भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, हाई कोर्ट जाने की सलाह | Source: Social media

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, हाई कोर्ट जाने की सलाह Source : Social media

बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि इस मामले पर सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय पहले संबंधित हाई कोर्ट का रुख किया जाना चाहिए था। सुनवाई के दौरान जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा, आप पहले हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच, निगरानी और जरूरी आदेश देने का अधिकार सबसे पहले हाई कोर्ट के पास होता है। इसलिए याचिकाकर्ता को पहले वहीं जाना चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाई कोर्ट में अपनी बात रखने की सलाह दी।

कोर्ट ने हाई कोर्ट जाने की दी सलाह

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि इस तरह के मामलों की जांच और उसकी निगरानी करने का अधिकार हाई कोर्ट के पास भी है। इसलिए सबसे पहले वहीं से न्यायिक प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

CBI जांच और न्यायिक जांच की मांग

यह जनहित याचिका वकील विशाल तिवारी ने दायर की है। उन्होंने अदालत से मांग की कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर की जांच CBI को सौंपी जाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच समिति गठित कर पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।

सरकार और CBI को बनाया गया पक्ष

याचिका में केंद्र सरकार, बिहार सरकार, बिहार के डीजीपी और CBI को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि भरत भूषण तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच जरूरी है और सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।

पहले भी तत्काल सुनवाई से किया था इनकार

इससे पहले भी इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया था। उस समय जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के माध्यम से मामला सूचीबद्ध कराने की सलाह दी थी।

क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?

भरत भूषण तिवारी की 17 जून को बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई थी। इस घटना के बाद मामला विवादों में आ गया। याचिका में कहा गया है कि एनकाउंटर से कुछ घंटे पहले भरत तिवारी ने फेसबुक लाइव के जरिए कुछ शर्तें पूरी होने पर आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई थी।याचिका में मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी के बयान का भी हवाला दिया गया है। उनका दावा है कि उनके बेटे के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड, FIR या चार्जशीट नहीं थी। उनका आरोप है कि आत्मसमर्पण की संभावना होने के बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी।

ग्रामीणों ने भी उठाए सवाल

भरत तिवारी की मौत के बाद गांव में विरोध प्रदर्शन हुआ था। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। याचिका में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति के आत्मसमर्पण की संभावना हो और उसके बावजूद जानलेवा बल का इस्तेमाल किया जाए, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। इसलिए इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।