मुशर्रफ हुसैन:
कुछ साल पहले तक कमर दर्द, गर्दन दर्द और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं ज्यादातर बढ़ती उम्र के लोगों में देखने को मिलती थीं। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि आजकल स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर कॉलेज के छात्रों और युवाओं तक में स्पाइन यानी रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह बदलती जीवनशैली और मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता मानी जा रही है।
आज का बच्चा हो या युवा, घंटों मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप पर समय बिताता है। अक्सर लोग स्क्रीन देखते समय गर्दन को आगे की ओर झुका लेते हैं। शुरुआत में यह सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ाने लगती है। नतीजा यह होता है कि कम उम्र में ही दर्द, अकड़न और असहजता जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
मोबाइल की लत और भारी स्कूल बैग ने बढ़ाई टेंशन | फोटो: गूगल
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ मोबाइल ही नहीं, बल्कि भारी स्कूल बैग भी बच्चों की रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर डाल रहे हैं। कई बच्चे रोजाना अपनी क्षमता से ज्यादा वजन वाले बैग लेकर स्कूल जाते हैं। इससे उनकी पीठ और कंधों पर लगातार दबाव पड़ता है, जो आगे चलकर बड़ी समस्या का रूप ले सकता है।
माता-पिता अक्सर तब ध्यान देते हैं जब बच्चा कमर या गर्दन दर्द की शिकायत करता है। लेकिन कई बार बच्चे दर्द को सामान्य समझकर बताते ही नहीं। ऐसे में समस्या धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। डॉक्टरों का मानना है कि अगर समय रहते सही आदतें नहीं अपनाई गईं, तो भविष्य में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।
एक और चिंता की बात यह है कि बच्चों और युवाओं की शारीरिक गतिविधियां पहले की तुलना में काफी कम हो गई हैं। पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, दौड़ते थे और ज्यादा सक्रिय रहते थे। अब उनका बड़ा हिस्सा मोबाइल गेम, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गतिविधियों में बीतता है। इससे शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और रीढ़ की हड्डी को पर्याप्त सहारा नहीं मिल पाता।
हालांकि अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। सबसे पहले मोबाइल का इस्तेमाल करते समय गर्दन को ज्यादा झुकाने से बचना चाहिए। कोशिश करें कि स्क्रीन आंखों के स्तर पर रहे। इससे गर्दन पर कम दबाव पड़ेगा।
बच्चों के स्कूल बैग का वजन भी जरूरत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन के मुकाबले बहुत अधिक नहीं होना चाहिए। साथ ही बैग दोनों कंधों पर बराबर तरीके से टांगना चाहिए।
नियमित व्यायाम और योग भी रीढ़ की हड्डी को मजबूत रखने में मदद करते हैं। रोजाना थोड़ी देर टहलना, स्ट्रेचिंग करना और सक्रिय रहना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना भी जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रीढ़ की हड्डी पूरे शरीर का आधार होती है। अगर यह स्वस्थ रहेगी, तो शरीर भी बेहतर तरीके से काम करेगा। इसलिए छोटी उम्र से ही सही आदतें अपनाना बहुत जरूरी है।
आज के समय में तकनीक हमारी जरूरत बन चुकी है, लेकिन उसका सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है। थोड़ी सावधानी और अच्छी जीवनशैली अपनाकर बच्चों और युवाओं को स्पाइन से जुड़ी कई समस्याओं से बचाया जा सकता है। यही छोटी-छोटी आदतें भविष्य में बड़ी परेशानियों से बचाने का काम कर सकती हैं।
