erer | Source: eereपटना। बिहार की राजनीति में बाहुबली विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पहले जेडीयू ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया, फिर उनकी पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। अब उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी खतरा मंडराने लगा है। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने जेडीयू की शिकायत पर मोकामा विधायक अनंत सिंह को दल-बदल कानून के तहत नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। विधानसभा सचिवालय की ओर से भेजे गए इस नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

जेडीयू ने अनंत सिंह की विधायिकी समाप्त करने की मांग करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के सामने शिकायत दर्ज कराई थी। पार्टी का आरोप है कि अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ दूसरे दल के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार कर पार्टी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया। अब विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले में विधायक का पक्ष जानने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सात दिनों के भीतर जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

जेडीयू की शिकायत पर स्पीकर का बड़ा कदम, सात दिन में देना होगा जवाब

बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने जेडीयू की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को नोटिस भेजा है। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी नोटिस में उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए सात दिनों का समय दिया गया है। विधानसभा सचिव संजय सिंह ने विधायक का पक्ष जानने के लिए यह नोटिस जारी किया है।

दरअसल, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत सौंपी थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि मोकामा विधायक ने एमएलसी चुनाव के दौरान पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार किया और दूसरे प्रत्याशी का समर्थन किया। इसी आधार पर जेडीयू ने दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग उठाई है।

स्पीकर प्रेम कुमार ने पहले ही इस मामले में स्पष्ट किया था कि किसी भी तरह की कार्रवाई करने से पहले अनंत सिंह का पक्ष सुना जाएगा। अब नोटिस जारी होने के बाद इस मामले में औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।

10 पन्नों के दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के साथ जेडीयू ने की थी शिकायत

जेडीयू ने अनंत सिंह की विधायिकी समाप्त करने के लिए 24 अक्टूबर को ही विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत पत्र सौंप दिया था। पार्टी की ओर से दिए गए इस शिकायती पत्र के साथ 10 पन्नों के दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए थे।

प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने उस समय दावा किया था कि मोकामा विधायक की पार्टी विरोधी गतिविधियों से जुड़े कई सबूत पार्टी के पास मौजूद हैं। जेडीयू का कहना है कि अनंत सिंह ने पार्टी के निर्देशों और आधिकारिक उम्मीदवार के विपरीत जाकर राजनीतिक गतिविधियां कीं।

पार्टी की शिकायत के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने मामले की प्रक्रिया शुरू करने से पहले विधायक का पक्ष जानने की बात कही थी। अब सात दिनों का नोटिस जारी होने के साथ यह मामला अगले चरण में पहुंच गया है। अनंत सिंह की ओर से दिए जाने वाले जवाब और विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।

आखिर क्यों नाराज हुई जेडीयू? एमएलसी चुनाव में नीरज कुमार के खिलाफ किया था प्रचार

अनंत सिंह और जेडीयू के बीच विवाद की प्रमुख वजह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का एमएलसी चुनाव बना। इस चुनाव में जेडीयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि जन सुराज पार्टी की ओर से अनुज सिंह चुनाव मैदान में थे।

आरोप है कि मोकामा विधायक अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया। उनकी पूर्व विधायक पत्नी नीलम देवी पर भी अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार करने का आरोप लगा। इसे पार्टी ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि माना।

इसके बाद जेडीयू ने अनंत सिंह और नीलम देवी दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी से निष्कासन के बाद मामला केवल संगठनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जेडीयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने के लिए भी विधानसभा अध्यक्ष का दरवाजा खटखटाया।

नीलम देवी की समिति सदस्यता भी खत्म, सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस

अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलों के बीच उनकी पत्नी नीलम देवी को भी कई झटके लगे हैं। जेडीयू से निष्कासन के बाद उन्हें राज्य स्तरीय 20 सूत्री समिति से भी बाहर कर दिया गया। इस समिति के सदस्य को उपमंत्री के स्तर का दर्जा प्राप्त होता है। इसी हैसियत से नीलम देवी को सरकारी बंगला आवंटित था, जहां अनंत सिंह का परिवार लंबे समय से रह रहा था।

