काबा इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है और इसे किसवा नाम के एक बड़े काले कपड़े से ढका जाता है। कई लोग मानते हैं कि काले रंग का संबंध पूरी तरह धार्मिक कारणों से है, लेकिन इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा ऐतिहासिक प्रथाओं और सदियों से चली आ रही शाही पसंद से भी जुड़ी हुई है। आइए जानते हैं कि काबा को हमेशा काले रंग के कपड़े से क्यों ढका जाता है।
अलग-अलग रंगों की किसवा का भी हुआ है इस्तेमाल
ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, इस्लामी इतिहास के विभिन्न दौर में काबा को अलग-अलग रंगों के कपड़ों से भी ढका गया था। बीते समय में सफेद, लाल और हरे रंग की चादरों का उपयोग किया जाता था। हालांकि, अब्बासिद राजवंश के शासनकाल में काला रंग स्थायी रूप से अपनाया गया। मक्का पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद अब्बासिद शासकों ने काली किसवा की परंपरा शुरू की, जो आज तक जारी है।
काले रंग को चुनने के पीछे क्या वजह थी?
काले रंग को चुनने के पीछे एक प्रमुख कारण इसकी मजबूती मानी जाती है। किसवा मजबूत काले रेशम से तैयार की जाती है, जो मक्का की तीव्र गर्मी और तेज धूप को सहन करने के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा, हज और उमरा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लगातार स्पर्श को भी यह कपड़ा बेहतर तरीके से झेल सकता है।
सोने और चांदी की कढ़ाई को उभारता है काला रंग
काले रंग को अपनाने का एक और महत्वपूर्ण कारण इसकी सुंदरता और आकर्षण है। किसवा पर सोने और चांदी के धागों से कुरान की आयतों की कढ़ाई की जाती है। काले रंग की पृष्ठभूमि पर यह कढ़ाई अधिक स्पष्ट, आकर्षक और भव्य दिखाई देती है। किसवा पर की गई अरबी सुलेख कला आज काबा की सबसे पहचान योग्य विशेषताओं में से एक मानी जाती है।
हर साल बदली जाती है किसवा
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार काबा की किसवा को हर वर्ष बदला जाता है। यह प्रक्रिया अत्यंत सावधानी और धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न की जाती है। पुरानी किसवा को हटाने के बाद उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए जाते हैं। इन टुकड़ों को अक्सर मुस्लिम देशों, इस्लामी संस्थानों और दुनिया भर के संग्रहालयों को उपहार के रूप में दिया जाता है।
मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र दिशा
मस्जिद अल-हरम के भीतर स्थित काबा वह पवित्र स्थल है जिसकी ओर दुनिया भर के मुसलमान नमाज अदा करते हैं। यही कारण है कि काबा और उससे जुड़ी परंपराओं का इस्लामी इतिहास और संस्कृति में विशेष महत्व है।
