erere | Source: ereशाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा हासिल करना कई बार चुनौती बन जाता है। अंडा और मांस को भोजन में शामिल नहीं करने वाले लोग अक्सर पनीर, दाल, सोयाबीन और चने जैसे खाद्य पदार्थों को प्रोटीन का प्रमुख स्रोत मानते हैं। इनमें पनीर को आमतौर पर अधिक प्रोटीन वाला भोजन समझा जाता है, जबकि सफेद चना भी प्रोटीन के साथ फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर पनीर और सफेद चने में से किसी एक को चुनना हो तो बेहतर विकल्प कौन सा है?

प्रोटीन में पनीर आगे, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती

उपलब्ध पोषण आंकड़ों के अनुसार 100 ग्राम पनीर में करीब 21 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है, जबकि 100 ग्राम पके हुए सफेद चने में लगभग 9 ग्राम प्रोटीन होता है। यानी केवल प्रोटीन की मात्रा को आधार बनाया जाए तो पनीर सफेद चने से काफी आगे निकल जाता है। लेकिन किसी खाद्य पदार्थ को बेहतर या खराब तय करने के लिए केवल प्रोटीन की मात्रा देखना पर्याप्त नहीं है। कैलोरी, वसा, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

100 ग्राम पनीर में क्या-क्या मिलता है?

100 ग्राम पनीर में लगभग 21 ग्राम प्रोटीन के साथ करीब 265 कैलोरी, लगभग 20 ग्राम वसा और करीब 1.2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट पाया जा सकता है। पनीर कैल्शियम का भी अच्छा स्रोत माना जाता है और इसमें विटामिन बी12 सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। दूध से तैयार होने के कारण इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन भी मिलता है, जो शरीर की मांसपेशियों और ऊतकों के निर्माण तथा मरम्मत में उपयोगी होता है।

हालांकि पनीर में प्रोटीन की मात्रा अधिक होने के साथ वसा और कैलोरी भी अपेक्षाकृत अधिक होती है। इसलिए हर व्यक्ति के लिए अधिक मात्रा में पनीर खाना जरूरी नहीं है। पनीर की मात्रा और प्रकार का चुनाव व्यक्ति की कुल ऊर्जा जरूरत और भोजन की पूरी दिनचर्या के अनुसार किया जाना चाहिए।

सफेद चना क्यों है खास?

सफेद चने में पनीर की तुलना में प्रोटीन कम जरूर होता है, लेकिन इसमें फाइबर की मात्रा काफी अच्छी होती है। 100 ग्राम पके हुए सफेद चने में लगभग 9 ग्राम प्रोटीन और करीब 8 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इसके अलावा चने में आयरन, फोलेट, मैग्नीशियम और कई अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं।

फाइबर की वजह से चना पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के भोजन में भी चने को शामिल किया जाता है। हालांकि किसी व्यक्ति को चना कितना और किस रूप में खाना चाहिए, यह उसकी व्यक्तिगत जरूरत और पाचन क्षमता पर निर्भर करता है।

मसल्स बढ़ानी हैं तो पनीर क्यों बन सकता है बेहतर विकल्प?

अगर किसी व्यक्ति का मुख्य लक्ष्य मांसपेशियों के विकास के लिए अधिक प्रोटीन लेना है तो पनीर उसके भोजन का उपयोगी हिस्सा हो सकता है। पनीर में चने की तुलना में प्रति 100 ग्राम अधिक प्रोटीन मिलता है। इसके अलावा इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी कम होती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मसल्स बनाने के लिए केवल पनीर ही खाना चाहिए। मांसपेशियों के विकास के लिए पर्याप्त कुल प्रोटीन के साथ संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त ऊर्जा और अच्छी नींद भी महत्वपूर्ण होती है। पनीर के साथ दाल, सोया, दूध, दही और अन्य प्रोटीन स्रोतों को भोजन में शामिल करके आहार को अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।

वजन और पाचन के लिए चना क्यों पसंद किया जा सकता है?

सफेद चने की सबसे बड़ी खासियत इसकी फाइबर सामग्री है। फाइबर युक्त भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकता है और पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए उपयोगी माना जाता है। चने में पनीर की तुलना में कैलोरी और वसा भी कम होती है।

अगर किसी व्यक्ति का लक्ष्य केवल अधिक से अधिक प्रोटीन लेना नहीं, बल्कि भोजन में फाइबर बढ़ाना, पेट को अधिक समय तक भरा रखना और पौधों से मिलने वाले पोषक तत्वों को शामिल करना है, तो सफेद चना उपयोगी विकल्प हो सकता है।

पनीर या चना—आखिर किसे चुनें?

इसका कोई एक जवाब सभी लोगों के लिए सही नहीं हो सकता। यदि आपका मुख्य लक्ष्य अधिक प्रोटीन लेना और मांसपेशियों के विकास के लिए भोजन में प्रोटीन बढ़ाना है तो पनीर अधिक प्रोटीन वाला विकल्प है। वहीं यदि आप फाइबर के साथ प्रोटीन लेना चाहते हैं और भोजन में पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व बढ़ाना चाहते हैं तो सफेद चना बेहतर विकल्प हो सकता है।

असल में दोनों खाद्य पदार्थों को एक-दूसरे का विकल्प मानने के बजाय संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। अलग-अलग स्रोतों से प्रोटीन लेने से भोजन में पोषक तत्वों की विविधता बढ़ती है।

सिर्फ प्रोटीन देखकर फैसला करना सही नहीं

पनीर में प्रोटीन की मात्रा अधिक होने का मतलब यह नहीं कि चना कम उपयोगी भोजन है। इसी तरह चने में फाइबर अधिक होने का मतलब यह नहीं कि पनीर को भोजन से बाहर कर देना चाहिए। शरीर की जरूरत उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य स्थिति और दैनिक भोजन पर निर्भर करती है।

इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ को सभी लोगों के लिए ‘सबसे बेहतर’ घोषित करने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनना अधिक समझदारी है। यदि किसी व्यक्ति को कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है, दूध से बनी चीजों से परेशानी होती है या पाचन संबंधी समस्या रहती है तो भोजन में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है।

निष्कर्ष: पनीर प्रोटीन में आगे, चना पोषण में मजबूत

100 ग्राम की तुलना करें तो प्रोटीन के मामले में पनीर स्पष्ट रूप से सफेद चने से आगे है। पनीर में करीब 21 ग्राम और सफेद चने में लगभग 9 ग्राम प्रोटीन मिलता है। लेकिन चना फाइबर, आयरन, फोलेट और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों के कारण अपनी अलग जगह रखता है। इसलिए अगली बार प्रोटीन का स्रोत चुनते समय केवल प्रोटीन की मात्रा पर ध्यान देने के बजाय अपने लक्ष्य और संपूर्ण पोषण जरूरत को ध्यान में रखें।