erere | Source: ereनई दिल्ली। माता-पिता अपने बच्चों की परवरिश और बेहतर भविष्य के लिए जीवन का बड़ा हिस्सा समर्पित कर देते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ जब उन्हें बच्चों के सहारे और साथ की जरूरत होती है, तब कुछ परिवारों में परिस्थितियां बेहद भावुक और चिंताजनक रूप ले लेती हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें विदेश में रहने वाला एक परिवार अपने गंभीर रूप से बीमार पिता को वृद्धाश्रम में रखने पहुंचा। परिवार ने इसकी वजह पिता की बीमारी के साथ-साथ अपने वीजा की अवधि खत्म होना बताया।

पिता को अकेला छोड़कर विदेश लौटने की थी मजबूरी

हमारा वीजा खत्म हो रहा हैयह मामला होस्ट और यूट्यूबर ऋचा अनिरुद्ध की SMIT ओल्ड एज होम एंड केयर फाउंडेशन की फाउंडर योजना के साथ बातचीत के दौरान सामने आया। ऋचा ने उनसे पूछा था कि क्या ऐसे माता-पिता भी वृद्धाश्रम आते हैं, जिन्हें उनके बच्चे अपने साथ नहीं रखना चाहते और उन्हें वहीं छोड़कर चले जाते हैं।


इस सवाल के जवाब में योजना ने एक परिवार से जुड़ा अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, एक परिवार अपने पिता को उनके पास लेकर आया था। पिता की स्थिति ऐसी बताई गई कि वह नोज फीडिंग यानी नाक के रास्ते भोजन दिए जाने वाले पाइप पर थे।

‘हमारा वीजा खत्म हो रहा है, तीन महीने से ज्यादा नहीं रुक सकते’

नोज फीडिंग का पाइप निकाल दीजिएयोजना के अनुसार, परिवार ने उनसे कहा कि उनके पिता को यहां रखना चाहते हैं क्योंकि उनका वीजा समाप्त होने वाला है। परिवार के लोगों का कहना था कि विदेश लौटने के बाद पिता की देखभाल करने वाला कोई नहीं होगा।


परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि वे अपने पिता के मरने का इंतजार नहीं कर सकते और तीन महीने से ज्यादा वहां रुकना उनके लिए संभव नहीं है। इस बातचीत ने वृद्धाश्रम की संचालिका के सामने एक ऐसी स्थिति रख दी, जिसमें बीमार पिता की देखभाल और परिवार की विदेश में रहने की मजबूरी दोनों सामने थीं।

वृद्धाश्रम ने कहा- खर्च दीजिए, हम देखभाल करेंगे

योजना ने बताया कि उन्होंने परिवार से कहा कि अगर वे अपने पिता की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम को देना चाहते हैं तो उनकी देखभाल की जा सकती है। उन्होंने यहां तक कहा कि पिता की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार से जुड़ी जिम्मेदारियां भी वह निभा देंगी।

इसके बदले उन्होंने परिवार से मासिक खर्च देने की बात कही, ताकि वृद्धाश्रम में रह रहे लोगों की सेवा और देखभाल जारी रखी जा सके। परिवार इस व्यवस्था के लिए खर्च देने को तैयार भी हो गया।

फिर सामने आई ऐसी मांग, जिसने सबको चौंका दिया

बातचीत के दौरान परिवार की ओर से एक ऐसी मांग रखी गई, जिसने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया। योजना के मुताबिक, परिवार के एक सदस्य ने कहा कि पिता को अस्पताल से वृद्धाश्रम लाते समय उनकी नोज फीडिंग का पाइप निकाल दिया जाए।

नोज फीडिंग पाइप का इस्तेमाल ऐसे मरीजों को भोजन या पोषण देने के लिए किया जाता है, जो सामान्य तरीके से खाना खाने में सक्षम नहीं होते। इसलिए इस पाइप को हटाने की मांग ने बातचीत को बेहद संवेदनशील मोड़ दे दिया।

ऋचा अनिरुद्ध ने पूछा- ‘पाइप निकाल दीजिए’ का मतलब क्या है?

