ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय बने नए अध्यक्ष
उमर फारूक:
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी विधायकों ने सोमवार को कोलकाता में आयोजित एक बैठक में पार्टी की संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला किया। इस बैठक में पूर्व मंत्री अरूप रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया।
विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि बागी गुट को पार्टी के 80 में से 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि पार्टी में किए गए सभी बदलाव चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार हैं और इसकी जानकारी जल्द ही चुनाव आयोग को भी दी जाएगी।
बैठक में विधायक संदीपन साहा, जावेद खान और रितब्रत बनर्जी को पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया। वहीं, पूर्व कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम, पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और रथिन घोष को उपाध्यक्ष बनाया गया। रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमान को पार्टी का नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
जब रितब्रत बनर्जी से पूछा गया कि कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के गुट में अभी भी ममता बनर्जी अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी महासचिव हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें कालीघाट में हो रही गतिविधियों से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है।
उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता कि कालीघाट से क्या घोषणाएँ की जा रही हैं। वहां लोगों को पद दिए जा रहे हैं और अगले ही दिन वे इस्तीफा भी दे रहे हैं। ऐसे मामलों पर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है।”
इस बैठक की एक खास बात यह रही कि बागी गुट द्वारा लगाए गए बैनर में ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं थी।
ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले बेलियाघाटा के विधायक कुणाल घोष ने इस घटनाक्रम को हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी के बिना तृणमूल कांग्रेस की कल्पना नहीं की जा सकती। यह एक मजाक जैसा है। जिस व्यक्ति को पार्टी से निकाला जा चुका है, वह विशेष बैठक बुला रहा है। मामला अदालत में है और हमें न्याय मिलने की उम्मीद है। तृणमूल कांग्रेस का मतलब ममता बनर्जी है, बाकी सब सिर्फ एक तमाशा है।”
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने वर्ष 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। पार्टी ने 2011 में 34 वर्षों से सत्ता में रही वाम मोर्चा सरकार को हराकर पश्चिम बंगाल की सत्ता हासिल की थी। हालांकि 2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हार के बाद पार्टी में बगावत शुरू हो गई।
3 जून को 58 विधायकों ने रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मानने का समर्थन किया था। अब यह संख्या बढ़कर 65 हो गई है। विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायक हैं, जिनमें से 14 विधायक अब भी ममता बनर्जी के साथ हैं, जबकि एक विधायक जेल में है।
लोकसभा में भी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़ चुके हैं। इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपी) नामक दल में विलय कर लिया है और केंद्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है।
