न्यूयॉर्क। दुनिया इस समय युद्ध, जलवायु संकट, आर्थिक अनिश्चितता और तेजी से बदलती तकनीकी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे दौर में संयुक्त राष्ट्र को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने वाला है। मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल इस साल के अंत में समाप्त हो रहा है और 1 जनवरी 2027 से संगठन को नया महासचिव मिलेगा। इसी बीच इक्वाडोर की अनुभवी राजनयिक मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा का नाम सबसे चर्चित उम्मीदवारों में शामिल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके साथ आयोजित पांचवें इंटरएक्टिव डायलॉग के बाद उनकी उम्मीदवारी पर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

Maria Farnanda Wikipedia
कौन हैं मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा?
मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा इक्वाडोर की वरिष्ठ राजनयिक और राजनीतिज्ञ हैं। वह अपने देश की विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है। मई 2026 में एंटिगा और बारबुडा ने उनके नाम का आधिकारिक समर्थन किया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा में आयोजित संवाद के दौरान एस्पिनोसा ने सदस्य देशों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब दिए। उनसे नेतृत्व क्षमता, संयुक्त राष्ट्र सुधार, संगठन के अनुभव तथा शांति एवं सुरक्षा, मानवाधिकार और विकास से जुड़े विषयों पर सवाल पूछे गए।
दुनिया को भाषण नहीं, परिणाम चाहिए
अपने विजन डॉक्युमेंट में एस्पिनोसा ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया को केवल बहुपक्षीय सहयोग के आदर्शों की चर्चा नहीं, बल्कि ठोस परिणामों की जरूरत है। उनके अनुसार संयुक्त राष्ट्र को ऐसा संगठन बनना होगा जो संकटों की पहले पहचान कर सके, प्रभावी प्रतिक्रिया दे सके और वैश्विक स्तर पर लोगों का विश्वास दोबारा जीत सके। उन्होंने अपने विजन को पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित बताया। इनमें शांति और सुरक्षा को मजबूत करना, विकास को गति देना, डिजिटल और ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देना, नीतियों और उनके क्रियान्वयन के बीच की दूरी कम करना तथा संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को फिर से स्थापित करना शामिल है। एस्पिनोसा का कहना है कि महासचिव अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए संगठन की साख बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
महासचिव पद की दौड़ में कौन-कौन हैं शामिल?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा का मुकाबला पांच अन्य उम्मीदवारों से माना जा रहा है। हाल ही में गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिना रोड्रिग्स का नाम भी इस सूची में शामिल हुआ है। अन्य प्रमुख दावेदारों में चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बैचलेट शामिल हैं, जिन्हें ब्राजील और मैक्सिको का समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल एम. ग्रॉसी भी उम्मीदवार हैं, जिनके नाम का प्रस्ताव अर्जेंटीना ने दिया है। सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सैल को बुरुंडी का समर्थन हासिल है, जबकि कोस्टारिका की पूर्व उपराष्ट्रपति और अर्थशास्त्री रेबेका ग्रिनस्पैन को उनके देश ने नामित किया है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक संस्थाओं में लंबे अनुभव के कारण इस बार महासचिव पद की दौड़ को बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
महासचिव का चयन कैसे किया जाता है?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चयन केवल मतदान के आधार पर नहीं होता। सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उम्मीदवारों के नामों पर विचार करती है। इस प्रक्रिया में सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है क्योंकि उनके पास वीटो शक्ति होती है।
सुरक्षा परिषद की सिफारिश के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा अंतिम मंजूरी देती है। ऐसे में किसी भी उम्मीदवार के लिए वैश्विक समर्थन के साथ-साथ इन पांच शक्तिशाली देशों की सहमति हासिल करना भी आवश्यक होता है।
क्यों अहम है यह चुनाव?
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांति और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि हाल के वर्षों में यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौरान संगठन की प्रभावशीलता पर कई सवाल उठे हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों के तेजी से विस्तार ने भी संयुक्त राष्ट्र के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे में अगले महासचिव को न केवल देशों के बीच संवाद मजबूत करना होगा, बल्कि संगठन में सुधार और उसकी साख बहाल करने की चुनौती का भी सामना करना होगा।
भारत के लिए क्या मायने रखता है यह चुनाव?
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र में सुधार और सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। ऐसे में नई नियुक्ति पर भारत की भी करीबी नजर रहेगी। आने वाला महासचिव विकासशील देशों, ग्लोबल साउथ, जलवायु परिवर्तन, शांति स्थापना अभियानों और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दों पर कैसा रुख अपनाता है, इसका असर भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
आने वाले महीनों में उम्मीदवारों के साथ संवाद और कूटनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। इसके बाद सुरक्षा परिषद में विचार-विमर्श होगा और दुनिया को संयुक्त राष्ट्र का 10वां महासचिव मिलेगा।
