दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है। राहुल गांधी का कहना है कि छात्रों पर हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और अगर गृह मंत्री इसकी जानकारी रखते थे या इसकी अनुमति दी गई थी, तो उन्हें जवाब देना चाहिए।

यह मामला 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ा है। छात्र कथित NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर सामने आई।

घटना के बाद मामला सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहा। इस पर संसद और राजनीति में भी बहस शुरू हो गई। राहुल गांधी ने छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने 25 जुलाई को अमित शाह को पत्र भी लिखा। इसमें उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए। खास तौर पर उन्होंने पूछा कि छात्रों के खिलाफ लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अमित शाह को इस कार्रवाई की जानकारी थी और क्या उन्होंने इसकी मंजूरी दी थी।

राहुल गांधी का कहना है कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है। ऐसे में गृह मंत्री को इस पूरे मामले पर देश के सामने जवाब देना चाहिए। बाद में उन्होंने अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी की। 29 जुलाई को राहुल गांधी ने कहा कि अगर गृह मंत्री ने कार्रवाई का आदेश दिया था तो उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अगर उन्हें पुलिस की कार्रवाई की जानकारी ही नहीं थी, तो यह भी गंभीर सवाल है। उन्होंने मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की।

हालांकि, इस पूरे मामले में एक बात साफ रखना जरूरी है। अभी यह साबित नहीं हुआ है कि लाठीचार्ज या दूसरी पुलिस कार्रवाई का सीधा आदेश अमित शाह ने दिया था। राहुल गांधी ने इसी सवाल का जवाब सरकार से मांगा है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक आरोप और जवाबदेही की मांग के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

अब इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से भी जवाब देने की तैयारी दिखाई दे रही है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 10 अगस्त को कहा कि अमित शाह संसद में इस मामले पर बोलने के लिए तैयार हैं। उन्होंने विपक्ष से सदन की कार्यवाही बाधित न करने की अपील भी की।

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का आदेश आखिर किस स्तर पर लिया गया और क्या उस कार्रवाई की जरूरत से ज्यादा ताकत इस्तेमाल की गई? अब सभी की नजर सरकार के जवाब और आगे होने वाली जांच पर है।