प्रयागराज: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला कानूनी मोड़ सामने आया है। सिख समुदाय पर अमेरिका में दिए गए एक बयान को लेकर लगातार कानूनी शिकंजे में घिरते दिख रहे राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक ऐसा झटका दिया है, जिसने विरोधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। कोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज करते हुए उन्हें प्रचंड राहत दी है।
हाई कोर्ट का वह फैसला, जिसने सबको चौंका दिया
गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा और अन्य द्वारा दायर याचिका पर अपना अंतिम फैसला सुनाया। यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने वाराणसी की निचली अदालत द्वारा एफआईआर की अर्जी खारिज किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब जारी कर दिया गया है।
अमेरिका की वो स्पीच और भारत में खलबली
यह पूरा विवाद साल 2024 में राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान दिए गए एक बयान से शुरू हुआ था। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा था कि भारत में असली लड़ाई इस बात की है कि क्या किसी सिख को पगड़ी पहनने, कड़ा धारण करने और गुरुद्वारे जाने की आजादी मिलेगी। इस बयान को सिख समुदाय के अपमान से जोड़ते हुए वाराणसी के सारनाथ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। जब पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, तो याचिकाकर्ता अदालत की शरण में पहुंच गए।
निचली अदालतों का चक्कर और अधिकार क्षेत्र का पेच
इस मामले की कानूनी यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही:
- 28 नवंबर 2024: ACJM-II अदालत ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि बयान अमेरिका में दिया गया था, जो भारतीय अदालत के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से बाहर है।
- 21 जुलाई 2025: MP/MLA कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की, जिसके बाद मामला दोबारा ACJM-IV के पास पहुंचा।
- निचली अदालत का दूसरा इनकार: ACJM नीरज त्रिपाठी ने घटना की सटीक तारीख और समय का उल्लेख न होने के कारण मामले को फिर से खारिज कर दिया।
- अंतिम मोड़: इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां आखिरकार याचिका पूरी तरह से निरस्त कर दी गई।
राहुल गांधी की दो टूक: 'मैं सच्चा देशभक्त हूं'
मामले की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने MP/MLA कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल कर याचिका को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताया था। खुद को देश का सच्चा देशभक्त बताते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया था कि वे सभी धर्मों और विशेष रूप से सिख समुदाय का गहरा सम्मान करते हैं। उनके बयान का मकसद सिखों के अधिकारों और देश में उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित करना था, न कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में कानूनी कार्रवाई की तमाम गुंजाइशें खत्म हो गई हैं।