परिवार की इस मांग पर ऋचा अनिरुद्ध ने योजना से स्पष्ट सवाल किया कि पाइप निकालने का मतलब क्या पिता को मरने के लिए छोड़ देना था। इस सवाल के बाद योजना ने परिवार के सदस्य को उसके बचपन की याद दिलाते हुए जवाब दिया।

योजना के अनुसार, उन्होंने उस व्यक्ति से कहा कि जब वह छोटा था, तब अगर उसके पिता ने उसके साथ भी ऐसा ही किया होता तो शायद वह आज इस तरह की बात कहने के लिए वहां मौजूद नहीं होता। उनका यह जवाब माता-पिता और बच्चों के बीच जिम्मेदारी, देखभाल और रिश्ते की संवेदनशीलता को सामने लाता है।

बीमारी के समय माता-पिता को सबसे ज्यादा जरूरत होती है साथ की

इस घटना को साझा करते हुए बातचीत का मुख्य संदेश माता-पिता की देखभाल और उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार से जुड़ा रहा। गंभीर बीमारी की स्थिति में किसी बुजुर्ग को केवल दवा और भोजन की ही नहीं, बल्कि भरोसे, देखभाल और भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है।

माता-पिता बच्चों की परवरिश में वर्षों तक अपनी जरूरतों को पीछे रखते हैं। ऐसे में बुढ़ापे में जब उनकी शारीरिक निर्भरता बढ़ती है, तब परिवार के सामने उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी आती है। हालांकि, हर परिवार की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं और विदेश में रहने, वीजा की अवधि तथा स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों जैसी परिस्थितियां भी देखभाल के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।

क्या वृद्धाश्रम ही एकमात्र रास्ता है?

बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए वृद्धाश्रम एक विकल्प हो सकता है, खासकर तब जब परिवार के सदस्य किसी कारण से लगातार साथ नहीं रह पाते। लेकिन किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति की देखभाल के मामले में उसकी चिकित्सकीय जरूरतों और सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

इस मामले में भी वृद्धाश्रम की संचालिका ने परिवार को पिता की देखभाल की व्यवस्था का विकल्प दिया था। लेकिन नोज फीडिंग पाइप हटाने की मांग ने देखभाल की जिम्मेदारी और मरीज की सुरक्षा से जुड़े सवालों को बेहद गंभीर बना दिया।

बच्चों के लिए क्या संदेश सामने आता है?

इस घटना से जुड़ी बातचीत में माता-पिता के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। माता-पिता ने बच्चों को बड़ा करने में वर्षों लगाए होते हैं। उम्र के अंतिम पड़ाव में उनकी जरूरतें बदल जाती हैं और कई बार उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

ऐसे समय में बच्चों के लिए केवल आर्थिक सहायता ही पर्याप्त नहीं मानी जाती। उनके साथ बातचीत करना, उनकी भावनाओं को समझना, सम्मान देना और उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।

मामला क्यों चर्चा में आया?

पिता को वृद्धाश्रम में रखने की वजह वीजा खत्म होना बताई गई, लेकिन नोज फीडिंग पाइप हटाने की मांग ने इस घटना को और अधिक भावनात्मक बना दिया। योजना द्वारा साझा किया गया यह अनुभव इस सवाल को सामने लाता है कि गंभीर रूप से बीमार बुजुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी किस तरह निभाई जानी चाहिए।

यह घटना किसी एक परिवार की परिस्थिति के रूप में सामने आई है। इससे सभी परिवारों के बारे में कोई सामान्य निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिर भी माता-पिता की बीमारी और बुढ़ापे में देखभाल से जुड़े मानवीय पक्ष पर यह बातचीत गंभीर सोच जरूर पैदा करती है।