नई दिल्ली। दिल्ली में 20 जुलाई को हुए CJP के 'संसद चलो' प्रदर्शन के बाद अब घायल पुलिसकर्मियों के परिवार भी सामने आए हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई पुलिसकर्मियों के परिजनों ने उस दिन की घटना को याद करते हुए अपना दर्द साझा किया। परिवारों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान उनके अपने ड्यूटी पर थे, लेकिन हिंसा में बुरी तरह घायल हो गए।
एक पुलिसकर्मी की बेटी ने भावुक होते हुए कहा, "भीड़ ने लगभग मेरे पिता को मार ही डाला था।" उनका कहना था कि उस दिन परिवार को घंटों तक अपने पिता की कोई जानकारी नहीं मिली। जब संपर्क हुआ, तब पता चला कि वे घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। इस दौरान पूरा परिवार बेहद तनाव और डर में रहा।
परिजनों ने कहा कि अक्सर प्रदर्शन या झड़पों में सिर्फ एक पक्ष की पीड़ा सामने आती है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की मुश्किलों पर कम चर्चा होती है। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी होती है और ऐसे हालात में जवान अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान हालात बिगड़ गए थे। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े आयोजकों और कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और अपने ऊपर बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं। दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और मामले को लेकर जांच तथा कानूनी प्रक्रिया जारी है।
प्रेस वार्ता में मौजूद परिजनों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी से राजनीतिक बहस करना नहीं है, बल्कि यह बताना है कि हिंसा का असर सिर्फ मौके पर मौजूद लोगों पर नहीं, बल्कि उनके परिवारों पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब कोई पुलिसकर्मी घायल होता है, तो उसका दर्द पूरा परिवार झेलता है।
परिजनों ने प्रशासन से मांग की कि घायल पुलिसकर्मियों को बेहतर इलाज, मानसिक सहयोग और पर्याप्त सुरक्षा दी जाए। उनका कहना था कि जो लोग ड्यूटी के दौरान घायल हुए हैं, उनके योगदान को भी उतनी ही गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन हिंसा की घटनाओं से प्रदर्शनकारी, पुलिसकर्मी और आम नागरिक—तीनों प्रभावित होते हैं।
फिलहाल इस मामले से जुड़ी जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है। आने वाले दिनों में अदालत और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद कई पहलुओं पर और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।
