ऑपरेशन टाइगर विवाद पर प्रतिक्रिया देते शिवसेना नेता संजय राउत। | Source: Pinterest

शिवसेना नेता संजय राउत।Source : Pinterest

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। पिछले कुछ दिनों से राज्य में कथित ऑपरेशन टाइगर को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। राजनीतिक गलियारों में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना के कुछ सांसद और नेता पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का दामन थाम सकते हैं। इन खबरों ने राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है और विपक्षी खेमे में भी हलचल मचा दी है। इसी बीच शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इन चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए बड़ा बयान दिया है। राउत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति बेईमान है और पार्टी छोड़ने का मन बना चुका है, तो उसे ज्यादा दिन तक रोककर नहीं रखा जा सकता। उनके इस बयान को संभावित दल-बदल की अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, राउत की टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है, जबकि सभी की नजर अब शिवसेना के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है।

क्या है 'ऑपरेशन टाइगर'?

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ऑपरेशन टाइगर को लेकर चर्चाएं तेज हैं। दावा किया जा रहा है कि शिवसेना के कुछ सांसद और नेता एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। इन अटकलों को तब और बल मिला जब कुछ सांसदों की केंद्रीय नेताओं से मुलाकात और उद्धव ठाकरे की बैठक में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि अब तक किसी नेता ने पार्टी छोड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

संजय राउत ने क्या कहा?

ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि शिवसेना सिर्फ कुछ सांसदों या विधायकों की पार्टी नहीं है, बल्कि यह बाला साहेब ठाकरे की विचारधारा और लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत से खड़ी हुई एक मजबूत राजनीतिक ताकत है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति पार्टी और उसके सिद्धांतों के प्रति ईमानदार नहीं रहना चाहता, तो उसे ज्यादा समय तक रोका नहीं जा सकता। राउत ने भरोसा जताते हुए कहा कि समय आने पर सच्चाई सभी के सामने आ जाएगी और पार्टी पहले की तरह मजबूत बनी रहेगी।

सांसदों की बैठक के बाद क्यों बढ़ीं अटकलें?

हाल ही में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित मातोश्री में पार्टी सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कुछ सांसद व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि कुछ नेताओं ने वर्चुअल माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में पार्टी के भीतर संभावित टूट और दल-बदल की चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि इन अटकलों को खारिज करते हुए संजय राउत ने दावा किया कि शिवसेना के सभी नौ सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं और पार्टी में किसी तरह की बगावत की संभावना नहीं है।

केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात पर क्या बोले राउत?

कुछ सांसदों की केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात को लेकर उठ रहे सवालों पर भी संजय राउत ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी सांसद का केंद्रीय मंत्री, प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से मिलना कोई असामान्य बात नहीं है। राउत के मुताबिक, जनप्रतिनिधियों का दायित्व होता है कि वे अपने क्षेत्र और जनता से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने रखें। इसलिए ऐसी मुलाकातों को राजनीतिक साजिश या दल-बदल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

क्यों अहम माना जा रहा है यह मामला?

महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के बाद से राज्य की राजनीति लगातार बदलती रही है। ऐसे में यदि शिवसेना के किसी सांसद या नेता के पार्टी छोड़ने की खबर सामने आती है, तो इसका असर न केवल पार्टी की ताकत पर बल्कि आगामी चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि ऑपरेशन टाइगर से जुड़ी हर गतिविधि और बयान पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम जनता की भी नजर बनी हुई है।