गाजियाबाद के कुशलिया गांव में मंगलवार को प्रशासन की एक कार्रवाई ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सरकारी रिकॉर्ड में रास्ते के रूप में दर्ज जमीन पर बने करीब 20 साल पुराने मदरसे को बुलडोजर चलाकर हटाया गया। प्रशासन का दावा है कि यह निर्माण बिना किसी वैध अनुमति के सरकारी भूमि पर किया गया था और वर्षों से वहां संचालित हो रहा था। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई किसी अचानक लिए गए फैसले का नतीजा नहीं थी, बल्कि शिकायत, राजस्व जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंजाम दी गई। इस कार्रवाई के साथ प्रशासन ने एक बार फिर साफ संदेश देने की कोशिश की है कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा।गाजियाबाद में 20 साल पुराने मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई | फोटो: हिन्दुस्तान न्यूज वेबसाइट

गाजियाबाद में 20 साल पुराने मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई | फोटो: हिन्दुस्तान न्यूज वेबसाइट

शिकायत से शुरू हुई जांच, राजस्व रिकॉर्ड ने खोली पूरी कहानी

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक मामला तब सामने आया जब सरकारी भूमि पर कब्जे की शिकायत संबंधित विभागों तक पहुंची। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति की जांच की। जांच के दौरान खसरा संख्या 1061 और 1067 से जुड़ी भूमि को सरकारी रास्ते की श्रेणी में दर्ज पाया गया। अधिकारियों का कहना है कि इसी भूमि पर ‘फ़ैज़-ए-आम मदरसा मिस्बाह उल उलूम’ नाम से निर्माण कराया गया था। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि निर्माण के लिए किसी प्रकार की वैध स्वीकृति या अनुमति नहीं ली गई थी। प्रशासन ने इसे सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।

दो दशक पुराना निर्माण, लेकिन कानूनी दस्तावेज नहीं

स्थानीय स्तर पर यह मदरसा लंबे समय से संचालित हो रहा था और गांव के लोगों के बीच इसकी पहचान भी बनी हुई थी। हालांकि प्रशासन का कहना है कि किसी निर्माण का पुराना होना उसे कानूनी वैधता नहीं देता। अधिकारियों के अनुसार कब्जा करने वाले व्यक्ति यामीन पुत्र गनी बताए गए हैं, जिनका अब निधन हो चुका है। राजस्व अभिलेखों की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जमीन सरकारी स्वामित्व वाली थी और उस पर किसी निजी या संस्थागत निर्माण की अनुमति नहीं थी। यही वजह रही कि प्रशासन ने इसे अवैध कब्जे की श्रेणी में रखते हुए कार्रवाई का निर्णय लिया।

एक करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाली जमीन हुई कब्जामुक्त

एसडीएम सदर अरुण दीक्षित के अनुसार लगभग 0.088 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। प्रशासन का अनुमान है कि मौजूदा बाजार मूल्य के हिसाब से इस जमीन की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक है। कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके पर मौजूद रही। सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोजर की मदद से पूरे निर्माण को हटाया गया और जमीन को दोबारा सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कब्जे में लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई जमीन का उपयोग भविष्य में सार्वजनिक हित और स्थानीय जरूरतों के अनुसार किया जाएगा।

सरकारी जमीनों पर अभियान जारी, प्रशासन ने दिया सख्त संदेश

गाजियाबाद प्रशासन इस कार्रवाई को व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान का हिस्सा बता रहा है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा कि जिलेभर में सरकारी भूमि की पहचान कर उसे अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान लगातार चल रहा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे न केवल सरकारी संसाधनों को प्रभावित करते हैं, बल्कि विकास कार्यों और आम लोगों की सुविधाओं में भी बाधा पैदा करते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में जांच के बाद नियमों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी भूमि की सुरक्षा, राजस्व रिकॉर्ड की निगरानी और अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासनिक सख्ती को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

धार्मिक और सामाजिक प्रतिक्रिया भी चर्चा में

मदरसे पर हुई इस कार्रवाई के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने नाराजगी भी जताई है। उनका कहना है कि करीब दो दशक से संचालित इस धार्मिक और शैक्षणिक संस्थान को हटाने से पहले प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था और व्यापक संवाद करना चाहिए था। समुदाय के लोगों का तर्क है कि जब किसी धार्मिक स्थल पर बुलडोजर कार्रवाई होती है, तो उसका असर सिर्फ एक इमारत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे लोगों की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ जाती हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई किसी धर्म विशेष को निशाना बनाकर नहीं, बल्कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के तहत की गई है। इसके बावजूद यह घटना एक बार फिर उस बहस को सामने ले आई है कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और धार्मिक आस्थाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।