नई दिल्ली। नई दिल्ली में BRICS का 18वां शिखर सम्मेलन शुरू हो चुका है और शनिवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी भारत पहुंच गए। जिनपिंग का विमान पालम एयरफोर्स स्टेशन पर उतरा। करीब सात साल बाद चीनी राष्ट्रपति की भारत यात्रा होने के कारण इस दौरे पर पूरी दुनिया की नजर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात भी होने वाली है। लेकिन शी जिनपिंग का यह दौरा केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं है। उनकी सुरक्षा को लेकर भारत और चीन दोनों की ओर से बेहद व्यापक तैयारियां पहले ही शुरू कर दी गई थीं।
जिनपिंग के पहुंचने से पहले ही दिल्ली में पहुंच चुका था चीन का ‘चलता-फिरता किला’
चीनी राष्ट्रपति के भारत पहुंचने से पहले ही उनकी विशेष सुरक्षा टीम दिल्ली पहुंच चुकी थी। उनके ठहरने वाले होटल से लेकर एयरपोर्ट, सड़क मार्ग और भारत मंडपम तक हर संभावित गतिविधि के लिए सुरक्षा योजना तैयार की गई। इस पूरी व्यवस्था में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ चीन की अपनी सुरक्षा टीम भी सक्रिय रही। जिनपिंग के दौरे में जिस चीज ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, वह उनकी विशेष सुरक्षा कार Hongqi N701 है।
Hongqi N701 सिर्फ कार नहीं, राष्ट्रपति का चलता-फिरता सुरक्षा कवच
शी जिनपिंग के दिल्ली दौरे के दौरान चीन की खास Hongqi N701 आर्मर्ड लिमोजिन चर्चा में है। यह कोई सामान्य लग्जरी कार नहीं है, बल्कि चीन के शीर्ष नेतृत्व के लिए तैयार की गई विशेष सुरक्षा कार है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका सुरक्षा कवच माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें मजबूत आर्मर, बुलेटप्रूफ ग्लास और बुलेटप्रूफ टायर जैसे सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्रपति को बेहद संवेदनशील परिस्थितियों में भी अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराना है। यही वजह है कि दिल्ली की सड़कों पर दिखाई देने वाली यह कार सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
किस विमान से भारत पहुंचे शी जिनपिंग, कौन-कौन आया साथ?
शी जिनपिंग 12 सितंबर को विशेष विमान से नई दिल्ली पहुंचे। चीन के राष्ट्रपति विदेश दौरों के लिए आम तौर पर Air China के Boeing 747-8 का इस्तेमाल करते हैं। इसे सामान्य यात्री विमान की तरह नहीं, बल्कि राष्ट्रपति की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष रूप से तैयार किया जाता है। इसमें संचार और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त इंतजाम होते हैं, हालांकि विमान की पूरी सुरक्षा तकनीक सार्वजनिक नहीं की जाती। जिनपिंग अकेले भारत नहीं आए हैं। चीन के आधिकारिक विदेश मंत्रालय के मुताबिक उनके साथ कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और केंद्रीय कार्यालय के निदेशक कै क्यूई तथा पोलित ब्यूरो सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी भी आए हैं। इसके अलावा चीन का एक बड़ा व्यापारी मंडल भी भारत पहुंचा है।
2019 के बाद पहली भारत यात्रा, इसलिए बेहद अहम है जिनपिंग का दौरा
शी जिनपिंग की यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2019 के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण भारत और चीन के संबंधों में तनाव रहा है। अब दोनों देशों के बीच संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिशों के बीच चीनी राष्ट्रपति का दिल्ली आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात इस यात्रा को और महत्वपूर्ण बनाती है।
होटल के कमरे से छत तक सुरक्षा, कर्मचारियों का भी सत्यापन
जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने से पहले चीन की विशेष सुरक्षा टीम ने उनके ठहरने वाले होटल और उसके आसपास के क्षेत्र का जायजा लिया। विदेशी नेताओं की सुरक्षा में उनकी अपनी सुरक्षा टीमों के साथ भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी समन्वय कर रही हैं। चीनी सुरक्षा अधिकारियों के पास अपने आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी हैं। जिनपिंग की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को दी गई है। होटल में भी सुरक्षा की कई परतें तैयार की गई हैं। राष्ट्रपति के ठहरने वाली मंजिल के साथ होटल की छत और ग्राउंड फ्लोर तक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। होटल के कर्मचारियों का भी सत्यापन कराया गया है।
