भवानीपुर चुनाव नतीजे को चुनौती देने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी।

भवानीपुर चुनाव नतीजे को चुनौती देने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भवानीपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सीट से मिली हार के 42 दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मंगलवार को वह अचानक हाईकोर्ट पहुंचीं और चुनाव याचिका से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, सांसद डेरेक ओ'ब्रायन, कल्याण बनर्जी और डोला सेन भी मौजूद रहे। ममता का यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में टीएमसी को कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में चुनाव नतीजों को अदालत में चुनौती देना बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

15 हजार से ज्यादा वोटों से मिली थी हार

भवानीपुर विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा और बेहद दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला था। मतगणना के शुरुआती दौर में ममता बनर्जी लगातार बढ़त बनाए हुए थीं और ऐसा लग रहा था कि वह सीट बचाने में सफल हो जाएंगी। हालांकि जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, दोनों नेताओं के बीच वोटों का अंतर कम होता गया। अंतिम चरणों में शुभेंदु अधिकारी ने बढ़त हासिल कर ली और आखिरकार 15,104 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शुभेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी के खाते में 58,812 वोट आए। इस नतीजे को राज्य की राजनीति में बड़ा झटका माना गया, क्योंकि भवानीपुर लंबे समय से ममता बनर्जी और टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

मतगणना के दौरान हुआ था भारी विवाद

भवानीपुर सीट की मतगणना के दौरान कई विवाद और आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए थे, जिसने पूरे चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया था। 4 मई 2026 को कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित मतगणना केंद्र में एक व्यक्ति के मोबाइल फोन के साथ अंदर पहुंचने की घटना सामने आई, जिसके बाद कुछ समय के लिए मतगणना प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी। इसके अलावा टीएमसी की ओर से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि उनके एजेंटों को मतगणना केंद्र में प्रवेश से रोका गया, सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्हें स्वयं धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। हालांकि चुनाव आयोग और प्रशासन की ओर से इन आरोपों को लेकर अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए गए थे, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी थी।

2021 की तरह फिर अदालत पहुंचीं ममता

ममता बनर्जी का चुनावी हार के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी से हारने के बाद भी उन्होंने चुनाव परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वह मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया में लंबित है और उसका अंतिम फैसला आना बाकी है। अब भवानीपुर सीट के नतीजों को लेकर दायर की गई नई याचिका ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस को हवा दे दी है। माना जा रहा है कि इस मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया, मतगणना और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। ऐसे में हाईकोर्ट का आगामी रुख न केवल इस सीट के लिए बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।