कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों को लेकर नया विवाद सामने आया है। राज्य के विभिन्न मुस्लिम संगठनों और नेताओं का आरोप है कि पुलिस की ओर से मस्जिदों में अज़ान के लिए इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। इस पूरे मामले ने राज्य की राजनीति और सामाजिक माहौल में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर कई मस्जिद समितियों का दावा है कि उन्हें स्थानीय थानों से मौखिक रूप से लाउडस्पीकर हटाने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर इस कार्रवाई को अदालत द्वारा निर्धारित शोर प्रदूषण नियमों के अनुपालन से जोड़कर देखा जा रहा है।
5000 लाउडस्पीकर हटाने के दावों से बढ़ी चर्चा
मुस्लिम समुदाय के कई प्रतिनिधियों का दावा है कि अब तक राज्यभर में लगभग 5000 लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से किसी लिखित आदेश की जानकारी सामने नहीं आई है। कई मस्जिद प्रबंधन समितियों का कहना है कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने मौखिक रूप से लाउडस्पीकर हटाने या ध्वनि व्यवस्था में बदलाव करने को कहा है। इसी कारण यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।
1200 से अधिक मस्जिदों और करीब 200 मंदिरों को नोटिस की चर्चा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत द्वारा निर्धारित शोर प्रदूषण मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्धारित ध्वनि सीमा का उल्लंघन करने के आरोप में 1200 से अधिक मस्जिदों और लगभग 200 मंदिरों को लाउडस्पीकर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कई इमामों का कहना है कि मस्जिद समितियों को पारंपरिक लाउडस्पीकर के स्थान पर निर्धारित मानकों के अनुरूप साउंड बॉक्स लगाने की सलाह दी गई है।
क्या है पूरा विवाद और सरकार का फैसला
विवाद की शुरुआत उस निर्णय से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सभी धार्मिक स्थलों पर अदालत द्वारा तय शोर प्रदूषण नियमों को लागू करने का फैसला किया था। नियमों के अनुसार दिन के समय ध्वनि का स्तर 55 डेसिबल और रात के समय 45 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए।
रिपोर्टों के मुताबिक राज्य पुलिस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि सभी धार्मिक संस्थान निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करें। इसी कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर लाउडस्पीकरों को लेकर विवाद सामने आया।
मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी
इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस के एक गुट की ओर से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की तैयारी की गई है। जानकारी के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखने वाला है। इस बैठक को विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमित शाह को सौंपा गया ज्ञापन
इधर, तृणमूल कांग्रेस के तीन बागी सांसदों—पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, खलीलुर रहमान और अबू ताहिर खान—ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। सांसदों ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए आग्रह किया कि शोर प्रदूषण संबंधी नियमों को लागू करते समय सभी धार्मिक समुदायों की भावनाओं का भी ध्यान रखा जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कानून का पालन आवश्यक है, लेकिन उसके क्रियान्वयन के दौरान धार्मिक आस्था और संवेदनशीलता को भी संतुलित तरीके से देखा जाना चाहिए।
धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठा
बागी तृणमूल विधायक अखरुज़्ज़मां ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हिंदू समुदाय को मंदिरों में पूजा-अर्चना करने की स्वतंत्रता प्राप्त है, उसी प्रकार मुसलमानों को भी मस्जिदों में जाकर अज़ान देने और नमाज़ अदा करने की पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस विषय को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा ताकि सभी पक्षों की बात सुनी जा सके।
मुस्लिम नेताओं ने आंदोलन की चेतावनी दी
पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने चेतावनी दी है कि यदि इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। चौधरी, जो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष भी हैं, ने आरोप लगाया कि पुलिस विभिन्न मस्जिदों में जाकर प्रबंधन समितियों पर लाउडस्पीकर हटाने का दबाव बना रही है।
उन्होंने कहा कि यदि समुदाय की चिंताओं का समाधान नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
हाई कोर्ट जाने के संकेत
इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी इस मामले में कानूनी रास्ता अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो वह हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
नौशाद सिद्दीकी ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया है या नहीं।
