजर रखी जाती है। इसके बाद गिरोह से जुड़े लोग उनसे संपर्क करते हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि संपर्क में आने वाले युवाओं को धीरे-धीरे प्रभावित करके गिरोह से जोड़ने की कोशिश की जाती है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी गैंगस्टर के प्रति आकर्षण दिखाने वाले हर व्यक्ति को आपराधिक गतिविधियों में शामिल मानना उचित नहीं है। इस तरह के मामलों में सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होता है कि ऑनलाइन संपर्क का इस्तेमाल केवल प्रचार के लिए किया जा रहा है या उसके जरिए किसी आपराधिक गतिविधि को अंजाम देने की तैयारी भी की जा रही है।

16 से 30 साल के युवाओं को लेकर क्या दावा किया गया?

हिंदुस्तान की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने करीब 90 युवाओं को अपने साथ जोड़ा है, जिनकी उम्र लगभग 16 से 30 वर्ष के बीच बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, गिरोह में नए लोगों को शामिल करने के पीछे पहले से मौजूद नेटवर्क और सोशल मीडिया दोनों की भूमिका बताई गई है। कम उम्र के युवाओं का किसी आपराधिक गिरोह के संपर्क में आना कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।

खासकर किशोरों के मामले में परिवार, शिक्षा, सामाजिक वातावरण और ऑनलाइन गतिविधियों पर उचित ध्यान देना महत्वपूर्ण है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इन कथित 90 युवाओं की व्यक्तिगत पहचान, उनके खिलाफ दर्ज मामलों या उनकी वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए करीब 90 युवाओं की भर्ती से संबंधित आंकड़े को क्राइम ब्रांच से जुड़ी जानकारी के आधार पर प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट का दावा मानकर ही देखा जाना चाहिए।

पुराने शूटरों की सिफारिश से भी जुड़ते हैं नए लोग

रिपोर्ट में बताया गया है कि गिरोह में नए लोगों को शामिल करने का पुराना तरीका पहले से जुड़े लोगों की सिफारिश भी रहा है। पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जेल में बंद किसी साथी से मुलाकात के दौरान भी नए युवाओं के नाम सामने लाए जाने की बात कही जाती है।

इससे यह संकेत मिलता है कि आपराधिक गिरोहों के नेटवर्क केवल ऑनलाइन गतिविधियों तक सीमित नहीं होते, बल्कि पुराने संपर्कों और पहले से जुड़े लोगों के माध्यम से भी फैल सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति का किसी आरोपी से परिचित होना अपने आप में अपराध में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। किसी भी व्यक्ति की भूमिका का निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

वारदात से पहले हथियार और अन्य इंतजाम का भी दावा

क्राइम ब्रांच के अधिकारी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि किसी वारदात से पहले उसमें शामिल होने वाले लोगों की सूची तैयार की जाती है। इसके बाद कथित तौर पर वाहन, रुपये और हथियार जैसे संसाधनों की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि हथियार और कारतूस पहुंचाने से संबंधित संपर्कों के लिए स्नैपचैट जैसे मंचों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विशिष्ट घटना के संबंध में इन सभी गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि या विस्तृत जांच निष्कर्ष शामिल नहीं हैं। ऐसे मामलों में डिजिटल संदेश, सोशल मीडिया खाते और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच का हिस्सा बन सकते हैं। इनकी वास्तविकता और किसी व्यक्ति से उनका संबंध स्थापित करना जांच एजेंसियों का काम होता है। केवल किसी मंच के इस्तेमाल के आधार पर किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जा सकता।

लॉरेंस बिश्नोई के वीडियो और गैंगस्टर छवि पर भी चर्चा

रिपोर्ट में लॉरेंस बिश्नोई के जेल या अदालत में पेशी के दौरान के वीडियो का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि गिरोह से जुड़े कुछ लोग उसके वीडियो बनाते हैं, जिनमें वह कभी मूंछों को ताव देता दिखाई देता है तो कभी कैमरे की ओर देखकर मुस्कुराता है।

गैंगस्टरों की ऐसी छवियां और उनसे जुड़ी सामग्री सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन सकती हैं। लेकिन किसी अपराधी का प्रचार करना या उसकी छवि को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करना युवाओं को प्रभावित करने का माध्यम बन सकता है। इसीलिए सोशल मीडिया पर आपराधिक गतिविधियों के महिमामंडन और उसके संभावित प्रभाव को लेकर सतर्कता जरूरी है।

टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?

टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के एक सदस्य द्वारा लिए जाने की खबर के बाद गिरोह की कथित गतिविधियों पर नए सिरे से चर्चा शुरू हुई है। इसी पृष्ठभूमि में शूटरों की भर्ती, सोशल मीडिया के इस्तेमाल और गिरोह के नेटवर्क से जुड़े दावे सामने आए हैं। हालांकि, किसी घटना की जिम्मेदारी लेने वाला व्यक्ति या संगठन वास्तव में उस घटना में शामिल था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के आधार पर ही की जा सकती है। इसी तरह, कथित भर्ती के आंकड़ों और गिरोह की कार्यप्रणाली से संबंधित दावों को भी आधिकारिक जांच और विश्वसनीय साक्ष्यों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

निष्कर्ष: सोशल मीडिया के जरिए अपराधी नेटवर्क के विस्तार पर चिंता

लॉरेंस बिश्नोई गैंग में करीब 90 युवाओं को जोड़ने का दावा सोशल मीडिया और संगठित अपराध के संबंध पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट में इंस्टाग्राम, फेसबुक और पुराने संपर्कों के जरिए युवाओं को प्रभावित करने की बात कही गई है।

हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी आवश्यक है। युवाओं को आपराधिक गतिविधियों और गैंगस्टरों के महिमामंडन से दूर रखने के लिए परिवार, समाज और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों की सतर्कता महत्वपूर्ण है।