महाराष्ट्र की राजनीति पर बयान देते हुए संजय राउत। | Source: Pinterest

महाराष्ट्र की राजनीति पर बयान देते हुए संजय राउत।Source : Pinterest

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना के कुछ सांसदों के पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में जाने की अटकलों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। इसी बीच ऑपरेशन टाइगर नाम की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इन अटकलों के बीच शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। राउत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति बेईमान हो जाए तो उसे ज्यादा दिनों तक रोका नहीं जा सकता। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है और 19 जून को होने वाले शिवसेना स्थापना दिवस कार्यक्रम पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

आखिर ऑपरेशन टाइगर है क्या?

पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर की चर्चा लगातार हो रही है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना के कुछ सांसदों और नेताओं के शिंदे गुट के संपर्क में होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।

संजय राउत के बयान से क्यों बढ़ा सस्पेंस?

संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शिवसेना सिर्फ सांसदों और विधायकों की पार्टी नहीं है, बल्कि यह बाला साहेब ठाकरे की विचारधारा पर बनी एक मजबूत राजनीतिक ताकत है। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता या जनप्रतिनिधि ईमानदार नहीं रहना चाहता, तो उसे हमेशा के लिए रोका नहीं जा सकता। राउत के इस बयान को संभावित दल-बदल की अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सांसदों की बैठक के बाद तेज हुई चर्चाएं

हाल ही में उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित मातोश्री में पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई थी। बैठक के बाद कुछ सांसदों की गैरमौजूदगी और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि पार्टी नेतृत्व का दावा है कि सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है।

19 जून पर क्यों टिकी हैं निगाहें?

19 जून को शिवसेना का स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित होना है। इसे उद्धव ठाकरे के लिए शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कार्यक्रम में नेताओं और सांसदों की मौजूदगी से काफी हद तक साफ हो जाएगा कि पार्टी में सब कुछ ठीक है या नहीं।

महाराष्ट्र की राजनीति के लिए क्यों अहम है मामला?

शिवसेना के विभाजन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति पहले ही बड़े बदलाव देख चुकी है। ऐसे में अगर शिवसेना के किसी सांसद या नेता का रुख बदलता है तो इसका असर राज्य की राजनीति और आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि ऑपरेशन टाइगर को लेकर हो रही हर गतिविधि पर राजनीतिक दलों और जनता की नजर बनी हुई है।