नीलम देवी की समिति सदस्यता समाप्त होने के बाद सरकार की ओर से बंगला खाली करने का नोटिस भी भेज दिया गया। उन्हें इसके लिए एक महीने का समय दिया गया है। इस घटनाक्रम ने अनंत सिंह परिवार की राजनीतिक और प्रशासनिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

इसी बीच परिवार में 25 नवंबर को अनंत सिंह की बेटी की शादी भी होनी है। खबर के अनुसार, शादी उनके पैतृक गांव लदमा से किए जाने की संभावना है। ऐसे में परिवार के सामने एक तरफ शादी की तैयारी है तो दूसरी तरफ राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।

दुलारचंद यादव हत्याकांड में भी बढ़ी मुश्किलें, 1 दिसंबर तक जेल लौटने का आदेश

अनंत सिंह की परेशानियां केवल विधानसभा सदस्यता और पार्टी से निष्कासन तक सीमित नहीं हैं। मोकामा के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में मिली जमानत को भी चुनौती दी गई है। दुलारचंद यादव के पोते नीरज यादव ने पटना हाईकोर्ट से अनंत सिंह को मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर को अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण कर वापस जेल जाने का आदेश दिया। अदालत ने उनकी बेटी की शादी को ध्यान में रखते हुए आत्मसमर्पण के लिए एक महीने की मोहलत दी है। अनंत सिंह की छोटी बेटी शिवांगी सिंह की शादी 25 नवंबर को होनी है।

इस आदेश के बाद उनकी जेल वापसी की तारीख भी तय हो गई है। अब एक ओर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना है, वहीं दूसरी ओर विधानसभा सदस्यता बचाने के लिए जेडीयू की शिकायत का जवाब देना होगा। इन दोनों घटनाक्रमों ने उनकी राजनीतिक स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

अनंत सिंह की सदस्यता गई तो मोकामा में हो सकता है उपचुनाव

विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित शिकायत पर यदि अनंत सिंह के खिलाफ फैसला आता है और उनकी सदस्यता समाप्त होती है तो मोकामा विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। हालांकि, फिलहाल इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और पूरी प्रक्रिया अनंत सिंह के जवाब तथा विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर निर्भर करेगी।

राजनीतिक चर्चा यह भी है कि यदि उपचुनाव की नौबत आती है और उस समय अनंत सिंह जेल में बंद रहते हैं तो उनकी ओर से उनका बेटा चुनाव मैदान में उतर सकता है। हालांकि, यह अभी केवल संभावित राजनीतिक परिदृश्य है, किसी चुनावी फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

नीरज कुमार और अनंत सिंह के विवाद में ललन सिंह की भी हुई थी एंट्री

पटना स्नातक सीट पर अनंत सिंह और जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के बीच विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी पार्टी ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को सौंपी थी। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी कहा था कि ललन सिंह इस मामले में दोनों पक्षों से बातचीत करेंगे।

हालांकि, ललन सिंह की कोशिशों के बावजूद दोनों नेताओं के बीच विवाद का समाधान नहीं हो सका। अनंत सिंह के भारी विरोध के बावजूद नीरज कुमार ने पटना स्नातक सीट पर जीत दर्ज की। जीत के बाद नीरज कुमार ने ललन सिंह से बधाई और आशीर्वाद लेने से इनकार कर दिया था। उन्होंने यहां तक कहा था कि वह इस राजनीतिक कर्ज को सूद समेत चुकाएंगे।

हालांकि, दो दिन बाद नीरज कुमार के बयान में बदलाव देखने को मिला और उन्होंने ललन सिंह की तारीफ की। इस पूरे घटनाक्रम ने जेडीयू के भीतर चल रहे राजनीतिक विवाद को और चर्चा में ला दिया था।

फिलहाल अनंत सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस का जवाब देना है। सात दिनों के भीतर उन्हें अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार इस मामले में आगे का निर्णय लेंगे। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत जेल वापसी की समयसीमा तय है तो दूसरी तरफ विधायिकी पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में मोकामा की राजनीति और अनंत सिंह का राजनीतिक भविष्य विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।