एयरपोर्ट से भारत मंडपम तक हर रास्ते की पहले से तैयारी
चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा केवल होटल तक सीमित नहीं रखी गई है। होटल से बाहर निकलने के बाद जिस रास्ते से उनका काफिला गुजरेगा, उस पूरे मार्ग पर भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। एयरपोर्ट से होटल और फिर होटल से भारत मंडपम तक संभावित मार्ग पहले से तय किए गए। इन मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए रिहर्सल भी की गई। BRICS में शामिल होने वाले दूसरे बड़े नेताओं के लिए भी इसी तरह व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली को अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में बांटकर निगरानी की जा रही है।
जमीन ही नहीं, आसमान पर भी नजर; होटल के ऊपर अस्थायी नो-फ्लाई जोन
राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा में संभावित खतरा केवल जमीन से नहीं माना जाता। इसी वजह से जिनपिंग के होटल के आसपास और उसके ऊपर के हवाई क्षेत्र पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक जिनपिंग के करीब 24 घंटे के भारत दौरे के दौरान उनके होटल के ऊपर अस्थायी नो-फ्लाई जोन और संभावित CBRN यानी रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों को लेकर विशेष जांच जैसे उपाय किए गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए दिल्ली में कितने व्यापक स्तर पर तैयारी की गई है।
15 हजार पुलिसकर्मी और 200 पैरामिलिट्री कंपनियां संभाल रहीं सुरक्षा
BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी बड़े पैमाने पर व्यवस्था की है। करीब 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मियों और 200 पैरामिलिट्री कंपनियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा 500 से ज्यादा CCTV कैमरों और फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है। भारत मंडपम और विदेशी मेहमानों के होटलों में एंटी-सबोटाज चेकिंग के लिए 100 से ज्यादा दिल्ली पुलिस K9 यानी स्निफर डॉग भी तैनात किए गए हैं।
जिनपिंग का काफिला भी होगा बेहद खास, साथ चलेंगे कई सुरक्षा वाहन
शी जिनपिंग जैसे राष्ट्राध्यक्ष का काफिला सामान्य वीआईपी काफिले से काफी अलग होता है। मुख्य कार के साथ सुरक्षा वाहन, संचार व्यवस्था, पुलिस एस्कॉर्ट और अन्य सहायता वाहन भी काफिले का हिस्सा होते हैं। भारत में BRICS के दौरान जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के काफिलों को सबसे बड़े मोटरकेड में रखा गया है। दोनों देशों की सुरक्षा टीमें भी पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी थीं और संबंधित होटलों में सुरक्षा तैयारियों में शामिल थीं।
आखिर शी जिनपिंग की सुरक्षा के लिए इतना बड़ा इंतजाम क्यों?
शी जिनपिंग केवल चीन के राष्ट्रपति ही नहीं हैं। वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वोच्च नेता और देश की सैन्य व्यवस्था के शीर्ष नेतृत्व से भी जुड़े हैं। इसलिए उनकी विदेश यात्राओं में सुरक्षा प्रोटोकॉल बेहद सख्त होता है। भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा को लेकर तनाव भी रहा है। हालांकि हाल के समय में दोनों देशों के संबंधों में सुधार की कोशिशें हुई हैं और दोनों पक्ष बातचीत बढ़ा रहे हैं। ऐसे में जिनपिंग की भारत यात्रा सुरक्षा के साथ-साथ कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
चीन की सुरक्षा टीम से लेकर भारतीय एजेंसियों तक, हर स्तर पर तालमेल
इस दौरे की सबसे खास बात यह है कि चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा में चीन की अपनी सुरक्षा टीम और भारत की सुरक्षा एजेंसियां एक साथ काम कर रही हैं। होटल, सड़क, एयरपोर्ट, भारत मंडपम और आसपास के हवाई क्षेत्र तक सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग स्तरों पर तैयार किया गया है। बड़े पैमाने पर पुलिस और पैरामिलिट्री बलों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, फेस रिकग्निशन तकनीक और K9 दस्तों की मौजूदगी सुरक्षा के व्यापक स्वरूप को दिखाती है।
