ज़की अख़्तर:
भारत में चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुकी है। सुबह की शुरुआत से लेकर देर रात तक करोड़ों लोग कई बार चाय पीते हैं। कुछ लोगों के लिए दिन में 4 से 6 कप चाय पीना सामान्य बात है, जबकि कई लोग इससे भी ज्यादा चाय का सेवन करते हैं। हालांकि अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ज्यादा चाय पीने से किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित मात्रा में चाय पीना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है और शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, तब कुछ स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। खासकर किडनी से जुड़ी परेशानियों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है।
क्या ज्यादा चाय पीने से बढ़ सकता है किडनी स्टोन का खतरा? | फोटो: NDTV
चाय में मौजूद कैफीन और किडनी का संबंध समझना जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार चाय में कैफीन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में ड्यूरेटिक यानी मूत्रवर्धक प्रभाव पैदा करता है। इसका मतलब है कि चाय पीने के बाद पेशाब की मात्रा बढ़ सकती है। यदि कोई व्यक्ति बार-बार चाय पीता है लेकिन उसके मुकाबले पर्याप्त पानी नहीं पीता, तो शरीर में धीरे-धीरे पानी की कमी होने लगती है। किडनी का मुख्य काम शरीर से विषैले तत्वों और अतिरिक्त पदार्थों को बाहर निकालना होता है और इसके लिए शरीर का हाइड्रेटेड रहना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक डिहाइड्रेशन रहने पर किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि डॉक्टर यह स्पष्ट करते हैं कि केवल चाय पीने से किडनी फेल नहीं होती, लेकिन चाय के साथ पर्याप्त पानी न पीने की आदत किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है।
किडनी स्टोन के मामलों में क्यों दी जाती है चाय कम पीने की सलाह?
यूरोलॉजी विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्लैक टी में ऑक्सलेट नामक एक प्राकृतिक तत्व मौजूद होता है। जब शरीर में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक हो जाती है, तो यह कैल्शियम के साथ मिलकर कुछ लोगों में किडनी स्टोन बनने का कारण बन सकता है। यही वजह है कि जिन लोगों को पहले से किडनी स्टोन की समस्या रही है या जिनके परिवार में यह बीमारी आम है, उन्हें चाय का सेवन नियंत्रित रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को चाय पीने से किडनी स्टोन हो जाएगा। यह जोखिम मुख्य रूप से उन लोगों में बढ़ता है जो अत्यधिक मात्रा में चाय पीते हैं, पानी कम पीते हैं और संतुलित खानपान नहीं अपनाते। डॉक्टरों का मानना है कि यदि व्यक्ति पर्याप्त पानी पीता रहे, तो किडनी स्टोन का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ज्यादा चाय का असर सिर्फ किडनी तक सीमित नहीं रहता
चाय का अत्यधिक सेवन शरीर के कई अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। ज्यादा कैफीन लेने से नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है, बेचैनी और घबराहट बढ़ सकती है तथा दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज हो सकती है। कई लोगों में अधिक चाय पीने से एसिडिटी, गैस और पाचन संबंधी समस्याएं भी देखी जाती हैं। यदि चाय में अधिक चीनी और दूध मिलाकर पी जाती है, तो इससे वजन बढ़ने और ब्लड शुगर नियंत्रण पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग पानी की जगह बार-बार चाय पीते रहते हैं, जो लंबे समय में शरीर की प्राकृतिक जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता। इसलिए चाय को पानी का विकल्प समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।
कितनी चाय सुरक्षित है और किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ आमतौर पर दिन में 2 से 3 कप चाय को सुरक्षित मानते हैं। यह मात्रा अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं मानी जाती। हालांकि जिन लोगों को किडनी स्टोन, किडनी डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या नींद से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें चाय की मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी कैफीन का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि चाय पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि संतुलन बनाए रखना जरूरी है। यदि आप चाय पीने के शौकीन हैं, तो हर कप चाय के साथ पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और किडनी पर अनावश्यक दबाव न पड़े। सही मात्रा और सही आदतों के साथ चाय का आनंद लिया जा सकता है, बिना स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए।
