ere | Source: ereनई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तिहाड़ जेल में बंद पार्टी के नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास के समर्थन में एक भावुक संदेश साझा किया है। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखी गई अपनी पोस्ट में दीपके ने दोनों नेताओं के फैसलों और उनके संघर्ष की सराहना की।

उन्होंने कहा कि आशुतोष रांका और सौरभ दास से किसी ने भी अपनी सुविधाजनक जिंदगी छोड़ने या दूसरों के लिए संघर्ष करने की मांग नहीं की थी। इसके बावजूद दोनों ने ऐसा रास्ता चुना, क्योंकि वे अपने अलावा दूसरे लोगों की जिंदगी और समस्याओं की भी परवाह करते थे। दीपके की इस पोस्ट में दोनों नेताओं के व्यक्तिगत जीवन, उनके करियर और उनके फैसलों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि आशुतोष रांका और सौरभ दास के पास अपने जीवन को आराम से आगे बढ़ाने, सफल करियर बनाने और आर्थिक रूप से सुरक्षित रहने के पर्याप्त कारण थे। इसके बावजूद उन्होंने देश को बेहतर बनाने की उम्मीद में अपनी सुविधाओं से अलग रास्ता चुना। दीपके के इस बयान ने सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी और उनकी रिहाई में हो रही देरी को लेकर चल रही चर्चा के बीच दोनों के समर्थन में उनका रुख सामने रखा है।

लंदन की नौकरी से लेकर जेल तक, आशुतोष रांका के सफर का किया जिक्र

अभिजीत दीपके ने अपनी पोस्ट में आशुतोष रांका के पुराने करियर का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ साल पहले तक वह लंदन में एक आकर्षक कॉर्पोरेट नौकरी कर रहे थे। इस नौकरी से उन्हें अच्छी कमाई होती थी और उनके पास आर्थिक रूप से सुरक्षित जीवन जीने का अवसर था। दीपके के अनुसार, आशुतोष के सामने अपना करियर आगे बढ़ाने और व्यक्तिगत जीवन में स्थिरता बनाए रखने का विकल्प मौजूद था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी सुविधाजनक जिंदगी से अलग रास्ता अपनाया। दीपके ने कहा कि आशुतोष ने देश को बेहतर बनाने की उम्मीद में संघर्ष का रास्ता चुना। उनके मुताबिक, सड़कों पर उतरना, अनिश्चित परिस्थितियों का सामना करना और अंततः जेल पहुंच जाना ऐसा फैसला नहीं था, जिसे लेने के लिए उन पर किसी ने दबाव बनाया हो। इसके बावजूद उन्होंने यह रास्ता चुना। दीपके ने सौरभ दास के बारे में भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने बताया कि सौरभ देश की कानूनी व्यवस्था के बारे में लिख रहे थे और एक शानदार जिंदगी जी रहे थे। उनके पास भी अपने करियर और निजी जीवन को आगे बढ़ाने के अवसर थे। हालांकि, दीपके के अनुसार, सौरभ ने भी अपने व्यक्तिगत हितों से आगे बढ़कर दूसरे लोगों के लिए संघर्ष करने का फैसला किया।

'किसी ने उनसे त्याग करने को नहीं कहा था', दीपके ने क्यों कही यह बात?

अभिजीत दीपके की पोस्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह है, जिसमें उन्होंने दोनों नेताओं के फैसले को दूसरों के प्रति उनकी चिंता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आशुतोष रांका और सौरभ दास चाहते तो अपनी जिंदगी में व्यस्त रह सकते थे। वे उन लोगों की परेशानियों से दूरी बनाए रख सकते थे, जिनसे उनका व्यक्तिगत परिचय तक नहीं था। दीपके ने अपने संदेश में लिखा कि दोनों के पास अपनी आरामदायक जिंदगी का आनंद लेने और दूसरे लोगों के संघर्षों की अनदेखी करने का विकल्प था। किसी ने उनसे त्याग करने के लिए नहीं कहा था और न ही किसी ने उनसे ऐसी उम्मीद की थी। इसके बावजूद उन्होंने दूसरों के लिए संघर्ष करने का फैसला किया, क्योंकि वे वास्तव में अपने अलावा अन्य लोगों की भी परवाह करते थे। उन्होंने इस व्यवहार को किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी खूबियों में से एक बताया। दीपके के अनुसार, उन लोगों के लिए खड़ा होना जिन्हें आप जानते तक नहीं हैं, उन समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाना जो सीधे आपकी अपनी नहीं हैं और दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए जोखिम उठाना महत्वपूर्ण मानवीय गुण हैं। उन्होंने आशुतोष और सौरभ को ऐसे ही लोगों के रूप में पेश किया, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर दूसरों के लिए लड़ने का निर्णय लिया। उनकी पोस्ट का मुख्य संदेश यही था कि किसी व्यक्ति के चरित्र की पहचान केवल उसकी सफलता या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि इस बात से भी होती है कि वह दूसरों की परेशानियों के प्रति कितना संवेदनशील है।

