ममता बनर्जी के समर्थन में नजर आए TMC के तीन बागी विधायक

ममता बनर्जी के समर्थन में नजर आए TMC के तीन बागी विधायक।Source: Chrome

पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। पार्टी से अलग होकर ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल हुए तीन विधायकों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में खुलकर आवाज उठाई है। इसके बाद इन विधायकों के दोबारा ममता बनर्जी के खेमे में लौटने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।बसीरहाट नॉर्थ के विधायक तौसीफ-उर-रहमान, मेतियाबुरुज के विधायक अब्दुल खालिक मोल्लाह और बारुईपुर ईस्ट के विधायक बिभास सरदार ने कालीघाट टीएमसी के नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। हालांकि, तीनों ने अभी औपचारिक रूप से टीएमसी में वापसी का ऐलान नहीं किया है।

ममता पर कथित हमले के बाद बदले सुर

दरअसल, ममता बनर्जी हाल ही में एक तृणमूल कार्यकर्ता की मौत के बाद उसके परिवार से मिलने हलीशहर पहुंची थीं। इसी दौरान उनके काफिले को विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप लगा कि प्रदर्शन के दौरान उनके वाहन पर पत्थर और कीचड़ फेंके गए।घटना के बाद कालीघाट टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ममता बनर्जी के समर्थन में प्रदर्शन किया। इसी विरोध कार्यक्रम में वे तीन विधायक भी नजर आए, जो कुछ समय पहले ममता बनर्जी से अलग होकर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ चले गए थे।इनकी मौजूदगी को बंगाल की राजनीति में महज संयोग नहीं माना जा रहा है। इसे तृणमूल के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरण के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

दीदी जहां हैं, तौसीफ भी वहीं है’

सबसे ज्यादा चर्चा बसीरहाट नॉर्थ के विधायक तौसीफ-उर-रहमान के बयान की हो रही है। उन्होंने ममता बनर्जी के साथ अपने राजनीतिक संबंधों को लेकर खुलकर बात की।तौसीफ ने कहा कि दीदी जहां हैं, तौसीफ भी वहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ममता बनर्जी की तस्वीर के बिना उनके लिए बसीरहाट में चुनाव जीतना बेहद मुश्किल है।उन्होंने कहा कि बसीरहाट में उनकी राजनीति का मतलब ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा है। विधायक ने यह भी बताया कि उनकी सुरक्षा हटा दी गई है, लेकिन इसके बावजूद वह ममता के समर्थन में खड़े हैं।

बिभास सरदार ने कहा- सभी गुट तृणमूल का हिस्सा

बारुईपुर ईस्ट के विधायक बिभास सरदार ने भी पार्टी की एकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि वह और दूसरे विधायक तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।उन्होंने ममता बनर्जी पर हुए कथित हमले की निंदा करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सभी विधायकों को इस घटना के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। बिभास ने यह भी कहा कि पार्टी में अलग-अलग गुट हो सकते हैं, लेकिन सभी का संबंध तृणमूल कांग्रेस से ही है।

उनके इस रुख के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल विधायकों के बीच अब मतभेद सामने आने लगे हैं।

अब्दुल खालिक मोल्लाह ने नहीं खोला अपना पत्ता

मेतियाबुरुज के विधायक अब्दुल खालिक मोल्लाह ने इस मामले में अपना रुख थोड़ा अलग रखा। उन्होंने ममता बनर्जी पर हुए हमले की निंदा की, लेकिन अपने मौजूदा राजनीतिक गुट को लेकर स्पष्ट घोषणा करने से बचते नजर आए।उन्होंने कहा कि वह फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी के गुट के साथ हैं, लेकिन ममता बनर्जी पर हुए हमले के विरोध में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना उनका फैसला था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी यह नहीं बताना चाहते कि वह किस गुट से जुड़े हैं।

ऋतब्रत बनर्जी ने क्या कहा?

तीनों विधायकों के कालीघाट टीएमसी के मंच पर नजर आने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस घटनाक्रम को ज्यादा तवज्जो नहीं दी।ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि बिभास सरदार और तौसीफ-उर-रहमान की ओर से बोलना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने अब्दुल खालिक मोल्लाह को अपने साथ होने की बात कही।उन्होंने अपने गुट की संख्या को लेकर दावा किया कि उनके साथ 65 विधायक हैं और यह संख्या कम नहीं होगी। साथ ही उन्होंने कालीघाट खेमे को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें अपनी संख्या को लेकर भरोसा है तो वे भी पत्र देकर अपनी संख्या का दावा करें।

क्या बागी गुट में पड़ने लगी दरार?

ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत के बाद ऋतब्रत बनर्जी का गुट बंगाल की राजनीति में एक अलग शक्ति केंद्र के तौर पर उभरा था। लेकिन अब तीन विधायकों का सार्वजनिक रूप से ममता के समर्थन में आना राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है।खासकर तौसीफ-उर-रहमान का ममता के पक्ष में खुलकर बयान देना और कालीघाट टीएमसी के नेताओं के साथ मंच साझा करना कई सवाल खड़े करता है।हालांकि, अभी इन तीनों विधायकों की औपचारिक ‘घर वापसी’ नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक संकेत और संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जा रहा है।आने वाले दिनों में अगर ये विधायक आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी के खेमे में लौटते हैं, तो इससे ऋतब्रत गुट की ताकत और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी पर बड़ा असर पड़ सकता है।