नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद जारी विरोध प्रदर्शन के बीच संस्थान और छात्रों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को IIT दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने ईमेल के माध्यम से अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस चेतावनी के बाद प्रदर्शन में शामिल छात्रों के बीच अपने शैक्षणिक भविष्य और प्लेसमेंट पर संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रात के प्रदर्शन को लेकर IIT निदेशक ने जताई आपत्ति
छात्रों ने गुरुवार देर रात कैंपस में मार्च निकाला था। वे ऋषिकेश कुमार की मौत की जवाबदेही तय करने और मामले की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे थे। IIT दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने शुक्रवार शाम छात्रों को भेजे ईमेल में गुरुवार रात की घटनाओं का उल्लेख किया।
ईमेल के अनुसार, रात करीब 10:30 बजे से 12:30 बजे के बीच प्रदर्शनकारी छात्र संस्थान के रिहायशी क्षेत्रों में चले गए थे। संस्थान का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने फैकल्टी सदस्यों के घरों के बाहर प्रदर्शन किया और कुछ नारे अपमानजनक तथा धमकी भरे थे।
फैकल्टी और परिवारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया
निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने प्रदर्शन के इस तरीके पर चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह के व्यवहार से फैकल्टी सदस्यों और उनके परिवारों की सुरक्षा, निजता और शांतिपूर्ण जीवन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैंपस के शांतिपूर्ण कामकाज में बाधा डालने वाले लोगों के खिलाफ संस्थान अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, निदेशक ने अपने ईमेल में कहा कि संस्थान कैंपस के शांतिपूर्ण कामकाज में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। इसमें रिहायशी क्षेत्र, कक्षाएं, शैक्षणिक गतिविधियां और अन्य संस्थागत गतिविधियां शामिल हैं।
छात्रों के प्रदर्शन के पीछे क्या है वजह
IIT दिल्ली में छात्रों का विरोध ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद शुरू हुआ। ऋषिकेश कुमार एमएससी फिजिक्स के दूसरे वर्ष के 31 वर्षीय छात्र थे। उनकी मौत के बाद छात्रों ने संस्थान की व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं से निपटने के तरीके को लेकर सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि पिछले 30 महीनों में यह आठवीं ऐसी घटना है। छात्रों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थान की ओर से पर्याप्त ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसी मुद्दे को लेकर छात्र कई दिनों से धरना और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने ऋषिकेश कुमार की मौत की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि मामले की जांच ऐसी व्यवस्था के तहत होनी चाहिए, जिसमें पूरी पारदर्शिता रहे और मौत से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जाए।
छात्रों की दूसरी प्रमुख मांग संस्थान के निदेशक के इस्तीफे से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी छात्र ऋषिकेश की मौत के बाद संस्थान के प्रशासनिक रवैये से नाराज हैं और निदेशक की जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहे हैं।
इसके अलावा छात्रों ने ऋषिकेश कुमार के परिवार को आर्थिक सहायता देने और छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को गंभीरता से लेने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए उचित परामर्श और सहायता व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए।
प्लेसमेंट और अकादमिक भविष्य को लेकर छात्रों में डर
निदेशक की अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों की चिंता केवल आंदोलन तक सीमित नहीं रह गई है। कुछ छात्रों को आशंका है कि यदि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है तो इसका असर उनके अकादमिक रिकॉर्ड और प्लेसमेंट गतिविधियों पर पड़ सकता है।
छात्रों के बीच यह चिंता इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि IIT जैसे संस्थानों में शैक्षणिक प्रदर्शन और प्लेसमेंट विद्यार्थियों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि, संस्थान की ओर से यह नहीं कहा गया है कि प्रदर्शन में शामिल सभी छात्रों के प्लेसमेंट पर स्वतः कोई रोक लगेगी। फिलहाल निदेशक ने कैंपस की सामान्य गतिविधियों में बाधा डालने वाले लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
IIT दिल्ली ने क्या कदम उठाने की बात कही
IIT दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा है कि छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत की जांच के लिए बनाई गई बाहरी जांच समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान के बेनेवोलेंट फंड के माध्यम से ऋषिकेश के परिवार के लिए आर्थिक सहायता को मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा फैकल्टी, छात्रों और कर्मचारियों के स्वैच्छिक योगदान से एक अलग फंड बनाए जाने की जानकारी भी दी गई है। संस्थान ने यह भी कहा है कि अगले सप्ताह एक बाहरी लोकपाल नियुक्त किया जाएगा। साथ ही छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी रहने की बात कही गई है।
निदेशक ने माना, मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी
इससे पहले जारी एक वीडियो संदेश में IIT दिल्ली के निदेशक ने माना था कि छात्रों की मदद के लिए संस्थान की मौजूदा व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं थीं। उन्होंने कहा था कि छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करने के लिए संस्थान को उचित कदम उठाने की जरूरत है।
संस्थान ने छात्रों की भलाई के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी है। इनमें चौबीसों घंटे परामर्श सुविधा, मनोचिकित्सकीय सहायता, आपात स्थिति में मदद के तरीके, मेंटरशिप कार्यक्रम और पीयर-सपोर्ट पहल शामिल हैं।
अकादमिक व्यवस्था में किए गए बदलावों का भी जिक्र
IIT दिल्ली की ओर से हाल के वर्षों में किए गए कुछ अकादमिक बदलावों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें पहले सेमेस्टर में पढ़ाई का कम बोझ, जीवन-कौशल से जुड़े पाठ्यक्रम और पहले वर्ष में छोटी कक्षाओं जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
संस्थान का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य छात्रों पर अकादमिक दबाव को कम करना और उनके लिए सहायता प्रणाली को मजबूत करना है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र इन व्यवस्थाओं को लेकर अपनी अलग चिंताएं और मांगें सामने रख रहे हैं।
बाहरी जांच समिति में हुआ बदलाव
ऋषिकेश कुमार की मौत की जांच के लिए गठित बाहरी समिति में भी बदलाव हुआ है। उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने किसी कारण से समिति के अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। इसके बाद हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता को समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
जांच समिति में AIIMS दिल्ली के मनोरोग विभाग के प्रमुख प्रताप शरण, दो छात्र प्रतिनिधि और IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार भी शामिल हैं। इस मामले में पुलिस की ओर से अलग से जांच भी की जा रही है।
छात्रों और संस्थान के बीच बातचीत पर नजर
एक ओर जहां छात्र अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं, वहीं संस्थान की ओर से छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी रखने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच संवाद इस विवाद को आगे किस दिशा में ले जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल IIT दिल्ली प्रशासन का जोर कैंपस की सामान्य गतिविधियों को बनाए रखने और छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्र स्वतंत्र जांच और संस्थान की जवाबदेही से जुड़ी अपनी मांगों पर जोर दे रहे हैं।
