1भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और कैसरगंज से भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के बाद उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसी मामले में सह-आरोपी विनोद तोमर को भी अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला करीब तीन साल तक चली कानूनी प्रक्रिया और 127 सुनवाई के बाद आया है। 2 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अदालत के फैसले के बाद बोले बृजभूषण- ‘अगर दोषी होता तो खुद फांसी पर चढ़ जाता’

अदालत से बाहर निकलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा, “जब मुझ पर आरोप लगे थे, तभी मैंने कहा था कि अगर मेरे खिलाफ फैसला आया तो मैं खुद फांसी पर लटक जाऊंगा। आज अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी किया है। यह मेरे लिए और मेरे समर्थकों के लिए खुशी का दिन है।” जब उनसे आरोप लगाने वाली महिला पहलवानों के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने केवल इतना कहा, “जो हुआ, सो हुआ।”

2023 में दर्ज हुआ था मामला, कई धाराओं में चला मुकदमा

यह मामला जनवरी 2023 में उस समय सामने आया था, जब छह महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ महिलाओं की मर्यादा भंग करने, यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया था। एक नाबालिग पहलवान ने भी आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली, जिसके बाद पॉक्सो एक्ट से जुड़ा मामला बंद कर दिया गया। वहीं, ट्रायल के दौरान सह-आरोपी विनोद तोमर पर एक पीड़िता को धमकाने का आरोप भी तय किया गया था।

फैसले के बाद विपक्ष और आंदोलन पर साधा निशाना

अदालत से बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने खिलाफ चले आंदोलन और राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कई राजनीतिक दल और विभिन्न विचारधाराओं के लोग एकजुट हो गए थे, लेकिन अदालत के फैसले ने सच्चाई सामने ला दी। उन्होंने दावा किया कि वह हमेशा जूनियर और कमजोर खिलाड़ियों के हितों के लिए लड़ते रहे हैं और इसी वजह से उनके खिलाफ माहौल बनाया गया। फिलहाल अदालत के फैसले के बाद इस बहुचर्चित मामले में उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिल गई है।