Land Deal Case: जमीन की बकाया रकम न देना कब तक ‘Cheating’ नहीं? पटना हाईकोर्ट की इस टिप्पणी ने साफ कर दिया नियम | Source: Hindustan Times.comProperty Dispute में बड़ा फैसला, कोर्ट ने कहा- सिर्फ Agreement का उल्लंघन अपने आप में आपराधिक मामला नहीं; धोखाधड़ी साबित करने के लिए शुरुआत से ही गलत नीयत का होना जरूरी

Land Deal Case: जमीन की बकाया रकम न देना कब तक ‘Cheating’ नहीं? पटना हाईकोर्ट की इस टिप्पणी ने साफ कर दिया नियमSource : Hindustan Times.com

पटना हाईकोर्ट ने जमीन के एक विवादित सौदे से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जमीन के सौदे में बकाया रकम का भुगतान नहीं करना अपने आप में धोखाधड़ी यानी Cheating का अपराध नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि समझौता करते समय से ही आरोपी की नीयत धोखा देने की थी।

पटना हाईकोर्ट ने क्या कहा?

सिवान के जमीन विवाद से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट ने योगेश कुमार सिंह की क्वैशिंग याचिका खारिज कर दी। न्यायाधीश आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि केवल अनुबंध का उल्लंघन होने से हर मामले में आपराधिक मामला नहीं बन जाता।

अदालत के सामने मामला जमीन खरीद के एक समझौते से जुड़ा था, जिसमें जमीन की पूरी रकम का भुगतान नहीं होने को लेकर शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता ने इसे धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र का मामला बताया था।

 क्या है पूरा मामला?

मामला 15 जनवरी 2021 को हुए जमीन खरीद समझौते से जुड़ा है। शिकायतकर्ता योगेश कुमार सिंह के मुताबिक, पांच कट्ठा जमीन की कीमत 2.26 करोड़ रुपये तय हुई थी और इसके लिए 20 लाख रुपये अग्रिम दिए गए थे।

बाद में छह कट्ठा छह धुर जमीन की रजिस्ट्री लालिता देवी के नाम कर दी गई। इसके बदले 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसके बाद 46 लाख रुपये और अतिरिक्त जमीन की कीमत के 44.20 लाख रुपये समेत कुल 90.20 लाख रुपये बकाया रह गए।

बकाया राशि नहीं मिलने पर योगेश कुमार सिंह ने लालिता देवी और शिवजी प्रसाद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसमें धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए थे।

अदालतों में क्या हुआ?

सिवान के न्यायिक दंडाधिकारी ने 24 जनवरी 2024 को शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके बाद पुनरीक्षण अदालत में भी मामला गया, लेकिन वहां भी इसे मूल रूप से दीवानी विवाद माना गया और राहत नहीं मिली।

इसके बाद मामले में हाईकोर्ट का रुख किया गया। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि केवल रकम का भुगतान नहीं होना अपने आप में Cheating का अपराध साबित नहीं करता।

धोखा देने की नीयत का ठोस सबूत जरूरी

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में करीब 1.80 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं था, जिससे यह साबित हो कि समझौते के समय से ही आरोपितों की नीयत धोखा देने की थी।

अदालत ने यह भी कहा कि केवल बाद में वादा पूरा नहीं करने से धारा 420 के तहत अपराध नहीं बन जाता। शिकायतकर्ता यह भी नहीं बता सका कि आरोपितों को कोई संपत्ति सौंपी गई थी, जिसका उन्होंने बेईमानी से दुरुपयोग किया हो।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

पटना हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हर Agreement का उल्लंघन Cheating नहीं होता। अदालत के मुताबिक, इस मामले का मूल स्वरूप बकाया राशि की वसूली से जुड़ा है, इसलिए इसे आपराधिक कार्यवाही का आधार नहीं बनाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने इसी आधार पर क्वैशिंग याचिका खारिज कर दी। अदालत की इस टिप्पणी से साफ है कि किसी जमीन या अन्य Contract में बाद में भुगतान न होना और शुरुआत से धोखा देने की नीयत होना, दोनों कानूनी रूप से अलग परिस्थितियां हैं।