ere | Source: ereनई दिल्ली। गैस कनेक्शन बंद होने या बकाया बिल जमा नहीं करने पर सेवा काटने की धमकी देकर साइबर ठग लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस तरह की धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, अब तक सामने आए चार मामलों में पीड़ितों को कुल करीब 46.48 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। इस साइबर ठगी में जालसाज पहले खुद को गैस कंपनी का कर्मचारी बताते हैं और फिर कनेक्शन अपडेट या बकाया भुगतान के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।

एक ऐप डाउनलोड करते ही शुरू हो जाती है डिजिटल लूट

इस ठगी का सबसे खतरनाक हिस्सा एक एपीके फाइल है। जालसाज पीड़ितों को व्हाट्सऐप के माध्यम से ‘Meter Update.apk’ नाम की फाइल भेजते हैं और उसे मोबाइल में स्थापित करने के लिए कहते हैं। ठग दावा करते हैं कि गैस कनेक्शन को चालू रखने या मीटर से जुड़ी जानकारी अपडेट करने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।

पुलिस के मुताबिक, यह खतरनाक ऐप मोबाइल में स्थापित होने के बाद ठगों को फोन तक दूरस्थ पहुंच हासिल करने में मदद कर सकता है। इसके जरिए साइबर अपराधी बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल कर सकते हैं और पीड़ित के खाते से रकम निकाल सकते हैं।

लखनऊ में चार मामलों में 46.48 लाख रुपये का नुकसान

लखनऊ क्राइम ब्रांच के अनुसार, साइबर सेल ने ऐसे चार मामलों की पहचान की है, जिनमें पीड़ितों को मिलाकर करीब 46.48 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इनमें गोमती नगर का मामला सबसे बड़ा है, जहां 67 वर्षीय बुजुर्ग के तीन बैंक खातों से 25 अलग-अलग लेनदेन के जरिए 31.84 लाख रुपये निकाल लिए गए।

क्राइम ब्रांच के मुताबिक, एक अन्य मामले में कानपुर रोड के एक व्यक्ति को गैस सप्लाई बंद होने की चेतावनी दी गई। ठगों ने कथित तौर पर उनसे केवल 13 रुपये का भुगतान करने को कहा और इसके लिए एपीके फाइल भेजी। ऐप स्थापित करने के बाद उनके पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) खाते से 6.38 लाख रुपये निकाल लिए गए। इस खाते में कुल 13 लेनदेन हुए।

67 वर्षीय बुजुर्ग को ऐसे बनाया निशाना

गोमती नगर में रहने वाले 67 वर्षीय बुजुर्ग को 7 सितंबर को फोन आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को ग्रीन गैस का कर्मचारी बताया। उसने बुजुर्ग को बताया कि गैस बिल बकाया है और भुगतान नहीं करने पर कनेक्शन प्रभावित हो सकता है।

इसके बाद उन्हें एक एपीके फाइल भेजी गई और उसे मोबाइल में स्थापित करने के लिए कहा गया। बुजुर्ग ने ठगों की बात पर भरोसा करते हुए ऐप स्थापित कर ली। इसके बाद उनके तीन बैंक खातों से अलग-अलग लेनदेन शुरू हो गए और कुल 31.84 लाख रुपये निकाल लिए गए। पुलिस के अनुसार, रकम 25 लेनदेन के माध्यम से निकाली गई।

88 साल के बुजुर्ग भी बने शिकार

इसी तरह के एक अन्य मामले में 88 वर्षीय बुजुर्ग को भी गैस कनेक्शन से जुड़ी बात कहकर निशाना बनाया गया। उन्हें भी ऐप भेजकर मोबाइल में स्थापित कराया गया और इसके बाद खाते से 3.25 लाख रुपये निकाल लिए गए।

इन घटनाओं से साफ है कि साइबर ठग उम्रदराज लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। गैस कनेक्शन, बिल और सेवा बंद होने जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़े संदेशों का इस्तेमाल करके लोगों में जल्दबाजी और डर पैदा किया जाता है। इसके बाद उसी डर का फायदा उठाकर मोबाइल में संदिग्ध ऐप स्थापित कराया जाता है।

