वाराणसी में मंगलवार देर रात एक ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई हुई, जिसने शहर में नई बहस छेड़ दी है। काशी रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित अजगैब शहीद मजार और उससे सटी मस्जिद को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। आधी रात के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अंजाम दी गई। पुलिस और पीएसी के सैकड़ों जवानों की मौजूदगी में तीन बुलडोजरों ने कुछ ही घंटों में उस ढांचे को जमींदोज कर दिया, जिसे मुस्लिम समुदाय का एक वर्ग वर्षों पुराना धार्मिक स्थल मानता रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश और रेलवे की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया का हिस्सा थी।
काशी मॉडल स्टेशन परियोजना बनी कार्रवाई की वजह
दरअसल, राजघाट स्थित काशी रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। रेलवे के अनुसार परियोजना के लिए भूमि का सर्वेक्षण किया गया तो पता चला कि स्टेशन परिसर की कुछ जमीन पर अवैध कब्जा है। प्रशासन का दावा है कि रेलवे की इस भूमि पर पहले मजार बनाई गई और बाद में उसके आसपास मस्जिद तथा कब्रिस्तान का विस्तार हो गया। रेलवे ने इसे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मानते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। बताया जाता है कि जब स्टेशन के आधुनिकीकरण की योजना को अंतिम रूप दिया गया, तब इस भूमि की स्थिति को लेकर विवाद तेज हुआ। रेलवे अधिकारियों ने इसे परियोजना में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बताया था। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे पेश किए।
दो साल तक चला कानूनी संघर्ष
अजगैब शहीद मजार और मस्जिद को लेकर पिछले करीब दो वर्षों से कानूनी लड़ाई चल रही थी। मुस्लिम पक्ष का कहना था कि यह धार्मिक स्थल सैकड़ों वर्ष पुराना है और स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। वहीं प्रशासन और रेलवे लगातार यह दावा करते रहे कि भूमि रेलवे की है और वहां मौजूद निर्माण वैध नहीं हैं। हाल ही में अदालत से आए फैसले में मजार पक्ष को राहत नहीं मिली। इसके बाद रेलवे ने जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार निर्धारित समय सीमा के भीतर स्थल खाली नहीं किया गया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का निर्णय लिया गया। मंगलवार रात इसी आदेश के पालन में बुलडोजर चलाया गया।
रातों-रात हटाया गया पूरा मलबा
कार्रवाई को लेकर प्रशासन किसी तरह का विवाद या तनाव नहीं चाहता था। यही वजह रही कि आधी रात के समय ऑपरेशन शुरू किया गया। मस्जिद और मजार के चारों ओर पहले बैरिकेडिंग की गई, फिर सुरक्षा घेरा बनाया गया। मौके पर डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। ध्वस्तीकरण के बाद प्रशासन ने रात में ही मलबा हटाने का काम भी पूरा कर लिया। ट्रकों और अन्य वाहनों के जरिए अवशेषों को मौके से हटाया गया ताकि सुबह तक पूरा क्षेत्र खाली दिखाई दे। अधिकारियों का मानना है कि इससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली।
धार्मिक विरासत बनाम विकास
इस कार्रवाई ने एक बार फिर उस बहस को सामने ला दिया है जिसमें विकास परियोजनाओं और धार्मिक-ऐतिहासिक स्थलों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती दिखाई देती है। एक ओर प्रशासन और रेलवे इसे सार्वजनिक परियोजना के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि लंबे समय से मौजूद धार्मिक संरचनाओं के भविष्य को लेकर क्या कोई वैकल्पिक व्यवस्था संभव थी। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। वहीं काशी मॉडल स्टेशन परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता अब साफ हो गया है। लेकिन वाराणसी की इस आधी रात की कार्रवाई ने यह जरूर दिखा दिया है कि विकास, विरासत और आस्था के बीच संतुलन बनाना आज भी प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
