जमुई। बिहार के जमुई में 19 सितंबर की शाम दो नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ सड़क पर कथित बदसलूकी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। दोनों 10वीं कक्षा में पढ़ते हैं और एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ाई करते हैं। कोचिंग से लौटने के दौरान मड़वा पहाड़ी इलाके के पास कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों को घेरकर उनके साथ मारपीट और कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। घटना का वीडियो बनाए जाने और बाद में उसके सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज की। पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जमुई की घटना ने क्यों याद दिलाया 2018 का जहानाबाद मामला?
जमुई की घटना की तुलना अप्रैल 2018 में सामने आए जहानाबाद के एक मामले से की जा रही है। दोनों घटनाओं में एक समान बात यह रही कि नाबालिग को सड़क पर लोगों के एक समूह ने घेरा और घटनाक्रम का वीडियो बनाया गया। बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और पुलिस कार्रवाई तेज हुई। हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां और जांच से सामने आने वाले तथ्य अलग-अलग हैं।
2018 में जहानाबाद में क्या हुआ था?
30 अप्रैल 2018 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, जहानाबाद जिले में 14 वर्षीय एक लड़की के साथ दिनदहाड़े सड़क पर कथित छेड़छाड़ की गई थी। उस दौरान उसे जबरन निर्वस्त्र करने की कोशिश किए जाने की बात भी सामने आई थी। पुलिस ने मामले को संभावित दुष्कर्म के प्रयास के एंगल से भी देखा था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।
उस मामले में सात युवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों में तीन 18 वर्षीय युवक और एक नाबालिग शामिल था। पुलिस के मुताबिक वायरल वीडियो में दो युवक लड़की के साथ दिखाई दे रहे थे, जबकि दो अन्य कथित तौर पर वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे।
जहानाबाद केस में SIT ने संभाली थी जांच
जहानाबाद की घटना के बाद पुलिस ने विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया था। जांच में जहानाबाद के एसपी और पटना के एएसपी स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया था। पुलिस ने पटना, गया और जहानाबाद में छापेमारी की थी। घटना में इस्तेमाल की गई बाइक भी जब्त की गई थी।
पुलिस ने वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों और वाहन के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की थी। तत्कालीन पटना जोन के आईजी नैयर हसनैन खान के अनुसार, चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था और अन्य आरोपियों की तलाश जारी थी। जिस मोबाइल फोन से वीडियो बनाए जाने की बात सामने आई थी, उसे भी पुलिस ने बरामद किया था।
19 सितंबर को जमुई में क्या हुआ?
अब जमुई के ताजा मामले पर लौटें तो 10वीं कक्षा के छात्र और छात्रा 19 सितंबर की शाम कोचिंग की कक्षा खत्म करने के बाद मड़वा पहाड़ी इलाके की ओर गए थे। दोनों एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ते हैं और पुलिस के अनुसार एक-दूसरे के दोस्त हैं। इसके बाद दोनों स्कूटर से लौट रहे थे।
पुलिस के अनुसार जमुई-लखीसराय मुख्य मार्ग से करीब तीन किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाके में शाम लगभग 6:30 बजे कुछ युवकों ने दोनों को रोक लिया। सामने आए वीडियो में कई लोग दोनों को घेरते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस के मुताबिक लड़की से उसका नाम और पता पूछा गया तथा उसके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। वीडियो में लड़की को खींचे जाने की बात भी सामने आई है। लड़के को भी भीड़ ने घेर लिया था।
सड़क पर घटना और उसी दौरान बनाया गया वीडियो
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों को कथित तौर पर यह धमकी भी दी गई कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया जाएगा। बाद में घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित होने लगे।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और इसमें शामिल लोगों की पहचान शुरू की। जांच के दौरान वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले वाहनों और अन्य उपलब्ध सुरागों को भी आधार बनाया गया।
दो दिन तक पुलिस के पास नहीं पहुंची शिकायत
जमुई मामले में पुलिस के सामने एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी आया कि घटना के तुरंत बाद पीड़ित छात्र-छात्रा की ओर से शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल के अनुसार, रविवार तक दोनों में से किसी ने पुलिस से शिकायत नहीं की थी।
इसके बाद जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस ने वीडियो में दिखाई देने वाले वाहन के नंबर के आधार पर पीड़ितों तक पहुंच बनाई। इसके बाद उनके बयान दर्ज किए गए और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इस तरह पुलिस को मामले की जानकारी शुरुआत में सीधे शिकायत के जरिए नहीं, बल्कि वायरल वीडियो के माध्यम से मिली।
POCSO एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट यानी लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है। मामले की जांच एसडीपीओ दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में गठित SIT कर रही है।
चूंकि पीड़ित दोनों नाबालिग हैं, इसलिए मामले में पॉक्सो कानून के प्रावधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। पुलिस घटना के वीडियो, आरोपियों की भूमिका और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
वीडियो से सामने आई आरोपियों की पहचान, तीन गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार पीड़ितों ने प्राथमिकी में आरोपियों के नाम नहीं बताए थे। इसके बावजूद वायरल वीडियो की जांच के आधार पर करीब सात लोगों की पहचान की गई। इनमें से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
पुलिस ने वीडियो में लड़की के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करते दिखाई देने वाले व्यक्ति की भी पहचान कर ली है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से घटना से जुड़े वीडियो हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर चुकी है।
गिरफ्तार आरोपियों में दो नाबालिग
रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में दो नाबालिग हैं। यही वजह है कि मामले में पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ किशोर आरोपियों से संबंधित कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पुलिस की जांच का उद्देश्य घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट करना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करना है।
जहानाबाद और जमुई मामलों में सामने आया एक बड़ा समान पहलू
दोनों मामलों में सबसे उल्लेखनीय समानता घटना के वीडियो के सामने आने की है। जहानाबाद में वर्ष 2018 की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हुई थी। अब जमुई में भी घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद पुलिस ने वाहन नंबर और वीडियो में उपलब्ध जानकारी के आधार पर पीड़ितों और आरोपियों तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू की।
हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आता है। जमुई मामले में SIT जांच कर रही है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
