भारत में मानसून 2026 की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार उम्मीद से थोड़ी धीमी बनी हुई है। जहां कुछ दक्षिणी राज्यों में बारिश ने दस्तक दे दी है, वहीं उत्तर भारत-खासकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली-अब भी अच्छी बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी बड़ी वजह पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances), एल नीनो (El Niño) का असर और हवा के सिस्टम का कमजोर होना है। इन कारणों से मानसून की उत्तरी दिशा में बढ़त धीमी पड़ गई है।Monsoon slowdown

Monsoon slowdown

मुख्य वजह: मानसून क्यों धीमा पड़ा?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून की गति धीमी होने के पीछे कई प्राकृतिक और वायुमंडलीय कारण हैं। El Niño का असर समुद्र के तापमान को बढ़ा रहा है, जिससे बारिश बनाने वाले सिस्टम कमजोर पड़ रहे हैं। वहीं Western Disturbance (पश्चिमी विक्षोभ) उत्तर भारत के मौसम पैटर्न को बार-बार प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर हो गई हैं, जिससे नमी की आपूर्ति सही तरीके से नहीं हो पा रही। इन सब कारणों का असर यह है कि कई जगहों पर बारिश का वितरण अनियमित हो गया है, यानी कहीं भारी बारिश हो रही है तो कहीं सूखे जैसे हालात बने हुए हैं।

कहाँ-कहाँ पहुंच चुका है मानसून?

देश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में मानसून ने अपनी पकड़ बना ली है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और गोवा में मानसून सक्रिय हो चुका है और लगातार बारिश देखने को मिल रही है। वहीं महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी मानसूनी बारिश शुरू हो गई है। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत-असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में अच्छी बारिश जारी है। हालांकि कई अन्य राज्यों में अभी भी छिटपुट और असमान बारिश ही देखने को मिल रही है।

यूपी-दिल्ली में कब पहुंचेगी बारिश?

दिल्ली और आसपास के इलाकों में मौसम विभाग के अनुसार मानसून के जून के मध्य से लेकर आखिरी सप्ताह तक पहुंचने की संभावना है। इस दौरान कुछ जगहों पर हल्की बारिश और गरज-चमक देखने को मिल सकती है।

वहीं उत्तर प्रदेश में मानसून सबसे पहले पूर्वी हिस्सों में दस्तक देगा, जिसके बाद धीरे-धीरे पूरे राज्य में इसका प्रभाव बढ़ेगा। उम्मीद है कि जून के तीसरे सप्ताह से बारिश की गतिविधियां तेज हो जाएंगी। फिलहाल कुछ दिनों तक हल्की बारिश या स्थानीय गरज-चमक वाली बारिश ही देखने को मिलेगी, जबकि असली मानसूनी बारिश जून के दूसरे हिस्से में पूरी तरह सक्रिय होगी।

मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी

मौसम विशेषज्ञों ने इस साल मानसून को लेकर सावधानी की बात कही है। उनके अनुसार इस बार मानसून औसत से कम (below normal) रहने की संभावना है। साथ ही जून महीने में बारिश का वितरण भी असमान रह सकता है, जिसका असर कृषि गतिविधियों पर शुरुआती तौर पर देखने को मिल सकता है। किसान और आम लोगों को मौसम के बदलते पैटर्न पर ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

कुल मिलाकर इस बार मानसून की शुरुआत तो समय पर हुई है, लेकिन उसकी रफ्तार फिलहाल धीमी है। दक्षिण भारत में बारिश ने रफ्तार पकड़ ली है, जबकि उत्तर भारत अभी इंतज़ार की स्थिति में है। यूपी और दिल्ली में मानसून जून के आखिरी दिनों तक पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है, जिसके बाद बारिश में तेजी देखने को मिलेगी।