क्या भरत तिवारी एनकाउंटर केस अब नए मोड़ पर पहुंच गया है? बिहार के चर्चित मामले ने अब राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह की ओर से राष्ट्रपति को भेजी गई याचिका पर संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव को मामले में आवश्यक कार्रवाई करने और याचिकाकर्ता को भी इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर भरत तिवारी की मौत, एफआईआर में नामजद पुलिस अधिकारियों की भूमिका और कथित सरकारी फंड घोटाले को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।एडवोकेट संजीव कुमार सिंह और भरत तिवारी

एडवोकेट संजीव कुमार सिंह और भरत तिवारी

राष्ट्रपति भवन से बिहार सरकार तक पहुंचा मामला, कार्रवाई का दिए निर्देश

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में राष्ट्रपति को भेजी गई याचिका पर कार्रवाई शुरू होने के बाद बिहार प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने 24 जून को राष्ट्रपति को ई-मेल के माध्यम से विस्तृत शिकायत भेजी थी। याचिका में मांग की गई थी कि एफआईआर में जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के नाम दर्ज हैं, उनके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। अब राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से इस शिकायत को बिहार के मुख्य सचिव के पास भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। हालांकि यह निर्देश जांच शुरू करने या किसी अधिकारी को दोषी ठहराने का आदेश नहीं है, बल्कि शिकायत पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने की प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

याचिकाकर्ता की मांग- नामजद अधिकारियों की जल्द से जल्द हो गिरफ्तारी

याचिकाकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह का कहना है कि एफआईआर में जिन अधिकारियों के नाम दर्ज हैं, उनमें संबंधित एसडीपीओ, थानाध्यक्ष और एसटीएफ के कुछ जवान शामिल हैं। उनका आरोप है कि यदि एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई भी होनी चाहिए। संजीव कुमार सिंह ने कहा है कि वे जल्द ही बिहार के मुख्य सचिव से मिलकर मामले की प्रगति की जानकारी लेंगे। यदि आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो वे संबंधित अदालत में गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन होना बेहद जरूरी है ताकि न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कायम रहे।

1400 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का भी किया गया जिक्र

इस पूरे मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि भरत तिवारी ने अपनी मौत से पहले उनसे बातचीत में एक बड़े सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग का जिक्र किया था। उनके अनुसार, भरत तिवारी ने आरोप लगाया था कि कटाव प्रभावित क्षेत्र के पुनर्वास के लिए आए लगभग 1400 करोड़ रुपये के फंड में अनियमितताएं हुई हैं और इस संबंध में उन्होंने कई अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें भी की थीं।हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या अदालत द्वारा पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से भी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इन दावों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

एनकाउंटर पर उठे सवाल, अब जांच की दिशा पर सबकी नजर

भरत तिवारी एनकाउंटर केस पहले से ही बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब राष्ट्रपति सचिवालय के स्तर पर शिकायत पर संज्ञान लिए जाने के बाद इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच करता है तो इससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एफआईआर में नामजद अधिकारियों के खिलाफ आगे कोई ठोस कार्रवाई होगी, क्या कथित घोटाले के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी और क्या भरत तिवारी की मौत से जुड़े सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे। आने वाले दिनों में बिहार सरकार और जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।