भारत में खांसी, जुकाम या गले में खराश होने पर मेडिकल स्टोर से सीधे कफ सिरप खरीद लेना आम बात रही है। कई लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय अपनी पुरानी दवा या मेडिकल स्टोर की सलाह पर सिरप खरीदकर इस्तेमाल कर लेते हैं। लेकिन अब यह व्यवस्था बदलने जा रही है। केंद्र सरकार ने दवाओं की बिक्री से जुड़े नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि कफ सिरप समेत सभी प्रकार की सिरप अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं बेची जा सकेंगी। यानी अब किसी भी मेडिकल स्टोर से सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर द्वारा जारी प्रिस्क्रिप्शन दिखाना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय का यह फैसला दवा सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और मरीजों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कफ सिरप, फोटो: ITG
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ वर्षों में दूषित और मानक से कम गुणवत्ता वाली कफ सिरप को लेकर कई गंभीर मामले सामने आए हैं। खासकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत से जुड़े मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर दिया था। जांच में सामने आया कि कुछ सिरप में गुणवत्ता संबंधी गंभीर खामियां थीं, जिसके बाद दवा निर्माण और बिक्री प्रणाली पर सवाल उठने लगे। इन घटनाओं ने यह चिंता बढ़ा दी कि आसानी से उपलब्ध होने वाली लिक्विड दवाओं की निगरानी और नियंत्रण को और मजबूत करने की जरूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सिरप का गलत इस्तेमाल, ओवरडोज़ और बिना चिकित्सकीय सलाह के सेवन कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
नियमों में क्या बदलाव किया गया है?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 'ड्रग्स रूल्स, 1945' की अनुसूची K में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। पहले कुछ प्रकार की सिरप को सीमित शर्तों के साथ बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेचा जा सकता था, लेकिन अब 'सिरप' शब्द को इस श्रेणी से हटा दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब सिरप को ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाओं की तरह नहीं बेचा जा सकेगा। मेडिकल स्टोर संचालकों को भी दवा बेचने से पहले डॉक्टर की पर्ची देखनी होगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिरप का उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही हो और दवा का अनियंत्रित इस्तेमाल रोका जा सके।
सरकार द्वारा जारी नोटिस, फोटो: आज तक
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर आम मरीजों पर दिखाई देगा। अब खांसी, जुकाम या गले की समस्या होने पर लोग सीधे मेडिकल स्टोर से सिरप नहीं खरीद पाएंगे। उन्हें पहले डॉक्टर से परामर्श लेना होगा और उसके बाद ही दवा मिलेगी। हालांकि इससे मरीजों को कुछ अतिरिक्त समय और खर्च का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि कई लोग बिना सही जांच के लंबे समय तक सिरप का इस्तेमाल करते रहते हैं, जिससे बीमारी छिप जाती है या स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
फार्मेसी और दवा उद्योग के लिए भी बढ़ेंगी जिम्मेदारियां
नए नियम लागू होने के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। अब बिना प्रिस्क्रिप्शन सिरप बेचने पर कार्रवाई की जा सकती है। दवा दुकानों को बिक्री का रिकॉर्ड बनाए रखने और नियामक नियमों का पालन करने पर अधिक ध्यान देना होगा। वहीं दवा निर्माताओं के लिए भी गुणवत्ता नियंत्रण के मानक और सख्त हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि दवा उत्पादन से लेकर बिक्री तक हर स्तर पर निगरानी बढ़ाने से मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
दवा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ इस फैसले को भारत में दवा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। दुनिया के कई देशों में पहले से ही कफ सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं की बिक्री पर सख्त नियंत्रण है। भारत में भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ाया गया है ताकि दवाओं का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। आने वाले समय में यह नियम न केवल कफ सिरप बल्कि अन्य दवाओं की बिक्री और उपयोग को लेकर भी नई जागरूकता पैदा कर सकता है। सरकार का संदेश साफ है-दवा चाहे कितनी भी सामान्य क्यों न हो, उसका इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही होना चाहिए।
