ere | Source: ereनई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। करीब 24 घंटे हिरासत में रहने के बाद उन्होंने अभिनेता शाहरुख खान की फिल्म ‘वीर-जारा’ का एक दृश्य साझा करते हुए अपने अनुभव को फिल्मी अंदाज में बयान किया। दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि बिना वाई-फाई और फोन के 24 घंटे जेल में बिताने के बाद बाहर आने पर कैसा महसूस होता है। उनका यह पोस्ट दिल्ली में तिरंगा मार्च के आह्वान और पुलिस की कार्रवाई के बीच सामने आया है।

शाहरुख खान की तस्वीर साझा कर क्या लिखा अभिजीत दीपके ने?

दिल्ली पुलिस की हिरासत से बाहर आने के बाद अभिजीत दीपके ने एक्स पर शाहरुख खान की फिल्म ‘वीर-जारा’ का एक दृश्य साझा किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, “बिना वाईफाई, बिना फोन के 24 घंटे जेल में बिताने के बाद बाहर आने पर कैसा लगता है।” दीपके की इस पोस्ट में फिल्मी दृश्य के जरिए हिरासत में बिताए समय को लेकर प्रतिक्रिया दी गई। फिल्म ‘वीर-जारा’ में शाहरुख खान का किरदार लंबे समय तक पाकिस्तानी जेल में रहने के बाद बाहर आता है। इसी दृश्य का इस्तेमाल करते हुए दीपके ने अपने अनुभव को हल्के-फुल्के और व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी पोस्ट ऐसे समय में आई, जब कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च आयोजित करने के आह्वान को लेकर दिल्ली पुलिस और CJP के नेताओं के बीच घटनाक्रम चर्चा में था। हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में दीपके ने अपने अनुभव को संक्षिप्त शब्दों में साझा किया और किसी विस्तृत बयान का उल्लेख नहीं किया।

कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च से पहले क्यों हिरासत में लिए गए थे दीपके?

अभिजीत दीपके को शुक्रवार को उस समय दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, जब वह कनॉट प्लेस पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से यहां ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान के तहत प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। दीपके इस अभियान में शामिल होने के लिए कनॉट प्लेस जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया था। इसके बाद उनके खिलाफ शांति भंग की आशंका से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई। इस घटनाक्रम के बाद शनिवार को उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया। CJP की ओर से तिरंगा मार्च का आह्वान ऐसे समय किया गया था, जब पार्टी के दो अन्य नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका पहले से ही जेल में बंद बताए गए थे। उनके खिलाफ भी शांति भंग करने के आरोप में कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई थी। दीपके ने अपने दोनों साथियों के समर्थन में ही कनॉट प्लेस पर ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान का आह्वान किया था।

अदालत से कैसे मिली रिहाई, किस बॉन्ड पर हुए रिहा?

अभिजीत दीपके को शनिवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराने के बाद उन्हें रिहा करने का फैसला लिया। इसके बाद दीपके दिल्ली पुलिस की हिरासत से बाहर आ गए। खबर में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत शांति भंग की आशंका से संबंधित धाराओं 126 और 170 के तहत कार्रवाई की थी। अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद दीपके सीधे राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के बीच पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार, वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP-SCP के प्रवक्ता अनीश पांडे के आवास पर भी पहुंचे। उनकी रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

CJP के दो नेता अब भी जेल में, उनके समर्थन में हुआ था प्रदर्शन का आह्वान

इस घटनाक्रम में कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका का मामला भी चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेता पहले से जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ शांति भंग करने के आरोप में कार्रवाई की गई है। दीपके ने अपने साथियों के समर्थन में कनॉट प्लेस पर तिरंगा मार्च का आह्वान किया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने CJP के नेताओं को कनॉट प्लेस पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। इसके चलते प्रस्तावित प्रदर्शन आगे नहीं बढ़ सका और कुछ समय तक चले घटनाक्रम के बाद कनॉट प्लेस में सामान्य गतिविधियां फिर शुरू हो गईं। इस प्रकरण ने CJP के अभियान, उसके नेताओं की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया। हालांकि, पूरे मामले में अलग-अलग पक्षों की भूमिका और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को समझने के लिए पुलिस तथा अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण है।

दीपके और नेहा बोरा के समर्थन में विपक्षी नेताओं ने क्या कहा?

रिपोर्ट के मुताबिक, देर रात तक विपक्षी नेताओं की ओर से अभिजीत दीपके और नेहा बोरा के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट साझा किए जाते रहे। हालांकि, विपक्षी गठबंधन INDIA के अधिकांश नेताओं ने दीपके का नाम लेकर खुलकर समर्थन करने से दूरी बनाए रखी। दीपके के समर्थन में खुलकर सामने आने वाले नेताओं में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नाम शामिल बताए गए हैं। राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी का INDIA गठबंधन के साथ संबंध सीमित रहा था। उन्होंने बंगाल में कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा था। वहीं, आम आदमी पार्टी और एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के कांग्रेस के साथ राजनीतिक मतभेदों का भी उल्लेख किया गया है।

जेल से बाहर आते ही सोशल मीडिया पोस्ट ने खींचा ध्यान

अभिजीत दीपके की रिहाई के बाद ‘वीर-जारा’ का दृश्य साझा करने वाली पोस्ट उनके समर्थकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन गई। बिना फोन और वाई-फाई के 24 घंटे बिताने का जिक्र करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को फिल्मी अंदाज में पेश किया। एक ओर कनॉट प्लेस में प्रस्तावित तिरंगा मार्च पुलिस की कार्रवाई के कारण आगे नहीं बढ़ पाया, वहीं दूसरी ओर दीपके की रिहाई और उनके पोस्ट ने इस घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया। उनके साथियों की हिरासत और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने भी मामले को राजनीतिक संदर्भ दिया।