नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच राजनीतिक टकराव अब एक नई दिशा में पहुंच गया है। संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक एक-दूसरे पर सवाल उठाने वाले दोनों नेताओं के बीच अब आमने-सामने खुली बहस को लेकर चुनौती सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 3 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से बहस करने की चुनौती दी। खास बात यह रही कि राहुल गांधी ने इस बार केवल प्रधानमंत्री को निशाने पर नहीं लिया, बल्कि उनकी चुनौती स्वीकार करवाने के लिए भाजपा के चार बड़े नेताओं को भी अपनी पोस्ट में शामिल कर लिया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक जनमत सर्वेक्षण साझा करते हुए देश के युवाओं और आम लोगों से पूछा कि क्या वे राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के बीच सीधी बहस देखना चाहते हैं? उन्होंने इस सवाल के साथ दो ऐसे विकल्प दिए, जिनके जरिए प्रधानमंत्री पर राजनीतिक तंज भी कसा गया। राहुल गांधी की इस पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दी सीधी चुनौती, जनता के सामने रखे दो विकल्प
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पूछा कि क्या देश के युवा राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच खुली बहस देखना चाहते हैं? इसके लिए उन्होंने दो विकल्प दिए। पहला था- 'हां, मोदी जी, डरो मत' और दूसरा था- 'नहीं, मोदी जी, डर गए।'
इस जनमत सर्वेक्षण के जरिए राहुल गांधी ने जनता की राय जानने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को सीधे बहस के लिए सामने आने की चुनौती भी दोहराई। उनकी पोस्ट का अंदाज राजनीतिक रूप से काफी आक्रामक था। उन्होंने बहस के मुद्दे को केवल दो नेताओं के बीच का मामला नहीं रहने दिया, बल्कि इसे देश के युवाओं और आम जनता की राय से जोड़ने का प्रयास किया।
राजनाथ सिंह से योगी आदित्यनाथ तक को किया टैग, पीएम को मनाने की अपील
राहुल गांधी की पोस्ट का सबसे चर्चित हिस्सा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को टैग करना रहा। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी पोस्ट में शामिल किया।
राहुल गांधी ने इन नेताओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस के लिए तैयार करने की अपील की। उन्होंने लिखा कि राजनाथ सिंह जी, नितिन गडकरी जी, शिवराज सिंह चौहान जी और योगी आदित्यनाथ जी, आप हमेशा प्रधानमंत्री के हित के बारे में सोचते हैं। इसलिए कृपया उन्हें बहस के लिए आने के लिए मना लीजिए।
इस तरह राहुल गांधी ने अपनी चुनौती के साथ भाजपा के चार प्रमुख चेहरों को भी जोड़ दिया। उनके इस कदम को प्रधानमंत्री पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
24 घंटे तक जवाब नहीं मिलने का दावा, वीडियो जारी कर फिर साधा निशाना
जनमत सर्वेक्षण साझा करने से पहले राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दिए हुए 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
राहुल गांधी ने वीडियो में कहा कि प्रधानमंत्री विपक्ष को देशविरोधी बताते हैं। ऐसे में उन्हें किसी भी मंच और किसी भी स्थान पर आमने-सामने बहस के लिए तैयार होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि वे अपनी पसंद का मंच और जगह चुन लें, लेकिन बहस से पीछे नहीं हटें।
उन्होंने सवाल उठाया कि देशविरोधी कौन है, विदेशी ताकतों के साथ किसके संबंध हैं और उन संबंधों की वास्तविक प्रकृति क्या है? राहुल गांधी का कहना था कि इन सवालों पर देश के सामने खुलकर चर्चा होनी चाहिए, ताकि आरोपों और दावों की सच्चाई स्पष्ट हो सके।
मोहन भागवत को भी निर्णायक बनाने की पेशकश, बहस में उठेंगे कई बड़े सवाल
राहुल गांधी ने अपनी चुनौती के दौरान बहस के संभावित प्रारूप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता एक मेज पर आमने-सामने बैठेंगे। वहां मीडिया के प्रतिनिधि और देश के युवा भी मौजूद रहेंगे। राहुल गांधी ने यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को बहस का निर्णायक बना सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इस बहस में देश की आर्थिक व्यवस्था और वित्तीय ढांचे से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे। राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर सवाल किया कि यह समझौता कैसे हुआ, क्यों हुआ और इतनी जल्दी क्यों किया गया? उन्होंने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री ने यह फैसला अकेले क्यों लिया और मंत्रिमंडल को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?
