भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर | Source: Social media

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटरSource : Social media

बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में लगातार निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। याचिकाकर्ता ने अदालत से जल्द सुनवाई की अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले को तय प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रार के समक्ष रखा जाए। भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर पहले से ही कई सवाल उठ रहे हैं और विपक्षी दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों ने भी घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता चाहते थे कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द सुनवाई की जाए, लेकिन अदालत ने फिलहाल इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले को निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाए और याचिकाकर्ता रजिस्ट्रार के समक्ष इसे मेंशन करें। अदालत की ओर से अभी मामले के तथ्यों या आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। अब आगे की सुनवाई कब होगी, इसका फैसला न्यायालय की नियमित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

याचिकाकर्ता ने क्या मांगें रखी हैं?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में भरत भूषण तिवारी की मौत को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह मामला कथित फर्जी एनकाउंटर से जुड़ा हो सकता है, इसलिए इसकी स्वतंत्र और पारदर्शी जांच जरूरी है। इसी आधार पर याचिका में एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।इसके अलावा मामले की जांच CBI से कराने की भी मांग उठाई गई है, ताकि जांच किसी भी तरह के स्थानीय प्रभाव से मुक्त रह सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि पूरे मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र जांच समिति द्वारा की जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि केवल निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कैसे तय की जाए।

सरकार ने न्यायिक जांच के दिए आदेश

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बढ़ते विवाद और लगातार उठ रहे सवालों के बीच बिहार सरकार ने न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। इसी उद्देश्य से घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र रूप से पड़ताल की जा सके।

सरकार का मानना है कि न्यायिक जांच के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि एनकाउंटर किन परिस्थितियों में हुआ, क्या सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की वास्तविक स्थिति क्या है। न्यायिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी। इस बीच विपक्षी दल और सामाजिक संगठन भी लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जिससे यह मामला राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।