महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की अटकलों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। इन चर्चाओं के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुंबई स्थित अपने आवास ‘मातोश्री’ में सभी लोकसभा सांसदों की अहम बैठक बुलाई। इस बैठक को सिर्फ एक नियमित संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि पार्टी की एकजुटता दिखाने और संभावित टूट की अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। हाल के दिनों में लगातार सामने आ रही राजनीतिक चर्चाओं के कारण इस बैठक पर न सिर्फ शिवसेना कार्यकर्ताओं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं। ऐसे समय में जब विपक्षी दलों और सत्ताधारी गठबंधन के बीच राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, उद्धव ठाकरे की यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

शिंदे के संपर्क में होने की चर्चाओं से बढ़ी सियासी हलचल

रविवार को दोपहर 12 बजे आयोजित इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के सभी नौ सांसदों को बुलाया गया। हाल के दिनों में कुछ सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में होने की खबरें सामने आई थीं। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा भी तेज हो गई थी। हालांकि, शिंदे इन दावों को पहले ही खारिज कर चुके हैं और कह चुके हैं कि चुनाव खत्म हो चुके हैं, इसलिए किसी संख्या बल की जरूरत नहीं है।

इन सांसदों की मौजूदगी पर टिकी रहीं सभी की नजरें

बैठक में खास तौर पर सांसद संजय उर्फ बंडू जाधव की मौजूदगी को लेकर उत्सुकता थी, क्योंकि वे पार्टी की कुछ पिछली बैठकों में शामिल नहीं हुए थे। ऐसे में उनकी उपस्थिति को लेकर राजनीतिक विश्लेषक कई तरह के संकेत तलाश रहे थे। उद्धव ठाकरे ने बैठक के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी के सभी सांसद उनके साथ हैं और किसी तरह की टूट की खबरों में फिलहाल कोई दम नहीं है।

लोकसभा की ताकत और आगे की रणनीति पर भी हुई चर्चा

लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं, जिनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई, संजय दीना पाटिल, राजाभाऊ वाजे और ओमप्रकाश राजेनिंबालकर समेत अन्य सांसद शामिल हैं। दूसरी ओर, केंद्र की राजनीति में बदलते समीकरणों और विपक्षी दलों की रणनीति पर भी नजर बनी हुई है। ऐसे माहौल में मातोश्री की यह बैठक महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह एक नियमित बैठक थी, लेकिन इसके राजनीतिक मायने आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकते हैं।