हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और समय से पहले मौत का प्रमुख कारण बन सकता है। इसे अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि कई मामलों में यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के लंबे समय तक शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर की पहचान बीपी मापकर की जाती है, लेकिन इससे यह पता नहीं चल पाता कि बीमारी ने शरीर के अंदर कितनी क्षति पहुंचाई है। इसी चुनौती से निपटने के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने HyPrevent नामक एक नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक विकसित की है, जो यह समझने में मदद करेगी कि हाई ब्लड प्रेशर का शरीर के विभिन्न अंगों पर कितना असर पड़ा है।

Source : Pexel
क्या है HyPrevent?
HyPrevent एक AI आधारित तकनीक है, जो शरीर के कई अंगों से जुड़े क्लिनिकल और मेडिकल इमेजिंग डेटा का विश्लेषण करती है। इसका उद्देश्य यह पहचानना है कि हाई ब्लड प्रेशर की वजह से बीमारी कितनी गंभीर हो चुकी है और किन मरीजों में अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा अधिक है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मुताबिक, यह टूल खास तौर पर इसलिए विकसित किया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हाई ब्लड प्रेशर शरीर के किन-किन अंगों को प्रभावित कर रहा है। इससे डॉक्टर हर मरीज की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत इलाज तय कर सकेंगे और सभी मरीजों को एक जैसी दवाएं देने की आवश्यकता नहीं होगी।
क्या करेगी यह तकनीक?
यह तकनीक केवल ब्लड प्रेशर के आंकड़ों पर निर्भर नहीं करती। HyPrevent AI, कंट्रास्टिव लर्निंग और मल्टी-ऑर्गन मेडिकल डेटा की मदद से यह समझने की कोशिश करती है कि हाई ब्लड प्रेशर शरीर के अंदर किस प्रकार के बदलाव ला रहा है।
यह सिस्टम ऐसे पैटर्न की पहचान कर सकता है जो बीमारी की गंभीरता से जुड़े होते हैं। इसके जरिए यह भी पता लगाया जा सकता है कि समान ब्लड प्रेशर होने के बावजूद दो मरीजों के अंगों को हुआ नुकसान और भविष्य का स्वास्थ्य जोखिम अलग-अलग हो सकता है।
कैसे काम करती है HyPrevent?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इनोवेशन के अनुसार, HyPrevent को ऐसे डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है जिसमें हाई ब्लड प्रेशर वाले और सामान्य ब्लड प्रेशर वाले दोनों प्रकार के लोग शामिल थे।
यह सिस्टम शरीर के कई अंगों से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण करके प्रत्येक व्यक्ति की बीमारी की गंभीरता का अलग-अलग मूल्यांकन करता है। साथ ही यह बीमारी के उन छिपे हुए प्रकारों को भी पहचान सकता है जो उपचार पर अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं। यह तरीका पारंपरिक हाइपरटेंशन मैनेजमेंट से काफी अलग है, क्योंकि वर्तमान में उपचार का मुख्य फोकस केवल ब्लड प्रेशर को निर्धारित सीमा में बनाए रखना होता है।
मरीजों को क्या होगा फायदा?
अगर आगे के शोध और परीक्षणों में HyPrevent प्रभावी साबित होती है, तो इससे मरीजों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं।
बीमारी का जल्द पता चलेगा:
यह तकनीक लक्षण दिखाई देने से पहले ही अंगों को होने वाले नुकसान की पहचान कर सकती है।
व्यक्तिगत इलाज संभव होगा:
मरीजों को उनके जोखिम और बीमारी की स्थिति के अनुसार अलग-अलग समूहों में बांटकर अधिक सटीक उपचार दिया जा सकेगा।
डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी:
यह सिस्टम बीमारी की प्रगति और भविष्य में होने वाले जोखिमों का बेहतर आकलन करने में सहायता करेगा, जिससे इलाज की रणनीति अधिक प्रभावी बन सकेगी।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध रिसर्च, विशेषज्ञों की राय और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से संबंधित सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। हाई ब्लड प्रेशर या किसी भी स्वास्थ्य समस्या से संबंधित निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
