erere | Source: ererनई दिल्ली। अगर आप अपनी बचत को म्यूचुअल फंड में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो सिर्फ यह जानना पर्याप्त नहीं है कि इसमें शेयर बाजार से जुड़ा निवेश होता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में कई अलग-अलग श्रेणियां होती हैं और प्रत्येक श्रेणी की निवेश रणनीति, जोखिम और नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए पैसा लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपका पैसा किस प्रकार की योजना में जाएगा।

इक्विटी म्यूचुअल फंड आखिर होता क्या है?

इक्विटी म्यूचुअल फंड ऐसी योजनाएं हैं जो मुख्य रूप से कंपनियों के शेयरों और इक्विटी से जुड़े साधनों में निवेश करती हैं। कर उद्देश्यों के लिए किसी म्यूचुअल फंड योजना को इक्विटी म्यूचुअल फंड माना जाने के लिए उसके कम से कम 65 प्रतिशत निवेश का भारतीय शेयरों और इक्विटी से जुड़े निवेशों में होना जरूरी है। यह व्यवस्था भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI के नियमों के तहत होती है।

इक्विटी म्यूचुअल फंड की 11 प्रमुख श्रेणियां

SEBI के वर्गीकरण के अनुसार इक्विटी म्यूचुअल फंड की अलग-अलग श्रेणियां हैं। इनमें Large Cap, Mid Cap, Small Cap, Flexi Cap, Large & Mid Cap, Dividend Yield, Value, Contra, Focused, ELSS और Sectoral या Thematic Fund शामिल हैं। इन सभी योजनाओं की निवेश रणनीति अलग होती है।

Large Cap Fund में पैसा कहां लगाया जाता है?

Large Cap Fund को अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा Large Cap कंपनियों में निवेश करना होता है। Large Cap कंपनियां बाजार पूंजीकरण के आधार पर शीर्ष 100 कंपनियों में शामिल होती हैं। इसलिए इस श्रेणी का फोकस बड़ी कंपनियों के शेयरों पर रहता है।

Mid Cap और Small Cap Fund में क्या अंतर है?

Mid Cap Fund को कम से कम 65 प्रतिशत निवेश Mid Cap शेयरों में करना होता है। बाजार पूंजीकरण की रैंकिंग के आधार पर 101 से 250 के बीच आने वाली कंपनियों को Mid Cap श्रेणी में रखा जाता है। वहीं Small Cap Fund को कम से कम 65 प्रतिशत राशि Small Cap कंपनियों में निवेश करनी होती है। इस श्रेणी में बाजार पूंजीकरण की रैंकिंग 251 से नीचे वाली कंपनियां आती हैं।

Flexi Cap Fund में निवेश की खासियत क्या है?

Flexi Cap Fund को बाजार पूंजीकरण के किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रखा जाता। ऐसी योजनाएं Large Cap, Mid Cap और Small Cap समेत अलग-अलग बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों में निवेश कर सकती हैं। इसका मतलब है कि फंड प्रबंधन को विभिन्न श्रेणियों में निवेश का विकल्प मिलता है।

Large & Mid Cap Fund के लिए तय हैं खास नियम

Large & Mid Cap Fund में कम से कम 35 प्रतिशत निवेश Large Cap शेयरों में और कम से कम 35 प्रतिशत निवेश Mid Cap शेयरों में करना जरूरी है। इस तरह इन योजनाओं में बड़ी और मध्यम आकार की कंपनियों का संयोजन रहता है।

Dividend Yield, Value और Contra Fund को समझिए

Dividend Yield Fund को अपनी संपत्ति का कम से कम 65 प्रतिशत हिस्सा ऐसे शेयरों में निवेश करना होता है जो लाभांश देने की क्षमता रखते हैं। Value Fund में कम से कम 65 प्रतिशत निवेश Value Investing के सिद्धांतों पर आधारित शेयरों में किया जाता है। वहीं Contra Fund विपरीत निवेश रणनीति अपनाता है और अपनी संपत्ति का कम से कम 65 प्रतिशत हिस्सा इसी रणनीति के अनुरूप शेयरों में लगाता है।

Focused Fund में सीमित संख्या में शेयर

Focused Fund की एक खासियत इसके सीमित पोर्टफोलियो में होती है। इन योजनाओं में अधिकतम 30 शेयरों के पोर्टफोलियो में निवेश किया जाता है। अधिकांश Focused Fund Multi Cap रणनीति का पालन करते हैं।

ELSS में टैक्स बचत के साथ 3 साल की लॉक-इन

Equity Linked Savings Scheme यानी ELSS को Tax Saving Mutual Fund भी कहा जाता है। इसमें तीन वर्ष की अनिवार्य Lock-in अवधि होती है। ELSS में निवेश करने वाले निवेशकों को आयकर कानून की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती का लाभ मिलता है। हालांकि, निवेश से पहले मौजूदा कर नियमों और अपनी कर स्थिति को समझना जरूरी है।

Sectoral और Thematic Fund में किस तरह का निवेश होता है?

Sectoral या Thematic Fund किसी खास क्षेत्र या थीम पर केंद्रित होते हैं। इन योजनाओं को अपनी संपत्ति का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा संबंधित क्षेत्र या थीम में निवेश करना होता है। इसलिए ऐसी योजनाओं का प्रदर्शन उस खास क्षेत्र या थीम से जुड़े बाजार बदलावों से प्रभावित हो सकता है।

SIP और Lumpsum में क्या अंतर है?

म्यूचुअल फंड में निवेश करने के दो सामान्य तरीके SIP और Lumpsum हैं। SIP यानी Systematic Investment Plan में निवेशक नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि निवेश करता है। यह राशि मासिक, तिमाही या किसी अन्य तय अंतराल पर लगाई जा सकती है। दूसरी ओर Lumpsum में एक बार में बड़ी राशि निवेश की जाती है।

SIP में नियमित निवेश, Lumpsum में एकमुश्त रकम

SIP के जरिए निवेश करने पर निवेशक नियमित रूप से छोटी या तय राशि लगाता है। वहीं Lumpsum निवेश में पूरी राशि एक साथ लगाई जाती है। बाजार में उतार-चढ़ाव दोनों तरह के निवेश को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि किसी एक तरीके में जोखिम बिल्कुल नहीं होता।

म्यूचुअल फंड में रिटर्न फिक्स नहीं होता

म्यूचुअल फंड में निवेश का रिटर्न बैंक FD की तरह पहले से तय या गारंटीड नहीं होता। खासतौर पर इक्विटी म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है। इसलिए निवेश करने से पहले योजना के जोखिम, निवेश उद्देश्य, समयावधि और संबंधित दस्तावेजों को समझना जरूरी है।

Mid Cap Fund और Flexi Cap Fund को ऐसे समझें

Mid Cap Fund में कम से कम 65 प्रतिशत निवेश Mid Cap शेयरों में किया जाता है। इसके विपरीत Flexi Cap Fund को Large Cap, Mid Cap और Small Cap कंपनियों के बीच निवेश करने की अधिक स्वतंत्रता होती है। दोनों योजनाओं की निवेश रणनीति इसलिए अलग होती है।

SIP शुरू करने से पहले किन बातों पर ध्यान दें?

म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले निवेशक को यह देखना चाहिए कि वह कितने समय के लिए पैसा लगाना चाहता है, बाजार में उतार-चढ़ाव को कितना सहन कर सकता है और किस उद्देश्य के लिए निवेश कर रहा है। किसी योजना का पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता। निवेश से पहले योजना से जुड़े दस्तावेज और जोखिम संबंधी जानकारी पढ़ना भी महत्वपूर्ण है।