इसके अलावा राहुल गांधी ने अडानी मामले और एपस्टीन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन पर सार्वजनिक रूप से विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री उनके आरोपों का जवाब बहस के मंच पर दे सकते हैं।
अपने खिलाफ 45 मानहानि मुकदमों का जिक्र, विदेशी संबंधों पर भी बहस की मांग
राहुल गांधी ने वीडियो में अपने खिलाफ दर्ज मानहानि के मुकदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर लगभग 45 मानहानि के मुकदमे दर्ज हैं। राहुल गांधी के अनुसार, दूसरे मुद्दों पर उनके खिलाफ मानहानि की कार्रवाई की गई है, लेकिन विदेशी संबंधों से जुड़े इस विवाद पर बहस को लेकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे पर भी मानहानि का मुकदमा दर्ज करना है तो किया जाए। उनके मुताबिक, इस विषय पर भी खुलकर चर्चा हो सकती है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से जल्द से जल्द बहस के लिए सामने आने की अपील की। वीडियो के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री को दिवाली की शुभकामनाएं भी दीं।
विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बनने के आरोप के बाद शुरू हुआ विवाद
राहुल गांधी की इस चुनौती से पहले सोमवार को भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मोदी विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने हैं। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री को खुली बहस की चुनौती दी थी। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री उनकी चुनौती स्वीकार नहीं करेंगे।
इसके बाद राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर अपनी चुनौती दोहराई और फिर सोशल मीडिया पर जनमत सर्वेक्षण साझा किया। इस तरह कुछ ही समय के भीतर उन्होंने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।
नेशनल यूनिटी डे पर पीएम मोदी के बयान से शुरू हुई सियासी भिड़ंत
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 31 अक्टूबर 2026 को गुजरात के एकतानगर में नेशनल यूनिटी डे यानी राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर दिया गया भाषण है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जब देश बाहरी चुनौतियों का समाधान तलाश रहा था, उस समय देश के भीतर कुछ ताकतें झूठ और अफवाहें फैलाकर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही थीं।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश के नागरिक मजबूती से राष्ट्र के साथ खड़े रहे और यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि देश में विपक्ष अब विरोध पक्ष की भूमिका निभाने के बजाय अवरोध पैदा करने वाला पक्ष बन गया है।
मोदी ने कहा था कि कुछ लोग अपनी हताशा में देश के विकास के रास्ते में रुकावट बन रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने और भारत की छवि खराब करने की कोशिशों पर भी चिंता जताई थी। साथ ही देश को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ सतर्क रहने की अपील की थी।
राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और मुलाकातों पर भी मोदी ने उठाए थे सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और विदेश में होने वाली कुछ मुलाकातों का भी जिक्र किया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि कुछ लोग विदेश में चुपके से किन लोगों से मिल रहे हैं और भारत विरोधी ताकतें किसे समर्थन दे रही हैं?
प्रधानमंत्री ने कहा था कि एक दशक से अधिक समय की निराशा के बाद कुछ लोग अब खुलकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने देशवासियों से ऐसे घटनाक्रमों के पीछे के पैटर्न को पहचानने की अपील की थी।
मोदी ने यह भी सवाल किया था कि विदेश में कौन किससे मिल रहा है, भारत विरोधी ताकतें किन लोगों का समर्थन कर रही हैं और कौन भारत के दुश्मनों की भाषा बोल रहा है? प्रधानमंत्री के इन्हीं बयानों के बाद राहुल गांधी ने विदेशी संबंधों को लेकर खुली बहस की चुनौती दी।
अब प्रधानमंत्री के जवाब पर टिकी राजनीतिक गलियारों की नजर
राहुल गांधी की चुनौती, सोशल मीडिया पर साझा किए गए जनमत सर्वेक्षण और भाजपा के चार वरिष्ठ नेताओं को टैग करने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी ने बहस के लिए मंच, स्थान और निर्णायक तक का विकल्प देने की बात कही है। दूसरी ओर, इस पूरे विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के विपक्ष और विदेशी संपर्कों को लेकर दिए गए बयानों से हुई थी।
फिलहाल राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खुली बहस का प्रस्ताव दोहराया है। उन्होंने जनता से भी इस पर अपनी राय मांगी है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता इस चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल दोनों नेताओं के बीच आरोपों और सवालों की यह राजनीतिक लड़ाई खुली बहस की मांग तक पहुंच चुकी है।
