बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर एक बार फिर विवाद बढ़ता दिख रहा है। इस बार मामला 50 लाख रुपये से जुड़े एक कथित दावे को लेकर है। भरत तिवारी के परिवार ने प्रशांत किशोर की ओर से लगाए गए पैसों से जुड़े आरोपों को खारिज किया है। परिवार का कहना है कि उनके खिलाफ गलत बातें फैलाई जा रही हैं।

भरत तिवारी की मां आशा देवी ने साफ कहा है कि परिवार को न तो चार करोड़ रुपये मिले हैं और न ही 50 लाख रुपये लेने की बात सही है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशांत किशोर इस तरह के दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं करते हैं, तो परिवार उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा कर सकता है।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि भरत तिवारी की मौत के बाद से ही यह मुद्दा बिहार की राजनीति में लगातार उठ रहा है। भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद उनके परिवार ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसी दौरान प्रशांत किशोर भी परिवार से मिले थे और उन्होंने मामले की जांच को लेकर सरकार से सवाल किए थे।

प्रशांत किशोर ने पहले भरत तिवारी मामले को लेकर सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा था कि जांच सिर्फ मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन अधिकारियों की भूमिका भी देखी जानी चाहिए जिनकी वजह से मामला यहां तक पहुंचा।

अब परिवार की ओर से सामने आया बयान इस पूरे विवाद को एक नए मोड़ पर ले आया है। भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने भी पैसों से जुड़े अलग-अलग दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कभी तीन करोड़ तो कभी 50 लाख रुपये की बातें सामने आ रही हैं, जबकि परिवार के मुताबिक इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है। परिवार का आरोप है कि उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

इस पूरे मामले के बीच एक और राजनीतिक विवाद भी सामने आया था। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया था कि प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी की मां से बांकीपुर उपचुनाव में प्रचार करने को कहा था। हालांकि भरत तिवारी के पिता ने इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि प्रशांत किशोर ने परिवार को चुनाव प्रचार के लिए नहीं बुलाया था।

फिलहाल 50 लाख रुपये वाले दावे को लेकर परिवार और प्रशांत किशोर के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। परिवार ने साफ संकेत दिया है कि अगर आरोपों के समर्थन में सबूत नहीं दिए गए तो कानूनी रास्ता अपनाया जा सकता है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस मामले में कोई ठोस सबूत सामने आता है और क्या परिवार वास्तव में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराता है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच विवाद बढ़ता नजर आ

रहा है।