ठग पहले जुटाते हैं आपकी निजी जानकारी

इस तरह की ठगी में जालसाज केवल सामान्य धमकी देकर भरोसा कायम नहीं करते। रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराधियों के पास कई बार संभावित पीड़ित की पहले से उपलब्ध जानकारी होती है। बातचीत के दौरान वे उसी जानकारी का इस्तेमाल करते हैं, जिससे सामने वाले व्यक्ति को लगता है कि फोन करने वाला वास्तव में संबंधित गैस कंपनी का कर्मचारी है।

यही वजह है कि केवल कॉल करने वाले व्यक्ति द्वारा सही नाम, पता या कनेक्शन से जुड़ी कुछ जानकारी बता देने को उसकी पहचान का प्रमाण नहीं मानना चाहिए। साइबर ठग ऐसी जानकारी का इस्तेमाल विश्वास पैदा करने के लिए कर सकते हैं।

गैस कनेक्शन बंद होने का संदेश आए तो क्या करें?

अगर आपके मोबाइल पर गैस कनेक्शन बंद होने, बिल बकाया होने या तत्काल मीटर अपडेट करने का संदेश आता है, तो घबराने के बजाय पहले उसकी पुष्टि करें। किसी अनजान नंबर से आए फोन पर बैंक खाते, एटीएम, यूपीआई, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

अगर फोन करने वाला व्यक्ति मोबाइल में कोई ऐप स्थापित करने के लिए कहता है तो विशेष सावधानी बरतें। खास तौर पर व्हाट्सऐप या अन्य माध्यम से भेजी गई एपीके फाइल को बिना पुष्टि के मोबाइल में स्थापित नहीं करना चाहिए।

कंपनी के आधिकारिक माध्यम से करें पुष्टि

गैस कनेक्शन से संबंधित किसी भी समस्या की जानकारी के लिए संबंधित कंपनी के आधिकारिक नंबर या आधिकारिक कार्यालय से संपर्क करना सबसे सुरक्षित तरीका है। बिल पर दर्ज ग्राहक सेवा नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा दिए गए नंबर या लिंक पर भरोसा करने के बजाय कंपनी के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

यदि फोन करने वाला व्यक्ति तत्काल भुगतान, ऐप स्थापित करने या किसी लिंक पर जाने का दबाव बना रहा है, तो इसे खतरे का संकेत मानकर बातचीत रोक देना बेहतर है।

पुलिस ने शुरू किया ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’

साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’ शुरू किया है। इसका उद्देश्य डिजिटल माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी पर कार्रवाई करना और लोगों को ऐसे साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना है।

लखनऊ में सामने आए मामलों ने यह भी दिखाया है कि मोबाइल में किसी संदिग्ध ऐप को स्थापित करना कितनी बड़ी वित्तीय परेशानी का कारण बन सकता है। एक बार ठगों को मोबाइल तक पहुंच मिलने के बाद बैंक खातों से रकम निकालने का खतरा बढ़ जाता है।

एक छोटी सी गलती पड़ सकती है लाखों में भारी

गैस कनेक्शन बंद होने की चेतावनी सुनकर लोग अक्सर तुरंत समाधान तलाशने लगते हैं। साइबर ठग इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। वे खुद को संबंधित कंपनी का कर्मचारी बताते हैं, बकाया भुगतान या कनेक्शन अपडेट का डर दिखाते हैं और फिर मोबाइल में संदिग्ध ऐप स्थापित करवाते हैं।

लखनऊ के मामलों में लाखों रुपये की रकम गंवाने वाले लोगों के अनुभव इस बात की गंभीर चेतावनी हैं कि किसी भी अनधिकृत ऐप को मोबाइल में स्थापित करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। गैस कनेक्शन से जुड़ा कोई संदेश या फोन आने पर पहले आधिकारिक माध्यम से उसकी पुष्टि करना और अनजान एपीके फाइल से पूरी तरह बचना ही सबसे जरूरी सावधानी है।