तिहाड़ जेल में क्यों बंद हैं सौरभ दास और आशुतोष रांका?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी के दोनों नेता जंतर-मंतर में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में हैं। जंतर-मंतर को हाल ही में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। इसी घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं की गिरफ्तारी और उनकी रिहाई को लेकर विवाद सामने आया है। सीजेपी ने आरोप लगाया है कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी को जानबूझकर लंबा खींच रहे हैं। पार्टी ने इसे अवैध गिरफ्तारी बताते हुए दावा किया कि अदालत की कार्यवाही में देरी हो रही है। इसके साथ ही सीजेपी ने जमानतदारों की गारंटी को अस्पष्ट आधार पर खारिज किए जाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में पुलिस या प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। इसलिए गिरफ्तारी, जमानत और रिहाई से जुड़े मामले में पार्टी के दावों और न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित तथ्यों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने का भी मामला

इस प्रकरण में एक अन्य घटनाक्रम भी सामने आया है। मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकियां मिलने के संबंध में पुलिस ने गैर-संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज की है। इस घटनाक्रम ने मामले को लेकर चर्चा को और बढ़ा दिया है। गैर-संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी के अलावा उपलब्ध विवरण में कथित धमकियों के स्रोत, उनकी प्रकृति या जांच के नतीजे के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। सीजेपी की ओर से नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर उठाए गए सवाल और मजिस्ट्रेट को कथित धमकियां मिलने का मामला इस प्रकरण के अलग-अलग पहलू हैं। दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत और रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण बनी हुई है।

अभिजीत दीपके के बयान से क्या संदेश देने की कोशिश हुई?

अभिजीत दीपके की पोस्ट में कानूनी मामले से ज्यादा जोर आशुतोष रांका और सौरभ दास के व्यक्तिगत फैसलों तथा उनके प्रति अपनी सराहना पर दिया गया है। उन्होंने दोनों नेताओं की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए यह बताने की कोशिश की कि उनके पास अपने जीवन को सुविधाजनक बनाए रखने के विकल्प मौजूद थे, लेकिन उन्होंने दूसरे लोगों के हितों के लिए संघर्ष करना चुना। उनके संदेश का केंद्र यह विचार है कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत रूप से प्रभावित होना जरूरी नहीं है। दीपके के मुताबिक, अनजान लोगों की समस्याओं को समझना, उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाना और कठिन परिस्थितियों का सामना करना भी किसी व्यक्ति के सामाजिक सरोकार को दर्शाता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सीजेपी के दोनों नेता तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं और पार्टी उनकी रिहाई में देरी को लेकर सवाल उठा रही है। दीपके की पोस्ट ने एक ओर दोनों नेताओं के प्रति उनके समर्थन को सामने रखा, वहीं दूसरी ओर उनके संघर्ष को व्यक्तिगत त्याग और सामाजिक जिम्मेदारी के नजरिए से प्रस्तुत किया।

निष्कर्ष: रिहाई की प्रक्रिया के बीच नेताओं के समर्थन में उतरे दीपके

आशुतोष रांका और सौरभ दास को लेकर अभिजीत दीपके का बयान सीजेपी के भीतर दोनों नेताओं के समर्थन को रेखांकित करता है। दीपके ने उनकी पुरानी जिंदगी, करियर और आर्थिक सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ने दूसरों की परवाह करते हुए संघर्ष का रास्ता चुना। दूसरी ओर, पार्टी ने उनकी गिरफ्तारी और रिहाई की प्रक्रिया में देरी को लेकर आरोप लगाए हैं। फिलहाल दोनों नेता न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया के साथ मामले में सामने आए आरोपों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।